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चुनाव में हसन परिवार, मुसलिमों का बड़ा नेता बनने की है रार
Updated Wed, 16 May 2018 12:08 AM IST
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चुनावी जंग में हसन परिवार की परीक्षा
शामली। कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव से देश की राजनीति को नया संदेश देने की बातें हो रही हैं। भाजपा नेता कहते हैं कि कैराना का परिणाम साबित करेगा कि जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा कायम है। वहीं, विपक्षी गठबंधन इस बात की दलील देता है कि कैराना का परिणाम देश की राजनीति को गठबंधन की मजबूती का संदेश देगा, लेकिन चुनावी जंग में असली इम्तिहान हसन परिवार का भी है, जिसके दो सदस्य चुनाव मैदान में है। कैराना उपचुनाव में उन्हें साबित करना होगा कि मुसलिम किसे अपना बड़ा नेता मानते हैं। इसी कवायद में दोनों पक्ष खुद को मजबूती प्रदान करने में लगे हुए हैं।
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब हसन परिवार के दो सदस्य चुनाव मैदान में उतरे हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी एक तरफ समाजवादी पार्टी से नाहिद हसन कैराना लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे, तो उनके चाचा कंवर हसन बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे। उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह 5,65,909 वोट लेकर जीतकर संसद पहुंचे थे। बाद में 2017 के विधानसभा चुनाव में नाहिद हसन ने सपा के टिकट पर कैराना सीट से चुनाव लड़ा और वह चुनाव जीत भी गए।
इसके बावजूद अब कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में फिर से हसन परिवार आमने-सामने हैं। एक तरफ विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन गठबंधन से रालोद प्रत्याशी हैं, तो दूसरी तरफ नाहिद हसन के चाचा कंवर हसन लोकदल प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। विधायक नाहिद हसन अपनी मां तबस्सुम हसन को चुनाव जिताने के प्रयास में लगे हुए हैं, तो दूसरी तरफ कंवर हसन को उनके भाई हाजी अनवर हसन का सहयोग भी मिल रहा है। हाजी अनवर हसन कैराना नगर पालिका के मौजूदा चेयरमैन हैं। गौरतलब है कि कैराना लोकसभा क्षेत्र में करीब साढ़े पांच लाख मुसलिम मतदाता बताए जाते हैं, जिनमें शामली जनपद के तीन विधानसभा क्षेत्र और सहारनपुर जनपद के दो विधानसभा क्षेत्र जुड़े हुए हैं।
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शामली। कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव से देश की राजनीति को नया संदेश देने की बातें हो रही हैं। भाजपा नेता कहते हैं कि कैराना का परिणाम साबित करेगा कि जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा कायम है। वहीं, विपक्षी गठबंधन इस बात की दलील देता है कि कैराना का परिणाम देश की राजनीति को गठबंधन की मजबूती का संदेश देगा, लेकिन चुनावी जंग में असली इम्तिहान हसन परिवार का भी है, जिसके दो सदस्य चुनाव मैदान में है। कैराना उपचुनाव में उन्हें साबित करना होगा कि मुसलिम किसे अपना बड़ा नेता मानते हैं। इसी कवायद में दोनों पक्ष खुद को मजबूती प्रदान करने में लगे हुए हैं।
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब हसन परिवार के दो सदस्य चुनाव मैदान में उतरे हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी एक तरफ समाजवादी पार्टी से नाहिद हसन कैराना लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे, तो उनके चाचा कंवर हसन बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे। उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह 5,65,909 वोट लेकर जीतकर संसद पहुंचे थे। बाद में 2017 के विधानसभा चुनाव में नाहिद हसन ने सपा के टिकट पर कैराना सीट से चुनाव लड़ा और वह चुनाव जीत भी गए।
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इसके बावजूद अब कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में फिर से हसन परिवार आमने-सामने हैं। एक तरफ विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन गठबंधन से रालोद प्रत्याशी हैं, तो दूसरी तरफ नाहिद हसन के चाचा कंवर हसन लोकदल प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। विधायक नाहिद हसन अपनी मां तबस्सुम हसन को चुनाव जिताने के प्रयास में लगे हुए हैं, तो दूसरी तरफ कंवर हसन को उनके भाई हाजी अनवर हसन का सहयोग भी मिल रहा है। हाजी अनवर हसन कैराना नगर पालिका के मौजूदा चेयरमैन हैं। गौरतलब है कि कैराना लोकसभा क्षेत्र में करीब साढ़े पांच लाख मुसलिम मतदाता बताए जाते हैं, जिनमें शामली जनपद के तीन विधानसभा क्षेत्र और सहारनपुर जनपद के दो विधानसभा क्षेत्र जुड़े हुए हैं।
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