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दो साल बाद परिवार से मिले घनश्याम, छलक पड़े आंसू
Updated Thu, 08 Mar 2018 11:37 PM IST
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दो साल बाद परिवार से मिले घनश्याम, छलक पड़े आंसू
शामली। दो साल पूर्व अपने परिवार से बिछुड़े घनश्याम को अपनाघर आश्रम ने उसके परिवार से मिला दिया। परिवार के लोग अपनाघर आश्रम पहुंचे और घनश्याम को अपने साथ घर ले गए। इस दौरान घनश्याम के आंसू भी छलक आए।
दो अगस्त 2016 को शामली में वीवी इंटर कॉलेज रोड पर एक व्यक्ति असहाय मिला था। उसको करनाल रोड स्थित अपनाघर आश्रम ले जाकर आश्रय दिया गया। उस समय वह कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं थे। सिर्फ अपने हाथ की ओर इशारा करते थे। इस पर घनश्याम गांव-हरीनपुर डाकखाना-मुरादनगर लिखा हुआ था। आश्रम में डाक्टर अरुण राय की देखरेख में उनका उपचार हुआ। धीरे धीरे वह ठीक होने लगे और अपने मन से आश्रम में कार्य करने लगे। एक दिन ऐसे ही वह अपना हाथ दिखाने लगे, जिससे आश्रम पदाधिकारी ने एक बार फिर उनके घर की खोज प्रारंभ की। इसी दौरान परमेश तायल की ओर से अपनाघर आश्रम में भोज व्यवस्था के दौरान घनश्याम ने फिर से अपने घर का वही पता बताया, जिसके बाद परमेश तायल ने अपने परि चित नरेंद्र कुमार मित्तल को मुरादनगर भेजा, तब पता चला कि घनश्याम का गांव हुसैनपुर (गाजियाबाद) है। घर पर पहुंचने के बाद घनश्याम के भाई विकास से वार्ता हुई। घनश्याम के बारे में उन्हें जानकारी दी। इसके बाद बृहस्पतिवार को भाई विकास शामली में अपनाघर आश्रम पहुंचे। उन्होंने बताया कि घनश्याम बगैर कुछ बताए घर से निकल गए थे। काफी तलाशने पर भी उनका पता नहीं चल रहा था, जिस कारण पूरा परिवार परेशान था। बृहस्पतिवार को भाई विकास अपनाघर आश्रम कार्यालय की कार्रवाई पूरी कराने के बाद घनश्याम को अपने साथ घर ले गए।
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शामली। दो साल पूर्व अपने परिवार से बिछुड़े घनश्याम को अपनाघर आश्रम ने उसके परिवार से मिला दिया। परिवार के लोग अपनाघर आश्रम पहुंचे और घनश्याम को अपने साथ घर ले गए। इस दौरान घनश्याम के आंसू भी छलक आए।
दो अगस्त 2016 को शामली में वीवी इंटर कॉलेज रोड पर एक व्यक्ति असहाय मिला था। उसको करनाल रोड स्थित अपनाघर आश्रम ले जाकर आश्रय दिया गया। उस समय वह कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं थे। सिर्फ अपने हाथ की ओर इशारा करते थे। इस पर घनश्याम गांव-हरीनपुर डाकखाना-मुरादनगर लिखा हुआ था। आश्रम में डाक्टर अरुण राय की देखरेख में उनका उपचार हुआ। धीरे धीरे वह ठीक होने लगे और अपने मन से आश्रम में कार्य करने लगे। एक दिन ऐसे ही वह अपना हाथ दिखाने लगे, जिससे आश्रम पदाधिकारी ने एक बार फिर उनके घर की खोज प्रारंभ की। इसी दौरान परमेश तायल की ओर से अपनाघर आश्रम में भोज व्यवस्था के दौरान घनश्याम ने फिर से अपने घर का वही पता बताया, जिसके बाद परमेश तायल ने अपने परि चित नरेंद्र कुमार मित्तल को मुरादनगर भेजा, तब पता चला कि घनश्याम का गांव हुसैनपुर (गाजियाबाद) है। घर पर पहुंचने के बाद घनश्याम के भाई विकास से वार्ता हुई। घनश्याम के बारे में उन्हें जानकारी दी। इसके बाद बृहस्पतिवार को भाई विकास शामली में अपनाघर आश्रम पहुंचे। उन्होंने बताया कि घनश्याम बगैर कुछ बताए घर से निकल गए थे। काफी तलाशने पर भी उनका पता नहीं चल रहा था, जिस कारण पूरा परिवार परेशान था। बृहस्पतिवार को भाई विकास अपनाघर आश्रम कार्यालय की कार्रवाई पूरी कराने के बाद घनश्याम को अपने साथ घर ले गए।
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