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राज और हुकुम का महाविद्यालय के कुल गीत में गुणगान
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:21 AM IST
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शामली।
भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कैराना क्षेत्र के शिक्षा और विकास की दिशा में अनेक कार्य किए, जिनमें से एक है कैराना का विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय। महाविद्यालय की स्थापना हुकुम सिंह ने कराई और आधारशिला राजनाथ सिंह ने रखी थी। वर्ष 2009 में महाविद्यालय का कुल गीत लिखा गया था, जिसकी रचना महाविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रवक्ता डॉक्टर जगदीश शरण ने की थी। यह कुल गीत महाविद्यालय की विवरण पुस्तिका के साथ ही महाविद्यालय परिसर में भी लिखा हुआ है।
अब प्रोफेसर डॉक्टर जगदीश शरण मुरादाबाद के भोजपुर स्थित राजकीय महाविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष हैं। अमर उजाला से फोन पर बातचीत में डॉक्टर जगदीश शरण ने बताया कि विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय में 2006 से 2016 तक नियुक्त रहे। 2009 में उन्हें महाविद्यालय का कुल गीत लिखने का मौका मिला। लोक गीत कुल 20 पंक्तियों का है, जो अनंत चतुर्दशी के दिन बृहस्पतिवार को तीन सितंबर 2009 को लिखा गया था। उसमें महाविद्यालय की स्तुति के साथ अध्ययनरत विद्यार्थियों के सुखद भविष्य की मंगल कामना की गई। कुल गीत दोहा एवं गीतिका छंद में रचित है। कुलगीत के तीसरे दोहे में राजनाथ सिंह और हुकुम सिंह का जिक्र आया, जो लोक गीत की रचना करते समय इन दोनों नेताओं के सराहनीय प्रयासों की बदौलत इसमें शामिल हुआ था। क्योंकि हुकुम सिंह ने कैराना क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हमेशा कार्य किया। इसके अलावा भी कई विद्यालयों की स्थापना कराई।
-------- महाविद्यालय का कुल गीत
हे ज्ञान के चिर आकार, विद्या निकेत महान ।
विजय पथ के सिंह पथिक, तुझे कोटि प्रणाम ।।
तू अक्षर अनन्य अर्द्धकोश, निजंक बहुभाव भरे ।
अन्वेषक सत्य परितोष, उर विशद सद्भाव धरे ।।
तब सित आष ज्ञान गुण से, लुंठित मानव भव भरे ।
सर्व विकार विषय वासना, वर्ण भेदभाव भरे ।।
शांत कांत प्रशांत सुखद, प्रबुद्ध शुद्ध विहान ।
विजय पथ के सिंह पथिक, तुझे कोटि प्रणाम ।।
हैं सबके पथ अलग किंतु, ज्ञान तुझमें खोजते ।
नि:सृत मुख से मधुर वचन, सब धर्मों को रोचते ।।
सत्यम शिवम सुंदरम का, अभिसार तुझमें सोचते ।
सकल सुख का ही संसार, तब निकट अवलोकते ।।
कुशल राज के हुक्म से, हुआ तेरा निर्माण ।
विजय पथ के सिंह पथिक, तुझे कोटि प्रणाम।।
------ छंद और दोहा की टिप्पणी
तीसरे दोहे के अंतिम छंद में लिखा गया कुशल राज के हुक्म से हुआ तेरा निर्माण। इसकी टिप्पणी में लिखा गया कुल गीत कार ने यहां अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया है। क्योंकि विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय की आधार शिला राजनाथ सिंह ने रखी थी, उस समय हुकुम सिंह प्रदेश सरकार में मंत्री थे। महाविद्यालय की स्थापना में इनका विशेष योगदान रहा। पंक्ति में राज का अर्थ राजनाथ सिंह और हुकम का अर्थ हुकुम सिंह ध्वनिमत होता है।
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भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कैराना क्षेत्र के शिक्षा और विकास की दिशा में अनेक कार्य किए, जिनमें से एक है कैराना का विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय। महाविद्यालय की स्थापना हुकुम सिंह ने कराई और आधारशिला राजनाथ सिंह ने रखी थी। वर्ष 2009 में महाविद्यालय का कुल गीत लिखा गया था, जिसकी रचना महाविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रवक्ता डॉक्टर जगदीश शरण ने की थी। यह कुल गीत महाविद्यालय की विवरण पुस्तिका के साथ ही महाविद्यालय परिसर में भी लिखा हुआ है।
अब प्रोफेसर डॉक्टर जगदीश शरण मुरादाबाद के भोजपुर स्थित राजकीय महाविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष हैं। अमर उजाला से फोन पर बातचीत में डॉक्टर जगदीश शरण ने बताया कि विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय में 2006 से 2016 तक नियुक्त रहे। 2009 में उन्हें महाविद्यालय का कुल गीत लिखने का मौका मिला। लोक गीत कुल 20 पंक्तियों का है, जो अनंत चतुर्दशी के दिन बृहस्पतिवार को तीन सितंबर 2009 को लिखा गया था। उसमें महाविद्यालय की स्तुति के साथ अध्ययनरत विद्यार्थियों के सुखद भविष्य की मंगल कामना की गई। कुल गीत दोहा एवं गीतिका छंद में रचित है। कुलगीत के तीसरे दोहे में राजनाथ सिंह और हुकुम सिंह का जिक्र आया, जो लोक गीत की रचना करते समय इन दोनों नेताओं के सराहनीय प्रयासों की बदौलत इसमें शामिल हुआ था। क्योंकि हुकुम सिंह ने कैराना क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हमेशा कार्य किया। इसके अलावा भी कई विद्यालयों की स्थापना कराई।
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-------- महाविद्यालय का कुल गीत
हे ज्ञान के चिर आकार, विद्या निकेत महान ।
विजय पथ के सिंह पथिक, तुझे कोटि प्रणाम ।।
तू अक्षर अनन्य अर्द्धकोश, निजंक बहुभाव भरे ।
अन्वेषक सत्य परितोष, उर विशद सद्भाव धरे ।।
तब सित आष ज्ञान गुण से, लुंठित मानव भव भरे ।
सर्व विकार विषय वासना, वर्ण भेदभाव भरे ।।
शांत कांत प्रशांत सुखद, प्रबुद्ध शुद्ध विहान ।
विजय पथ के सिंह पथिक, तुझे कोटि प्रणाम ।।
हैं सबके पथ अलग किंतु, ज्ञान तुझमें खोजते ।
नि:सृत मुख से मधुर वचन, सब धर्मों को रोचते ।।
सत्यम शिवम सुंदरम का, अभिसार तुझमें सोचते ।
सकल सुख का ही संसार, तब निकट अवलोकते ।।
कुशल राज के हुक्म से, हुआ तेरा निर्माण ।
विजय पथ के सिंह पथिक, तुझे कोटि प्रणाम।।
------ छंद और दोहा की टिप्पणी
तीसरे दोहे के अंतिम छंद में लिखा गया कुशल राज के हुक्म से हुआ तेरा निर्माण। इसकी टिप्पणी में लिखा गया कुल गीत कार ने यहां अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया है। क्योंकि विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय की आधार शिला राजनाथ सिंह ने रखी थी, उस समय हुकुम सिंह प्रदेश सरकार में मंत्री थे। महाविद्यालय की स्थापना में इनका विशेष योगदान रहा। पंक्ति में राज का अर्थ राजनाथ सिंह और हुकम का अर्थ हुकुम सिंह ध्वनिमत होता है।
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