फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   लापरवाही से जिले में मात खा गई हौसला साझेदारी योजना

लापरवाही से जिले में मात खा गई हौसला साझेदारी योजना

Sat, 30 Dec 2017 12:57 AM IST
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:57 AM IST
विज्ञापन
लापरवाही से जिले में मात खा गई हौसला साझेदारी योजना
शामली।
विज्ञापन

परिवार नियोजन कार्यक्रम को परवान चढ़ाने के लिए चलाई जा रही सरकार की हौसला साझेदारी योजना जिले में स्वास्थ्य विभाग के कारिंदों के कारण मात खा गई। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण योजना धरातल पर ही हांफ रही है।
दरअसल, परिवार नियोजन कार्यक्रम की अच्छी प्रगति के लिए सरकार द्वारा हौसला साझेदारी योजना चलाई गई थी। इस योजना के तहत प्राइवेट अस्पतालों के साथ अनुबंध किए गए थे। जिसमें परिवार नियोजन की सेवाओं को मुहैया कराया जाना था। प्राइवेट अस्पतालों में नसबंदी कराने वाले लाभार्थी को एक हजार रुपये और सेवा प्रदाता अस्पताल को सरकार की ओर से दो हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है। शामली में चार अस्पतालों के साथ अनुबंध किया गया था, जिसमें अग्रवाल नर्सिंग होम, बहल नर्सिंग होम, गेटवेल और बोहरा नर्सिंग होम के साथ साझेदारी की गई थी। मगर, योजना शुरू होने के बाद से अब तक इस साल चारों अस्पतालों में मात्र 20 ही नसबंदी के केस हुए है। जबकि इसके सापेक्ष सरकारी अस्पताल में इस साल अभी तक 594 नसबंदी के केस किए गए।
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी और लापरवाही
इस योजना के तहत चुने गए सभी अस्पतालों के खाते में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 25-25 केस का भुगतान 75-75 हजार रुपये का एडवांस में भुगतान किए जाना था, ताकि यदि उनके पास कोई मरीज आए तो उसे भुगतान किया जा सके। इसी मामले में विभाग ने लापरवाही कर दी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी भी अस्पताल को यह भुगतान नहीं दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे अधिकारी
दरअसल, खर्च करने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की हालत बहुत खराब है। दस माह बीत गए, लेकिन कुल बजट का अभी तक 61 प्रतिशत ही बजट खर्च किया गया है। इसमें कई पटल और योजनाएं ऐसी है, जिनमें खर्च किए जाने का प्रतिशत अभी तक नहीं खुला है। ऐसे में हौसला साझेदारी योजना में भी खर्च नहीं किया गया। इससे साफ है कि महकमे के अधिकारी स्वयं ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे है।


मामला बेहद गंभीर है। भुगतान की समस्या की बात सामने आई थी। यदि स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर इस मामले में लापरवाही हुई तो सुधार किया जाएगा और संबंधित अस्पताल को उनका भुगतान करा दिया जाएगा। - डाक्टर राजकुमार, सीएमओ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed