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गांवों में बिकती है मौत, व्यवस्था रहती है मौन
Updated Thu, 23 Aug 2018 12:14 AM IST
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तस्करी की शराब और अवैध रूप से बनाई गई शराब की होती है सप्लाई
शामली।
यमुना खादर के गांवों में अवैध रूप से बनने वाली शराब के रूप में मौत बेची जाती है। जंगल के साथ ही घरों तक में अवैध रूप से शराब बनाने के मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं। कमालपुर गांव की घटना के बाद फिर सवाल उठा है कि शराब माफिया के नेटवर्क को पुलिस और आबकारी तोड़ क्यों नहीं पा रही है।
खासकर झिंझाना क्षेत्र के गांवों में अवैध रूप से शराब बनाने और बेचने का धंधा चलता रहा है, जिस कारण इस धंधे के लिए यह क्षेत्र बदनाम भी रहा है। जंगल के साथ ही घरों में भी अवैध रूप से शराब बनाकर बेची जाती है। यह अवैध धंधा एकाध गांव में नहीं, बल्कि कई गांवों में चलता है। इसके अलावा हरियाणा और अन्य प्रदेशों से तस्करी करके लाई गई शराब की सप्लाई भी खूब होती है। गौरतलब है कि आठ महीना पूर्व पुलिस ने शराब बनाने वालों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था, तो खानपुर, केरटू सहित कई गांवों से बड़ी मात्रा में कच्ची शराब, लेहन और शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाले उपकरण बरामद हुए थे। शराब के अवैध धंधे में पुरुषों के साथ ही महिलाओं की संलिप्तता भी सामने आ चुकी है। यही नहीं शराब पीने के आदी इन घरों में पहुंचते हैं और 10 से 15 रुपये प्रति गिलास के हिसाब से कच्ची शराब खरीदकर पीते हैं।
नशीले पदार्थों की बिक्री भी खूब
कच्ची और अवैध रूप से बनाई गई शराब के अलावा झिंझाना और कैराना क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बिक्री भी खूब होती है। समय समय पर पुलिस ऐसे मामले पकड़ भी चुकी है, लेकिन नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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शामली।
यमुना खादर के गांवों में अवैध रूप से बनने वाली शराब के रूप में मौत बेची जाती है। जंगल के साथ ही घरों तक में अवैध रूप से शराब बनाने के मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं। कमालपुर गांव की घटना के बाद फिर सवाल उठा है कि शराब माफिया के नेटवर्क को पुलिस और आबकारी तोड़ क्यों नहीं पा रही है।
खासकर झिंझाना क्षेत्र के गांवों में अवैध रूप से शराब बनाने और बेचने का धंधा चलता रहा है, जिस कारण इस धंधे के लिए यह क्षेत्र बदनाम भी रहा है। जंगल के साथ ही घरों में भी अवैध रूप से शराब बनाकर बेची जाती है। यह अवैध धंधा एकाध गांव में नहीं, बल्कि कई गांवों में चलता है। इसके अलावा हरियाणा और अन्य प्रदेशों से तस्करी करके लाई गई शराब की सप्लाई भी खूब होती है। गौरतलब है कि आठ महीना पूर्व पुलिस ने शराब बनाने वालों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था, तो खानपुर, केरटू सहित कई गांवों से बड़ी मात्रा में कच्ची शराब, लेहन और शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाले उपकरण बरामद हुए थे। शराब के अवैध धंधे में पुरुषों के साथ ही महिलाओं की संलिप्तता भी सामने आ चुकी है। यही नहीं शराब पीने के आदी इन घरों में पहुंचते हैं और 10 से 15 रुपये प्रति गिलास के हिसाब से कच्ची शराब खरीदकर पीते हैं।
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नशीले पदार्थों की बिक्री भी खूब
कच्ची और अवैध रूप से बनाई गई शराब के अलावा झिंझाना और कैराना क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बिक्री भी खूब होती है। समय समय पर पुलिस ऐसे मामले पकड़ भी चुकी है, लेकिन नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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