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ावण का अंत कर राम ने की विजय प्राप्त
Updated Sun, 01 Oct 2017 12:11 AM IST
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जलालाबाद।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयदशमी पर्व क्षेत्र में उत्साह के साथ मनाया गया। घरों में शस्त्रों का पूजन हुआ और मंदिरों में भी पूजा की गई। वहीं, रामलीला में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया।
जलालाबाद में विजयदशमी पर्व पर शाम के समय रामलीला मैदान पर श्रीराम और रावण के बीच युद्ध हुआ। बुराई के प्रतीक रावण का अंत कर श्रीराम ने विजय प्राप्त की। इसके बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले का दहन किया गया। जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से हजारों लोग मौजूद रहे। इससे पूर्व राम-रावण युद्ध में प्राचीन अस्त्र शस्त्र कला का प्रदर्शन गुरू बालीराम अखाड़े के युवाओं द्वारा किया गया। आयोजन में भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
वहीं मेले श्री दुर्गादेवी मंदिर प्रबंध समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए बेहतर कराई गई थी। सर्कस, कई प्रकार के झूले, मौत का कुआं और खाने पीने की दुकानों की खास व्यवस्था की गई थी। जिसका बच्चों के साथ बड़ों ने भी जमकर आनंद उठाया। इस दौरान उपेंद्र गुप्ता, पप्पू नारंग, रोमिल मितल, आदेश गर्ग, श्रीराम पथिक, पप्पू सैनी, बृजमोहन, बाबूराम आदि का सहयोग रहा।
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बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयदशमी पर्व क्षेत्र में उत्साह के साथ मनाया गया। घरों में शस्त्रों का पूजन हुआ और मंदिरों में भी पूजा की गई। वहीं, रामलीला में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया।
जलालाबाद में विजयदशमी पर्व पर शाम के समय रामलीला मैदान पर श्रीराम और रावण के बीच युद्ध हुआ। बुराई के प्रतीक रावण का अंत कर श्रीराम ने विजय प्राप्त की। इसके बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले का दहन किया गया। जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से हजारों लोग मौजूद रहे। इससे पूर्व राम-रावण युद्ध में प्राचीन अस्त्र शस्त्र कला का प्रदर्शन गुरू बालीराम अखाड़े के युवाओं द्वारा किया गया। आयोजन में भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
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वहीं मेले श्री दुर्गादेवी मंदिर प्रबंध समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए बेहतर कराई गई थी। सर्कस, कई प्रकार के झूले, मौत का कुआं और खाने पीने की दुकानों की खास व्यवस्था की गई थी। जिसका बच्चों के साथ बड़ों ने भी जमकर आनंद उठाया। इस दौरान उपेंद्र गुप्ता, पप्पू नारंग, रोमिल मितल, आदेश गर्ग, श्रीराम पथिक, पप्पू सैनी, बृजमोहन, बाबूराम आदि का सहयोग रहा।
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