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बजट आता है हर साल, पर नहीं सुधर रहा हाल

Sun, 02 Sep 2018 12:49 AM IST
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:49 AM IST
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बजट आता है हर साल, पर नहीं सुधर रहा हाल
शामली। गरीब परिवारों की बालिकाओं को मुफ्त शिक्षा और आवास की सुविधा के लिए बनाए गए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय देखरेख के अभाव में बदहाल हो रहे हैं। यह हाल तब है, जबकि प्रति वर्ष शासन से एक विद्यालय के लिए पांच लाख रुपये विभिन्न मदों में भेजा जाता है। बावजूद इसके भवनों की हालत खराब है।
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जनपद में चार स्थानों पर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं। इनमें बनत (शामली), भभीसा (कांधला), पंजीठ (कैराना) और ऊन कस्बे में विद्यालयों का संचालन हो रहा है। तीन विद्यालयों में 100-100 छात्राएं, जबकि कांधला के विद्यालय में 50 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। विद्यालयों में बालिकाओं की देखरेख के लिए वार्डन के अलावा शैक्षिक स्टाफ तथा चपरासी और रसोइया की तैनाती की गई है। विद्यालय के स्टाफ के वेतन से अलग करीब पांच पांच लाख रुपये प्रति वर्ष विद्यालय के भवन की मरम्मत, हेल्थ केयर, स्टेशनरी आदि मदों में विद्यालयों को प्राप्त होता है। यदि वेतन सहित अन्य मदों से प्राप्त धनराशि को जोड़ दें, तो चारों विद्यालयों को प्रतिवर्ष करीब 46 लाख रुपये शासन से प्राप्त होते हैं।
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अब विद्यालयों की हालत पर गौर करें, तो कस्बा बनत स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के भवन की हालत देखते ही बयां हो जाती है। भवन की रंगाई पुताई तक नहीं हो सकी है। इसके अलावा विद्यालय भवन की दीवारों पर पीपल पेड़ तक उग आए हैं। कुछ कमरों की खिड़कियों की जाली भी टूट चुकी है। इसके अलावा पानी की पाइप लाइन भी फटी हुई है। कई स्थानों पर दीवार का प्लास्टर भी टूट गया है। बावजूद इसके मरम्मत की मद में प्राप्त होने वाली धनराशि से इस समस्या को दूर नहीं किया जा रहा है।
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प्राप्त होने वाली धनराशि
प्रत्येक कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय को स्टेशनरी के लिए एक लाख रुपये, विविध व्यय के लिए 75 हजार रुपये, हेल्थकेयर के लिए एक लाख 25 हजार रुपये, भवन मरम्मत के लिए 75 हजार रुपये, पेयजल व्यवस्था के लिए एक लाख, सेल्फ डिफेंस के लिए 20 हजार रुपये, विशिष्ट कौशल के लिए करीब एक लाख रुपये प्राप्त होते हैं।
विद्यालयों में स्टाफ का भी टोटा
कांधला, शामली व ऊन के विद्यालयों में गणित, विज्ञान व अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों के शिक्षकों के पद भी रिक्त चल रहे हैं। ऐसी दशा में बालिकाओं की पढ़ाई किस तरह होगी, यह सवाल है। यही वजह है कि जब भी उच्चाधिकारी इन विद्यालयों का निरीक्षण करते हैं, तो कठिन विषयों में बालिकाओं का शैक्षिक स्तर कमजोर पाया जाता है।
इस बार का बजट नहीं हुआ जारी
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के लिए इस वर्ष का बजट अभी तक शासन से जारी नहीं हुआ है। अप्रैल माह में बजट का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था।
-- वर्जन --
बनत स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डन बबली का कहना है कि मुझे अभी कुछ दिन पूर्व ही कार्यभार मिला है। पूर्व में कितना बजट आया, उससे क्या क्या खर्चा किया गया, उसके बारे में जानकारी नहीं है।

-- वर्जन --
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के लिए कई बार निर्देश दिया गया है। शासन से प्राप्त होने वाले बजट को ठीक ढंग से खर्च कराया जाएगा। पिछले दिनों ही विद्यालयों की व्यवस्था को लेकर समीक्षा की गई। शासन से प्राप्त धनराशि का सही उपयोग कराया जाएगा। यदि कहीं लापरवाही बरती जाती है, तो कार्रवाई कराई जाएगी। - इंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी
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