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यमुना नदी पर यहां भी हैं बागपत जैसे हालात

Fri, 15 Sep 2017 01:00 AM IST
Updated Fri, 15 Sep 2017 01:00 AM IST
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यमुना नदी पर यहां भी हैं बागपत जैसे हालात
चौसाना/शामली।
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बागपत के काठा में जैसा हादसा हुआ, वैसे ही हालात शामली जिले में भी बने हुए हैं। एक तो खनन माफिया ने यमुना नदी में कुंड बना दिए हैं। वहीं, शामली जनपद के कई गांवों के किसान रोजाना ही यमुना नदी पार कर खेतों पर जाते हैं। नदी पार करने के लिए जिन नाव का प्रयोग किया जा रहा है, वह खस्ताहाल हैं। चौसाना क्षेत्र के गांव भड़ी और साल्हापुर घाट से रोजाना 150 से 200 व्यक्ति यमुना नदी पार आते जाते हैं। इसको लेकर पुलिस प्रशासन अनजान बना हुआ है।
बागपत में यमुना नदी को पार करते समय नाव पलटने पर 19 लोगों की मौत हो गई। वहां भी यमुना नदी में बने कुंड में नाव समा गई थी। बावजूद इसके शामली जनपद में पुलिस प्रशासन इस हादसे को लेकर हरकत में नहीं आया, जबकि शामली जिले में भी ऐसे ही हालात बने हुए हैं।
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यमुना नदी पर चौसाना क्षेत्र में गांव भड़ी और साल्हापुर में दो घाट हैं, जिनसे बिड़ौली यमुना नदी पुल की दूरी करीब आठ किलोमीटर है। भड़ी व साल्हापुर घाट से 150-200 व्यक्ति रोजाना यमुना नदी को पार कर हरियाणा को जाते है। इनमें अधिकतर वह व्यक्ति होते हैं, जो पशु व्यापार करते हैं। या फिर आठ किलोमीटर दूर बिड़ौली पुल पर जाने से बचने वाले इन्हीं घाट से नाव के जरिये नदी पार करते हैं। इतना ही नहीं नाव से मोटर साइकिलों को भी नदी पार कराया जाता है, जिनसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। खास बात यह है कि यमुना नदी के घाटों पर चलने वाली किसी भी नाव के संचालको के पास सरकारी तौर पर लाइसेंस भी नहीं है।
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नावों में सुरक्षा के मापदंडों का ख्याल नहीं
भड़ी और साल्हापुर घाट से खस्ताहाल नावों का संचालन किया जा रहा है। नाव में किसी भी सुरक्षा मापदंडों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। भारतीय शिपिंग अथारिटी के अनुसार हस्तचलित नाव सात मीटर से 18 मीटर या उससे अधिक की होनी चाहिए और उसमें फ्री बोर्ड यानी सवारियों के बैठने के स्थान से अलग स्थान खाली होना चाहिए। इसके अलावा सेफ्टी बेल्ट, लाइफ जैकेट, फस्ट एड और फायर सेफ्टी के उपकरण भी होने जरूरी हैं।
-- तीन दिन पूर्व ही दो युवकों की हुई थी मौत
यमुना नदी को पार करने के साथ ही नहाने वाले भी नदी पर पहुंचते हैं। तीन दिन पूर्व ही चौसाना क्षेत्र के गांव ऊदपुर में तीन युवक नहाते समय नदी में डूब गए थे। एक युवक को ग्रामीणों ने बचा लिया था, लेकिन दो युवकों की मौत हो गई। मृतक युवक अंकित और दीपक चौसाना क्षेत्र के गांव कमालपुर के रहने वाले थे।
इन गांवों के लोग करते हैं नदी पार खेती
कैराना, झिंझाना और चौसाना क्षेत्र के गांव भड़ी, पठेड़, मवी, मामौर, रामड़ा, सहपत, मोहम्मदपुर राई, खुरगान, मंगलौरा, चौतरा, बसेड़ा, कलरी और डूंडूखेड़ा के किसानों के खेत यमुना नदी पार हैं। कुछ किसानों के खेत नदी का फाट बदलने के कारण हरियाणा की सीमा में पहुंच गए, जिस कारण किसानों को नदी पार जाना होता है। नदी पार करने के लिए किसान ट्रैक्टर का भी प्रयोग करते हैं।

खनन माफिया हैं हालात के जिम्मेदार
अवैध रेत खनन के कारण यमुना नदी में जगह जगह गहरे कुंड बन गए हैं। बरसात के सीजन से पूर्व तक यमुना नदी में जेसीबी और पॉकलेन मशीनों से अवैध खनन हो रहा था। पॉकलेन मशीनों से एक ही स्थान से रेत निकाला जाता है, जिस कारण वहां गहरा कुंड बन जाता है।
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