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इसबार भी हरियाणा का गन्ना वेस्ट यूपी और उतराखंड को कर सकता है कूच

Fri, 07 Dec 2018 12:23 AM IST
Updated Fri, 07 Dec 2018 12:23 AM IST
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इसबार भी हरियाणा का गन्ना वेस्ट यूपी और उतराखंड को कर सकता है कूच
इस बार भी हरियाणा का गन्ना वेस्ट यूपी और उत्तराखंड को कर सकता है कूच
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शामली। हरियाणा की चीनी मिलों की पेराई क्षमता गन्ना उत्पादन की अपेक्षा कहीं कम है। इस वजह से हरियाणा के गन्ना किसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की चीनी मिलों की ओर रुख कर सकते हैं। गन्ना माफिया पर अंकुश लगाने के लिए गन्ना आयुक्त के निर्देश पर डीएम अखिलेश कुमार ने एसडीएम की अध्यक्षता में गन्ना सहकारी समितियों के ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षकों और सचिव की टीम गठित कर दी है।
वेस्ट यूपी के जिलों से लगी पड़ोसी प्रांत हरियाणा की गन्ना बेल्ट सोनीपत, पानीपत, करनाल और यमुनानगर जिलों की चीनी मिलें गन्ना के सापेक्ष कम गन्ने की पेराई करती है। चीनी मिलों की पेराई क्षमता कम होने से हरियाणा के पानीपत और करनाल जिले से गन्ना शामली जिले से उत्तराखंड की चीनी मिलों तक जाता है। वेस्ट यूपी के शामली जिले से जुड़े करनाल जिले में दस हजार हेक्टेयर गन्ने का रकबा है। पूरे सीजन में एक मात्र चीनी मिल तीन लाख 50 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर पाती है। यहां की चीनी मिल की पेेराई क्षमता 22 हजार 500 क्विंटल की प्रतिदिन की क्षमता है। पानीपत जिले की सहकारी चीनी मिल पूरे जिले में 30 लाख क्विंटल गन्ने की पेेेराई कर पाती है। चीनी मिल की पेराई क्षमता मात्र 18 हजार क्विंटल प्रतिदिन है। पानीपत जिले में मात्र 45 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन होता है। हरियाणा में गन्ने के उत्पादन के सापेक्ष चीनी मिलों की पेराई क्षमता कम होने के कारण हरियाणा प्रांत के पड़ोसी जिलों का गन्ना वेस्ट यूपी और उत्तराखंड के जिलों में आना शुरू हो जाता है। हरियाणा का गन्ना आने के मामले में ऊन चीनी मिल के खिलाफ दो साल पूर्व रिपोर्ट भी दर्ज हो चुकी है। शामली गन्ना परिषद के पूर्व चेयरमैन राजवीर सिंह का कहना है कि हरियाणा में गन्ना के सापेक्ष चीनी मिलों की गन्ना पेराई कम होने से वहां के किसान अपना गन्ना लेकर वेस्ट यूपी और उत्तराखंड की चीनी मिलों में पहुंचते हैं। जिला गन्ना अधिकारी डॉक्टर अनिल भारती का कहना है कि हरियाणा का गन्ना अभी तक जिले में आना शुरू नहीं हुआ है। बाहरी गन्ने पर नजर रखी जा रही है। डीएम अखिलेश कुमार सिंह ने एसडीएम की अध्यक्षता में समिति के सचिवों, ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षकों की टीम गठित कर दी है।
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हरियाणा का गन्ना आने पर होगी कार्रवाई
सहारनपुर मंडल के उपगन्ना आयुक्त डॉक्टर दिनेश्वर मिश्र ने कहा कि हरियाणा का गन्ना उत्तराखंड की चीनी मिलों को पेराई के लिए जाता है। हरियाणा से वेस्ट यूपी की चीनी मिलों को आने वाले गन्ने को अवैध मानकर कार्रवाई की जाएगी। जिलास्तर पर अवैध रूप से गन्ना रोकने के लिए टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि गन्ना माफिया व पड़ोसी प्रांत के गन्ने पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय भूूसरेड्डी ने मंडलायुक्त व डीएम को टीम गठित करने के लिए निर्देश दिए थे।
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हरियाणा का गन्ना रोकना किसानों के साथ अन्याय : नरेश टिकैत
भाकियू सुप्रीमो चौधरी नरेश टिकैत मानते हैं कि हरियाणा में ज्यादा गन्ना होने और चीनी मिलों की कम पेराई करने से वेस्ट यूपी व उत्तराखंड की मिलों में आता है। हरियाणा के गन्ने का यूपी व उत्तराखंड में रोकना गलत है। उन्होंने कहा कि यह हरियाणा के गन्ना किसानों के साथ यह अन्याय है।
करनाल जिले का गन्ने का आंकड़ा
1-गन्ने का उत्पादन 10 हजार हेक्टेयर उत्पादन।
2- चीनी मिल की पेराई क्षमता 22.50 क्विंटल प्रतिदिन।
3- पूरे सीजन की पेराई - 3लाख 50 हजार क्विंटल।
गन्ने का भाव
पानीपत जिले के गन्ने का आंकड़ा
गन्ने का क्षेत्रफल --------- 44 लाख क्विंटल
पूरे सीजन की पेराई - 30 लाख क्विंटल
मिल की प्रतिदिन की क्षमता 18 हजार क्विंटल
गन्ने का भाव-----
4- सोनीपत में गन्ने का क्षेत्रफल सात हजार हेक्टेयर।
उत्तराखंड में गन्ने का क्षेत्रफल 90 हजार हेक्टेयर।
हरिद्वार जनपद का क्षेत्रफल 55 हजार हेक्टेयर।
गन्ने का भाव 316- 326 रुपये प्रति क्विंटल।
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