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जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब प्रकट होते है भगवान
Updated Thu, 17 Aug 2017 12:48 AM IST
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कस्बे की तीतरो वाली धर्मशाला में चल रहे भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य पंडित संपति प्रसाद ने श्रीकृष्ण के जन्म का वृतांत सुनाया।
बताया कि भगवान जन्म नहीं लेते हैं, वरण प्रकट होते हैं। जब-जब धर्म की हानि होती है। वेद ब्राह्मण, गौमाता, धर्म शास्त्रों का ह्रास होता है। तब भगवान स्वयं प्रकट होकर धर्म की स्थापना करते है। भक्तों पर कृपा करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी देवी देवकी के समक्ष बाल रूप में प्रकट होकर उन्हे अपने जन्म देने का अहसास कराया था तथा वासुदेव के द्वारा नंद बाबा के घर पहुंचकर योग माया को अपने स्थान पर पहुंचाकर दुष्ट मामा कंस के हाथों में पहुंचाकर उसको अहसास कराया कि उसे मारने वाला इस संसार में आ चुका है। इसके अलावा मां यशोदा को अपनी बाल लीलाओं से परेशान कर मां के महत्व को जनमानस को समझाया। यजमान शैलेंद्र मित्तल, विनोद संगल रहे है। मंदिर के आचार्य पंडित वासमदेव शर्मा व समिति कार्यकर्ता सहयोगी रहे है।
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कस्बे की तीतरो वाली धर्मशाला में चल रहे भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य पंडित संपति प्रसाद ने श्रीकृष्ण के जन्म का वृतांत सुनाया।
बताया कि भगवान जन्म नहीं लेते हैं, वरण प्रकट होते हैं। जब-जब धर्म की हानि होती है। वेद ब्राह्मण, गौमाता, धर्म शास्त्रों का ह्रास होता है। तब भगवान स्वयं प्रकट होकर धर्म की स्थापना करते है। भक्तों पर कृपा करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी देवी देवकी के समक्ष बाल रूप में प्रकट होकर उन्हे अपने जन्म देने का अहसास कराया था तथा वासुदेव के द्वारा नंद बाबा के घर पहुंचकर योग माया को अपने स्थान पर पहुंचाकर दुष्ट मामा कंस के हाथों में पहुंचाकर उसको अहसास कराया कि उसे मारने वाला इस संसार में आ चुका है। इसके अलावा मां यशोदा को अपनी बाल लीलाओं से परेशान कर मां के महत्व को जनमानस को समझाया। यजमान शैलेंद्र मित्तल, विनोद संगल रहे है। मंदिर के आचार्य पंडित वासमदेव शर्मा व समिति कार्यकर्ता सहयोगी रहे है।
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