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नवमी में भगवान की पूजा करने से मिलता है कई गुणा फल
Updated Mon, 30 Oct 2017 12:26 AM IST
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जलालाबाद।
कथा वाचक अवनीश ने कहा कि कार्तिक मास की शुक्ल नवमी तिथि सतयुग की आदि तिथि है। जो भगवान नारायण को प्रिय है। इस दिन भगवान की पूजा करने से असीम फल मिलता है।
जलालाबाद के सनातन सत्संग भवन लुहारी गेट के प्रांगण में हो रही कार्तिक मास महात्म कथा के दौरान भगत अवनीश ने कहा कि कार्तिक नवमी पर भगवान की परिक्रमा का महत्व समझाया कि कार्तिक शुक्ल नवमी सतयुग की आदि तिथि है। इस तिथि को भगवान की पूजा, व्रत, दान, तप तथा यज्ञ करने से कई गुणा फल मिलता है। कार्तिक शुक्ल नवमी को मथुरा आदि तीर्थों पर जाकर भगवान की पूजा, प्रार्थना, परिक्रमा से फल की प्राप्ति होती है। वहीं गौमाता, ब्राह्मण देव, मंदिर, साधु वैरागी आदि की पूजा भी फल देती है। पूरे कार्तिक मास में प्रात: ब्रह्ममुर्हुत में स्नान कर ओम नम: भगवते देवाय: मंत्र का जाप करने से पाप कर्मों का नाश होता है। कार्यक्रम में चरणलाल, बोधराज नारंग, मदनलाल, राजकुमार रुहेला, कोमल, शालिनी, नीलम, योगेश आदि मौजूद रहे।
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कथा वाचक अवनीश ने कहा कि कार्तिक मास की शुक्ल नवमी तिथि सतयुग की आदि तिथि है। जो भगवान नारायण को प्रिय है। इस दिन भगवान की पूजा करने से असीम फल मिलता है।
जलालाबाद के सनातन सत्संग भवन लुहारी गेट के प्रांगण में हो रही कार्तिक मास महात्म कथा के दौरान भगत अवनीश ने कहा कि कार्तिक नवमी पर भगवान की परिक्रमा का महत्व समझाया कि कार्तिक शुक्ल नवमी सतयुग की आदि तिथि है। इस तिथि को भगवान की पूजा, व्रत, दान, तप तथा यज्ञ करने से कई गुणा फल मिलता है। कार्तिक शुक्ल नवमी को मथुरा आदि तीर्थों पर जाकर भगवान की पूजा, प्रार्थना, परिक्रमा से फल की प्राप्ति होती है। वहीं गौमाता, ब्राह्मण देव, मंदिर, साधु वैरागी आदि की पूजा भी फल देती है। पूरे कार्तिक मास में प्रात: ब्रह्ममुर्हुत में स्नान कर ओम नम: भगवते देवाय: मंत्र का जाप करने से पाप कर्मों का नाश होता है। कार्यक्रम में चरणलाल, बोधराज नारंग, मदनलाल, राजकुमार रुहेला, कोमल, शालिनी, नीलम, योगेश आदि मौजूद रहे।
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