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स्कूल और आंगनबाड़ी पर बनेंगे बाल मित्र शौचालय
Updated Mon, 04 Dec 2017 11:14 PM IST
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स्कूल और आंगनबाड़ी पर बनेंगे बाल मित्र शौचालय
शामली। संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत अब स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुंदर दिखने वाले शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। इन्हें नाम दिया गया है चाइल्ड फ्रेंडली टॉयलेट (बाल मित्र शौचालय)। इन शौचालयों का डिजाइन सामान्य शौचालयों से कुछ अलग होगा।
दरअसल, सामान्य शौचालयों में शीट का आकार कुछ चौड़ा होता है, जिस कारण बच्चों को उनका उपयोग करने में कठिनाई होती है। इसके अलावा हाथ धोने के लिए बनाई जाने वाली वॉश बेसिन भी ऊंची होती है, जिस कारण बच्चे आसानी से हाथ नहीं धो पाते हैं। इसी वजह से स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बाल मित्र शौचालयों का निर्माण होना है। योजना के तहत जिले में बाल मित्र शौचालयों का निर्माण 230 ग्राम पंचायतों में स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक करीब 400 विद्यालयों के अलावा समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर होगा। उसका डिजाइन शासन से प्राप्त हो गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी नरेश चंद ने बताया कि बाल मित्र शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव की है। ग्राम पंचायत निधि से ही शौचालयों के निर्माण पर धनराशि खर्च की जाएगी। जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस प्रकार के शौचालय बनाने का लक्ष्य 31 दिसंबर तक निर्धारित है। यदि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव इस कार्य में लापरवाही बरतते हैं, तो कार्रवाई की जाएगी।
स्कूलों में शौचालयों का डिजाइन
स्थल का चयन -- शौचालय का निर्माण स्कूल भवन के सामने की ओर होना चाहिए, पीछे नहीं। भूमिगत जल स्त्रोत से 10 मीटर की दूरी होनी चाहिए।
वायु का आवागमन -- स्कूल शौचालय में पर्याप्त मात्रा में प्रकाश रहता हो, व जाली की व्यवस्था हो। शौचालय के अंदर का वातावरण भयरहित हो।
बाल मैत्रिक सीट फिटिंग -- दीवार से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर शीट लगाई जाए। पांवदान शीट के अगले भाग की सीध में होने चाहिए, ताकि बच्चे को बैठते समय कठिनाई न हो।
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वॉश बेसिन -- हाथ धोने के लिए वॉश बेसिन पर तीन प्रकार की ऊंचाई में नलों की फिटिंग होगी। उसमें दो फुट 6 इंच, दो फुट नौ इंच और दो फुट पर नल लगाया जाए। साबुन रखने का स्थान अलग से सुरक्षित हो।
आंगनबाड़ी पर शौचालयों का डिजाइन
दरवाजे पर दोनों ओर से खुलने वाली कुंडी लगाई जाए।
जालीदार दरवाजा बनाया जाए, बाहर और अंदर की दीवार पर चित्रण
कम ऊंचाई की सीढ़ी बनाई जाए, ताकि बच्चों की पहुंच आसान रहे।
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शामली। संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत अब स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुंदर दिखने वाले शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। इन्हें नाम दिया गया है चाइल्ड फ्रेंडली टॉयलेट (बाल मित्र शौचालय)। इन शौचालयों का डिजाइन सामान्य शौचालयों से कुछ अलग होगा।
दरअसल, सामान्य शौचालयों में शीट का आकार कुछ चौड़ा होता है, जिस कारण बच्चों को उनका उपयोग करने में कठिनाई होती है। इसके अलावा हाथ धोने के लिए बनाई जाने वाली वॉश बेसिन भी ऊंची होती है, जिस कारण बच्चे आसानी से हाथ नहीं धो पाते हैं। इसी वजह से स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बाल मित्र शौचालयों का निर्माण होना है। योजना के तहत जिले में बाल मित्र शौचालयों का निर्माण 230 ग्राम पंचायतों में स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक करीब 400 विद्यालयों के अलावा समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर होगा। उसका डिजाइन शासन से प्राप्त हो गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी नरेश चंद ने बताया कि बाल मित्र शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव की है। ग्राम पंचायत निधि से ही शौचालयों के निर्माण पर धनराशि खर्च की जाएगी। जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस प्रकार के शौचालय बनाने का लक्ष्य 31 दिसंबर तक निर्धारित है। यदि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव इस कार्य में लापरवाही बरतते हैं, तो कार्रवाई की जाएगी।
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स्कूलों में शौचालयों का डिजाइन
स्थल का चयन -- शौचालय का निर्माण स्कूल भवन के सामने की ओर होना चाहिए, पीछे नहीं। भूमिगत जल स्त्रोत से 10 मीटर की दूरी होनी चाहिए।
वायु का आवागमन -- स्कूल शौचालय में पर्याप्त मात्रा में प्रकाश रहता हो, व जाली की व्यवस्था हो। शौचालय के अंदर का वातावरण भयरहित हो।
बाल मैत्रिक सीट फिटिंग -- दीवार से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर शीट लगाई जाए। पांवदान शीट के अगले भाग की सीध में होने चाहिए, ताकि बच्चे को बैठते समय कठिनाई न हो।
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वॉश बेसिन -- हाथ धोने के लिए वॉश बेसिन पर तीन प्रकार की ऊंचाई में नलों की फिटिंग होगी। उसमें दो फुट 6 इंच, दो फुट नौ इंच और दो फुट पर नल लगाया जाए। साबुन रखने का स्थान अलग से सुरक्षित हो।
आंगनबाड़ी पर शौचालयों का डिजाइन
दरवाजे पर दोनों ओर से खुलने वाली कुंडी लगाई जाए।
जालीदार दरवाजा बनाया जाए, बाहर और अंदर की दीवार पर चित्रण
कम ऊंचाई की सीढ़ी बनाई जाए, ताकि बच्चों की पहुंच आसान रहे।