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पैग मार और खेत से घास की गठरी ले आ...
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:29 AM IST
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शामली।
कमालपुर में ज्यादातर ग्रामीण शराब के नशे में इस कदर फंसे हुए हैं कि सुबह हो या फिर शाम उनको शराब चाहिए। चाहे उनको इसके लिए शराब बेचने वाले के यहां पर मजदूरी ही क्यों ना करनी पड़े। जोगा सिंह भी शराब देकर अपने यहां मजदूरी कराने में माहिर था। भले ही उसे उनसे घास की गठरी अपने घर मंगवानी हो।
गांव कमालपुर में जोगा सिंह सालों से शराब बेच रहा था। पूरे गांव को इसका पता था। कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन पुलिस कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। जोगा सिंह की माली हालत ठीक नहीं थी, लेकिन शराब बेचने और उसके रुपये वसूलने में वह माहिर था। गांव में ज्यादातर ऐसे लोग उसके यहां से शराब लेते थे जिनकी हालत खस्ता थी। ग्रामीणों को वह पैग 10 रुपये में देता था। यदि किसी के पास देने के लिए पैसे नहीं होते तो जोगा सिंह उसको अपने यहां पर मजदूरी पर लगा लेता था। पशुओं का गोबर उठवाना और खेत से चारा मंगवाना भी शराब के कीमत के रूप में वसूला जाता था और शराब की लत में फंसे लोग उसके यहां यह काम भी करते थे।
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कमालपुर में ज्यादातर ग्रामीण शराब के नशे में इस कदर फंसे हुए हैं कि सुबह हो या फिर शाम उनको शराब चाहिए। चाहे उनको इसके लिए शराब बेचने वाले के यहां पर मजदूरी ही क्यों ना करनी पड़े। जोगा सिंह भी शराब देकर अपने यहां मजदूरी कराने में माहिर था। भले ही उसे उनसे घास की गठरी अपने घर मंगवानी हो।
गांव कमालपुर में जोगा सिंह सालों से शराब बेच रहा था। पूरे गांव को इसका पता था। कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन पुलिस कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। जोगा सिंह की माली हालत ठीक नहीं थी, लेकिन शराब बेचने और उसके रुपये वसूलने में वह माहिर था। गांव में ज्यादातर ऐसे लोग उसके यहां से शराब लेते थे जिनकी हालत खस्ता थी। ग्रामीणों को वह पैग 10 रुपये में देता था। यदि किसी के पास देने के लिए पैसे नहीं होते तो जोगा सिंह उसको अपने यहां पर मजदूरी पर लगा लेता था। पशुओं का गोबर उठवाना और खेत से चारा मंगवाना भी शराब के कीमत के रूप में वसूला जाता था और शराब की लत में फंसे लोग उसके यहां यह काम भी करते थे।
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