{"_id":"5b8ed17c867a5548423aa1b0","slug":"141536086396-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐसे शिक्षकों पर है सबको नाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऐसे शिक्षकों पर है सबको नाज
Updated Wed, 05 Sep 2018 12:09 AM IST
विज्ञापन
कई शिक्षकों की बदौलत बदल रही सरकारी स्कूलों की सूरत
शामली।
सरकारी स्कूलों के कई शिक्षक बच्चों के भविष्य को तराशने में पूरी तन्मयता के साथ जुटे हुए हैं। कई शिक्षकों की मेहनत के कारण ही जिले में शिक्षा मंदिरों की तस्वीर तेजी के साथ बदल रही है। शिक्षा मंदिर की बगिया में बच्चों का भविष्य संवर रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि इन स्कूलों से निकले बच्चे राष्ट्ीय स्तर पर पहचान बनाने में कामयाब होंगे।
गांव गढ़ी श्याम स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ओमवीर सिंह है। तीन साल पूर्व इस विद्यालय में सिर्फ 25 छात्र पंजीकृत थे, लेकिन ओमवीर सिंह के प्रयास से हुए सुधार के बाद अब विद्यालय में 125 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय को प्राइवेट स्कूल सरीखा बना दिया। विद्यालय में कंप्यूटर लैब, प्रोजेक्टर से पढ़ाई कर स्मार्ट क्लास संचालित की जाती हैं। यह सब हुआ है तीन साल के प्रयास में। वहीं, स्कूल के बच्चे विभिन्न मंडल स्तरीय प्रतियोगिताओं में 24 गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। विद्यालय को स्वच्छता पुरस्कार भी मिल चुका है। इनकी तरह ही गांव लांक स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर एक की प्रधानाध्यापिका सुवासिनी ने विद्यालय के सुधार में शानदार कार्य किया, जिसके चलते वर्ष 2014 में यह विद्यालय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बना। संस्थाओं से संपर्क करके विद्यालय में स्मार्ट क्लास शुरू कराई गई। विद्यालय के सर्वाधिक छात्र नवाचार परीक्षा में चयनित हुए। विद्यालय की अच्छी व्यवस्था के कारण बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जायसवाल भी सम्मानित कर चुकी हैं।
राकेश सैनी को मिल चुका राष्ट्रपति पुरस्कार
कैराना क्षेत्र के गांव बदलूगढ़ स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राकेश सैनी ने भी बच्चों को शिक्षित बनाने के जुनून के साथ कार्य किया। वर्ष 2010 में इस विद्यालय में बच्चों की संख्या सिर्फ 53 थी, जबकि वर्तमान में 155 बच्चे यहां पंजीकृत हैं। वर्ष 2013 में इस विद्यालय को आदर्श अंग्रेजी माध्यम स्कूल बनाया गया। ग्राम प्रधान के सहयोग से विद्यालय को चकाचक कर दिया गया। वहीं, पांच सितंबर 2017 को राकेश सैनी को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया। पुरस्कार के रूप में मिली धनराशि को राकेश सैनी ने विद्यालय में ही खर्च कर दिया। उन्होंने विद्यालय के आसपास के गांवों में लगातार लोगों को जागरूक कर बच्चों का पंजीकरण विद्यालय में बढ़ाया। इनके अलावा गांव हसनपुर लुहारी स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर एक को प्रधानाचार्य लियाकत त्यागी ने चमका दिया। एक साल पूर्व इस विद्यालय की हालत खस्ता थी। यहां बच्चों की संख्या भी 70 से 80 तक थी। अब विद्यालय की चमक देखते ही बनती है। विद्यालय में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा के साथ, वाटर कूलर, आरओ की सुविधा मौजूद है। स्कूल में अब 246 बच्चों का पंजीकरण है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शामली।
सरकारी स्कूलों के कई शिक्षक बच्चों के भविष्य को तराशने में पूरी तन्मयता के साथ जुटे हुए हैं। कई शिक्षकों की मेहनत के कारण ही जिले में शिक्षा मंदिरों की तस्वीर तेजी के साथ बदल रही है। शिक्षा मंदिर की बगिया में बच्चों का भविष्य संवर रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि इन स्कूलों से निकले बच्चे राष्ट्ीय स्तर पर पहचान बनाने में कामयाब होंगे।
गांव गढ़ी श्याम स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ओमवीर सिंह है। तीन साल पूर्व इस विद्यालय में सिर्फ 25 छात्र पंजीकृत थे, लेकिन ओमवीर सिंह के प्रयास से हुए सुधार के बाद अब विद्यालय में 125 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय को प्राइवेट स्कूल सरीखा बना दिया। विद्यालय में कंप्यूटर लैब, प्रोजेक्टर से पढ़ाई कर स्मार्ट क्लास संचालित की जाती हैं। यह सब हुआ है तीन साल के प्रयास में। वहीं, स्कूल के बच्चे विभिन्न मंडल स्तरीय प्रतियोगिताओं में 24 गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। विद्यालय को स्वच्छता पुरस्कार भी मिल चुका है। इनकी तरह ही गांव लांक स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर एक की प्रधानाध्यापिका सुवासिनी ने विद्यालय के सुधार में शानदार कार्य किया, जिसके चलते वर्ष 2014 में यह विद्यालय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बना। संस्थाओं से संपर्क करके विद्यालय में स्मार्ट क्लास शुरू कराई गई। विद्यालय के सर्वाधिक छात्र नवाचार परीक्षा में चयनित हुए। विद्यालय की अच्छी व्यवस्था के कारण बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जायसवाल भी सम्मानित कर चुकी हैं।
विज्ञापन
राकेश सैनी को मिल चुका राष्ट्रपति पुरस्कार
कैराना क्षेत्र के गांव बदलूगढ़ स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राकेश सैनी ने भी बच्चों को शिक्षित बनाने के जुनून के साथ कार्य किया। वर्ष 2010 में इस विद्यालय में बच्चों की संख्या सिर्फ 53 थी, जबकि वर्तमान में 155 बच्चे यहां पंजीकृत हैं। वर्ष 2013 में इस विद्यालय को आदर्श अंग्रेजी माध्यम स्कूल बनाया गया। ग्राम प्रधान के सहयोग से विद्यालय को चकाचक कर दिया गया। वहीं, पांच सितंबर 2017 को राकेश सैनी को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया। पुरस्कार के रूप में मिली धनराशि को राकेश सैनी ने विद्यालय में ही खर्च कर दिया। उन्होंने विद्यालय के आसपास के गांवों में लगातार लोगों को जागरूक कर बच्चों का पंजीकरण विद्यालय में बढ़ाया। इनके अलावा गांव हसनपुर लुहारी स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर एक को प्रधानाचार्य लियाकत त्यागी ने चमका दिया। एक साल पूर्व इस विद्यालय की हालत खस्ता थी। यहां बच्चों की संख्या भी 70 से 80 तक थी। अब विद्यालय की चमक देखते ही बनती है। विद्यालय में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा के साथ, वाटर कूलर, आरओ की सुविधा मौजूद है। स्कूल में अब 246 बच्चों का पंजीकरण है।
विज्ञापन