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महापुरूष, गुरू अथवा संत की मर्यादा का उल्लंघन विनाशकारी-विजय कौशल

Sat, 29 Sep 2018 12:20 AM IST
Updated Sat, 29 Sep 2018 12:20 AM IST
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महापुरूष, गुरू अथवा संत की मर्यादा का उल्लंघन विनाशकारी-विजय कौशल
संत की मर्यादा का उल्लंघन विनाशकारी-विजय कौशल
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अमर उजाला ब्यूरो
शामली। संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने अमृत वर्षा करते हुए कहा कि गुरु अथवा संत की मर्यादा का उल्लंघन करेंगे तो हमें भगवान भी नहीं बचा पाएगा। हनुमान संत के प्रतीक हैं। भगवान से मिलाने के लिए किसी संत या गुरु की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन हुए हनुमान की कृपा से हुए। चाहे वानर हो, सुग्रीव हो, विभीषण हो अथवा जानकी। यदि हनुमान से हमारा संबंध स्थापित हो गया, तो किसी अन्य देव की जरूरत ही नहीं। ज्योतिष के अनुसार मनुष्य के नौ के नौ ग्रह भी उल्टे हो जाए तो भी हनुमान की उपासना से उसका कोई अनिष्ट नहीं होता है।

शुक्रवार को कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने सीता हरण, जटायु को सद्गति, किष्किन्धा कांड तथा सुंदर कांड की कथा के दौरान लंका दहन तथा हनुमान के पराक्रम व भक्ति का सुंदर वर्णन किया। विजय कौशल महाराज ने कहा कि यदि हनुमान न होते तो जगत में रामकथा भी न होती. जिन्हें भी भगवान के दर्शन हुए हनुमान की कृपा से हुए। चाहे वानर हो, सुग्रीव हो, विभीषण हो अथवा जानकी। हनुमान को पाने का एक ही मंत्र है हनुमान चालीसा। यह मंत्र भी है ग्रंथ भी है और पंथ भी है। सुग्रीव से मित्रता कर राम ने बाली का वध किया। हालांकि सुग्रीव राजपाठ और भोग विलास में राम के कार्य को भूल गया। हनुमान सुग्रीव को पकड़कर राम के सम्मुख लाते हैं, जो जीव भगवान से विमुख हो जाता है उसको भी हनुमान भगवान के सम्मुख ला सकता है। सुग्रीव के निर्देश पर समस्त वानर सीता जी भक्ति की खोज में निकल पड़ते हैं। सुंदर कांड मानस का बहुत ही सुंदर कांड है, जो कि सभी मनोकामना पूर्ण करता है। क्योंकि इस कांड के मध्य में जानकी है और इसके रक्षक हनुमान हैं। हनुमान जामवंत के प्रेरित करने पर समुद्र को पार करने के लिए छलांग लगाते हैं। रास्ते में समुद्र में छिपा हुआ मैनाक पर्वत उन्हें विश्राम देने के लिए बाहर निकलता है लेकिन हनुमान उसके आकर्षण में नहीं फंसते। और कहते है कि ‘राम काज कीन्हे बिना मोहि कहां विश्राम’। रावण की सेविका सुरसा उनके मार्ग में बाधा बनती है। हनुमान उस परीक्षा में भी उत्तीर्ण होते हैं। जैसे ही सुरसा ने सौ योजन का मुंह फैलाया हनुमान सूक्ष्म रूप धारण कर उसके मुख से होकर बाहर निकले। हनुमान ने लंका ने प्रवेश किया। हनुमान लंका में प्रवेश कर रावण की माया को देखते हैं। दिन के उजाले में रावण के भवन मंदिर जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन असलियत जानने के लिए वे रात्रि में ही लंका का निरीक्षण करते हैं। जिसे देखकर एक बारगी हनुमान भी भ्रमित हो गए। इसी समय उनकी दृष्टि राम नाम अंकित भवन पर पड़ती है जो विभीषण का भवन था। जैसे ही दरवाजे पर हनुमान पहुंचते है तो विभीषण जाग जाता है। जब तक जीव के द्वार पर संत नहीं आते तब तक वह सोया रहता है। संत जीवन की दृष्टि बदल देते हैं। इस अवसर पर राजेश्वर बंसल, पूर्व आईजी विजय गर्ग, एसपी शामली दिनेश कुमार, राजीव मलिक, अखिल बंसल, सारिका बंसल, शिप्रा बंसल, अंजना बंसल, डा0 प्रियम्वदा तोमर, विनीत संगल, अशोक बंसल आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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