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मंहगाई को ध्यान में नही रखकर बनाया आम बजट
Updated Fri, 02 Feb 2018 01:33 AM IST
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महंगाई को ध्यान में रखकर नहीं बना बजट
शामली। आयकर-व्यापार कर के अधिवक्ता जेके जैन का कहना है कि आम बजट में आम आदमी की सुविधा को ध्यान में नहीं रखा गया है। रोजमर्रा की जरूरत वाले उत्पादों पर टैक्स कम करना चाहिए था। उद्यमियों- व्यापारियों के हितो का ध्यान नहीं रखा गया। हेल्थ स्कीम को 25 हजार से 50 हजार करके लाभ दिया गया है। नौकरीपेशा को स्टैंडर्ड डिडेक्शन में डेढ़ से बढ़ाकर 1.90 लाख करना अच्छा कदम है।
महंगाई को ध्यान में रखकर बजट बनाना चाहिए था
शामली। आम बजट पर चार्टर्ड अकाउंटेंट भी अलग राय रखते हैं। उनका मानना है कि आम बजट महंगाई को ध्यान में रखते हुए बनाना चाहिए था, जिसमें व्यापारी वर्ग के हित में इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़नी चाहिए थी। चार्टर्ड अकाउंटेंट सुधीर कुमार जैन का मानना है कि बजट महंगाई को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया। इनकम टैक्स की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर साढ़े तीन लाख होनी चाहिए थी। गरीबों के लिए घर, पांच लाख रुपये बीमार होने पर अस्पताल खर्च की व्यवस्था से गरीब के लिए फायदे का बजट रहा है। युवाओं के लिए ऋण दिए जाने की सुविधा जरूर दी हैं।
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शामली। आयकर-व्यापार कर के अधिवक्ता जेके जैन का कहना है कि आम बजट में आम आदमी की सुविधा को ध्यान में नहीं रखा गया है। रोजमर्रा की जरूरत वाले उत्पादों पर टैक्स कम करना चाहिए था। उद्यमियों- व्यापारियों के हितो का ध्यान नहीं रखा गया। हेल्थ स्कीम को 25 हजार से 50 हजार करके लाभ दिया गया है। नौकरीपेशा को स्टैंडर्ड डिडेक्शन में डेढ़ से बढ़ाकर 1.90 लाख करना अच्छा कदम है।
महंगाई को ध्यान में रखकर बजट बनाना चाहिए था
शामली। आम बजट पर चार्टर्ड अकाउंटेंट भी अलग राय रखते हैं। उनका मानना है कि आम बजट महंगाई को ध्यान में रखते हुए बनाना चाहिए था, जिसमें व्यापारी वर्ग के हित में इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़नी चाहिए थी। चार्टर्ड अकाउंटेंट सुधीर कुमार जैन का मानना है कि बजट महंगाई को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया। इनकम टैक्स की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर साढ़े तीन लाख होनी चाहिए थी। गरीबों के लिए घर, पांच लाख रुपये बीमार होने पर अस्पताल खर्च की व्यवस्था से गरीब के लिए फायदे का बजट रहा है। युवाओं के लिए ऋण दिए जाने की सुविधा जरूर दी हैं।
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