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संतों ने बताया जीवन का मूल्य
Updated Tue, 26 Jun 2018 01:04 AM IST
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थानाभवन।
अखिल भारतीय संत सम्मेलन में आए विभिन्न संतों ने लोगों को जीवन का मूल्य समझाया और बुराई के रास्ते को छोड़कर अध्यात्म के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में गायकों ने एक से बढ़कर एक भजन की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय कर दिया। माढ़ी सेवा समिति की ओर से सोमवार को मेला ग्राउंड स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर चंद्रशेखरानंद गिरी ने कहा कि मनुष्य को अपने स्वरूप को अपने सगे संबंधियों में स्थापित करना चाहिए। तभी हमारी शिक्षा व अच्छे संस्कार भावी पीढ़ी में प्रकट होंगे। इसलिए समय-समय पर हमें अपने स्वरूप का आंकलन करना चाहिए। हरि अनमोलानंद महाराज ने कहा कि हमें धन, वैभव, यश की चिंता नहीं करनी चाहिए। चूंकि ये हमारे सत्कर्मों पर निर्भर है। बताया कि पुरुषार्थ करना ही सत्कर्म है और मृत्यु, उसका समय और स्थान प्रत्येक प्राणी का निश्चित हमें चिंता सिर्फ सत्कर्म करने की होनी चाहिए।
आयोजक स्वामी रामनरेश दास महाराज ने कहा कि यद्यपि पेड़, पौधे को उनकी जड़ में पानी दिया जाता है, लेकिन जब धूल मिट्टी उड़ती है तो वह इन पेड़ पौधों पर जम जाती है। ऐसे में आसमान से बारिश होती है और पेड़-पौधों की धूल मिट्टी को साफ करती है। इसी तरह से भक्ति करने से मनुष्य के पाप भी धुल जाते हैं। मौके पर चंद्रशेखरानंद महाराज, डॉ. शंकरानंद शस्त्री, स्वामी ललितानंद भारद्वाज, रामदेव स्वामी, ब्रह्मकुमारी साध्वी, स्वामी विवेकानंद आदि मौजूद रहे।
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अखिल भारतीय संत सम्मेलन में आए विभिन्न संतों ने लोगों को जीवन का मूल्य समझाया और बुराई के रास्ते को छोड़कर अध्यात्म के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में गायकों ने एक से बढ़कर एक भजन की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय कर दिया। माढ़ी सेवा समिति की ओर से सोमवार को मेला ग्राउंड स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर चंद्रशेखरानंद गिरी ने कहा कि मनुष्य को अपने स्वरूप को अपने सगे संबंधियों में स्थापित करना चाहिए। तभी हमारी शिक्षा व अच्छे संस्कार भावी पीढ़ी में प्रकट होंगे। इसलिए समय-समय पर हमें अपने स्वरूप का आंकलन करना चाहिए। हरि अनमोलानंद महाराज ने कहा कि हमें धन, वैभव, यश की चिंता नहीं करनी चाहिए। चूंकि ये हमारे सत्कर्मों पर निर्भर है। बताया कि पुरुषार्थ करना ही सत्कर्म है और मृत्यु, उसका समय और स्थान प्रत्येक प्राणी का निश्चित हमें चिंता सिर्फ सत्कर्म करने की होनी चाहिए।
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आयोजक स्वामी रामनरेश दास महाराज ने कहा कि यद्यपि पेड़, पौधे को उनकी जड़ में पानी दिया जाता है, लेकिन जब धूल मिट्टी उड़ती है तो वह इन पेड़ पौधों पर जम जाती है। ऐसे में आसमान से बारिश होती है और पेड़-पौधों की धूल मिट्टी को साफ करती है। इसी तरह से भक्ति करने से मनुष्य के पाप भी धुल जाते हैं। मौके पर चंद्रशेखरानंद महाराज, डॉ. शंकरानंद शस्त्री, स्वामी ललितानंद भारद्वाज, रामदेव स्वामी, ब्रह्मकुमारी साध्वी, स्वामी विवेकानंद आदि मौजूद रहे।
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