{"_id":"5bc787f7bdec22694517ce4b","slug":"131539803127-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंगद का पैर नहीं हिला सका कोई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंगद का पैर नहीं हिला सका कोई
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैराना। कस्बा कैराना स्थित गौशाला भवन में चल रहे रामलीला महोत्सव में 13 वें दिन भगवान राम द्वारा समुद्र पार करने के लिए यज्ञ करना और लंका में अंगद- रावण संवाद की लीला का मंचन किया गया।
मंगलवार रात रामलीला मंचन में दिखाया गया कि लंका के राजा रावण अपनी प्रजा और अपने भाई विभीषण के साथ दरबार में बैठे हैं और दरबारियों तथा सेना से युद्ध की नीति के बारे में चर्चा करते हैं। विभीषण रावण को समझाते हैं कि श्रीराम नारायण के अवतार हैं, उनसे युद्ध करना कदापि उचित नहीं है। रावण क्रोधित हो उठता है और विभीषण को लात मारकर दरबार से निकाल देता है। इस पर विभीषण नतमस्तक होकर रामा दल में पहुंच जाता है। वहीं, समुद्र के किनारे श्रीराम ने रामेश्वरम नामक स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कराई। समुद्र पार करने के पहले यज्ञ की तैयारी हुई। विधिवत पूजन संपन्न कराने के लिए विद्वान ब्राह्मण के तौर पर लंका के राजा रावण को बुलाया जाता है। यज्ञ संपन्न होने के बाद रावण लौट जाता है।
इसके बाद युद्ध प्रारंभ करने से पहले अपने दूत के रूप में अंगद को लंका भेजा जाता है। अंगद रावण को कई बार समझाने का प्रयास करते हैं, परंतु अहंकारी रावण अंगद की बातों को नहीं मानता और युद्ध का एलान कर देता है। अंगद ने रावण के दरबार में अपना पैर जमीन पर जमा दिया और दरबार में मौजूद लोगों को ललकारा कि यदि किसी में साहस है तो उनका पांव जमीन से हिलाकर दिखाए। लेकिन दरबार में रावण का कोई भी महारथी अंगद का पांव नहीं हिला पाता है। इस पर अंगद युद्ध का एलान करते हुए वहां से चले जाते हैं। इसके बाद दोनों ओर युद्ध प्रारंभ करने की तैयारियां शुरू हो जाती है। मंगलवार को रावण का पाठ सराफा व्यापारी रमेश चंद वर्मा ने किया
विज्ञापन
विज्ञापन
मंगलवार रात रामलीला मंचन में दिखाया गया कि लंका के राजा रावण अपनी प्रजा और अपने भाई विभीषण के साथ दरबार में बैठे हैं और दरबारियों तथा सेना से युद्ध की नीति के बारे में चर्चा करते हैं। विभीषण रावण को समझाते हैं कि श्रीराम नारायण के अवतार हैं, उनसे युद्ध करना कदापि उचित नहीं है। रावण क्रोधित हो उठता है और विभीषण को लात मारकर दरबार से निकाल देता है। इस पर विभीषण नतमस्तक होकर रामा दल में पहुंच जाता है। वहीं, समुद्र के किनारे श्रीराम ने रामेश्वरम नामक स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कराई। समुद्र पार करने के पहले यज्ञ की तैयारी हुई। विधिवत पूजन संपन्न कराने के लिए विद्वान ब्राह्मण के तौर पर लंका के राजा रावण को बुलाया जाता है। यज्ञ संपन्न होने के बाद रावण लौट जाता है।
विज्ञापन
इसके बाद युद्ध प्रारंभ करने से पहले अपने दूत के रूप में अंगद को लंका भेजा जाता है। अंगद रावण को कई बार समझाने का प्रयास करते हैं, परंतु अहंकारी रावण अंगद की बातों को नहीं मानता और युद्ध का एलान कर देता है। अंगद ने रावण के दरबार में अपना पैर जमीन पर जमा दिया और दरबार में मौजूद लोगों को ललकारा कि यदि किसी में साहस है तो उनका पांव जमीन से हिलाकर दिखाए। लेकिन दरबार में रावण का कोई भी महारथी अंगद का पांव नहीं हिला पाता है। इस पर अंगद युद्ध का एलान करते हुए वहां से चले जाते हैं। इसके बाद दोनों ओर युद्ध प्रारंभ करने की तैयारियां शुरू हो जाती है। मंगलवार को रावण का पाठ सराफा व्यापारी रमेश चंद वर्मा ने किया
विज्ञापन