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पावन अधरो को छू- छू कर,सांसे चंदन बनजाती हैं--------------
Updated Thu, 17 Aug 2017 12:36 AM IST
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शामली। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कवि सम्मेलन में कवि राजेंद्र राजन ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं का दिल जीत लिया।
सोमवार देर रात शहर के वीवी इंटर कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या में सामाजिक संस्था प्रयास एक आस की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। रॉकगोल्ड एकेडमी के छात्र-छात्राओं ने अतिथि गीत प्रस्तुत किया। सहारनपुर से आए प्रसिद्ध राजेंद्र राजन ने अपनी कविता यूं पढ़ी पावन अधरो को छू- छू कर, सांसें चंदन बन जाती हैं। आंखें झुककर गुमसुम- गुमसुम, जाने क्या क्या जाती हैं। दिल्ली से आए कवि योगेंद्र सुंदरियाल ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा- मैं रहू, ना रहू लेकिन- ये प्यारा हिंदुस्तान रहे। अंसार सिद्दीकी कैराना ने शायर पढ़ते हुए कहा कि उठो जिंदगी में शाहकार कर दो, हर इंसा को इंसा का गम रवार कर दो। सुनाकर यह 15 अगस्त की कहानी जो गाफिल है, उसको शर्मसार कर दो। मेरठ के अजहर इकबाल ने कहा कि गाली को प्रणाम समझना पड़ता है, मधुशाला को धाम समझना पड़ता है, आधुनिक कहलाने की अंधी जिद में रावण को भी राम समझना पड़ता है। सुनील अरोरा टम्मी ने जीएसटी लागा रे- हाय लागा रे- गीत प्रस्तुत किया। अनुराग शर्मा ने अपनी कविता पाठ में यू कहा-- नमन इस देश की माटी को बार बार करता हूं, बहुत है कर्ज मां तेरा, ये जीवन वार करता हूं। प्रदीप मायूस, मुकेश दर्पण ने भी काव्य पाठ किया। संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर अनुराग शर्मा, सचिव प्रतीक गर्ग, हिमानी गौतम ने अतिथियों और सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान किए। जय प्रकाश संगल की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन में विद्यालय के प्रबंधक संजय संगल, सिल्वर बेल्स स्कूल के चेयरमैन अजय संगल, रॉक गोल्ड के चेयरमैन सुनील गोयल, सेंटआरसी स्कूल के प्रबंधक यशपाल पंवार, पुनीत द्विवेदी, विजय कौशिक, अमित गोयल, प्रधानाचार्य एसके आर्य आदि लोग मौजूद रहे। संचालन अनुराग शर्मा, डाक्टर विपिन कौशिक ने किया।
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सोमवार देर रात शहर के वीवी इंटर कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या में सामाजिक संस्था प्रयास एक आस की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। रॉकगोल्ड एकेडमी के छात्र-छात्राओं ने अतिथि गीत प्रस्तुत किया। सहारनपुर से आए प्रसिद्ध राजेंद्र राजन ने अपनी कविता यूं पढ़ी पावन अधरो को छू- छू कर, सांसें चंदन बन जाती हैं। आंखें झुककर गुमसुम- गुमसुम, जाने क्या क्या जाती हैं। दिल्ली से आए कवि योगेंद्र सुंदरियाल ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा- मैं रहू, ना रहू लेकिन- ये प्यारा हिंदुस्तान रहे। अंसार सिद्दीकी कैराना ने शायर पढ़ते हुए कहा कि उठो जिंदगी में शाहकार कर दो, हर इंसा को इंसा का गम रवार कर दो। सुनाकर यह 15 अगस्त की कहानी जो गाफिल है, उसको शर्मसार कर दो। मेरठ के अजहर इकबाल ने कहा कि गाली को प्रणाम समझना पड़ता है, मधुशाला को धाम समझना पड़ता है, आधुनिक कहलाने की अंधी जिद में रावण को भी राम समझना पड़ता है। सुनील अरोरा टम्मी ने जीएसटी लागा रे- हाय लागा रे- गीत प्रस्तुत किया। अनुराग शर्मा ने अपनी कविता पाठ में यू कहा-- नमन इस देश की माटी को बार बार करता हूं, बहुत है कर्ज मां तेरा, ये जीवन वार करता हूं। प्रदीप मायूस, मुकेश दर्पण ने भी काव्य पाठ किया। संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर अनुराग शर्मा, सचिव प्रतीक गर्ग, हिमानी गौतम ने अतिथियों और सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान किए। जय प्रकाश संगल की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन में विद्यालय के प्रबंधक संजय संगल, सिल्वर बेल्स स्कूल के चेयरमैन अजय संगल, रॉक गोल्ड के चेयरमैन सुनील गोयल, सेंटआरसी स्कूल के प्रबंधक यशपाल पंवार, पुनीत द्विवेदी, विजय कौशिक, अमित गोयल, प्रधानाचार्य एसके आर्य आदि लोग मौजूद रहे। संचालन अनुराग शर्मा, डाक्टर विपिन कौशिक ने किया।