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विश्व पर्यावरण दिवस: साहित्यकार ने घर में सजाई खूबसूरत बगिया, रंग-बिरंगे फूलों से महकता है आंगन

Thu, 05 Jun 2025 09:32 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 05 Jun 2025 09:32 AM IST
सार

जीएफ कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ.साजिद खान बाल साहित्यकार होने के साथ ही पर्यावरण प्रेमी भी हैं। उन्होंने अपने घर को विभिन्न प्रजातियों के पौधों से सजा रखा है। 

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World Environment Day Professor decorated a beautiful garden in his house
प्रोफेसर डॉ.साजिद खान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शाहजहांपुर के पर्यावरण प्रेमी डॉ.साजिद खान भागदौड़ भरी जिंदगी में साहित्य अध्ययन के साथ ही पौधों को संरक्षित करने में जुटे हैं। सफेद पत्थर के मकान के आंगन में देसी के साथ विदेशी पौधे खूबसूरती को बढ़ा रहे हैं। पौधों को लेकर मकान का डिजाइन ही बदल दिया है।

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जीएफ कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ.साजिद खान बाल साहित्यकार होने के चलते अक्सर भ्रमण पर रहते हैं। वह जिस क्षेत्र में जाते हैं, वहां का मशहूर पौधा अवश्य लेकर आते हैं। पेड़-पौधों के प्रति प्रेम के मद्देनजर निगोही रोड पर साहित्यपुरम कॉलोनी में मकान खरीदा तो पौधों को लेकर अलग से जगह छोड़ी। पौधों के लिए उन्होंने मकान का नक्शा ही बदल दिया। बागवानी वाली जगह में सफेद पत्थर लगाया, लेकिन पौधे लगाने के लिए विशेष इंतजाम किया। 
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उनके छोटे से बगीचे में नेपाल के पौधे सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। विभिन्न रंगों के फूल देने वाले पौधों से अलग ही छटा बिखरती है। उनके बगीचे में गोल्डन यूनीप्रास, देसी मधुकामनी, पाकड़, बरगद, पीपल के बोनसाई, एडेनियम, विभिन्न रंगों के विदेशी गुलाब आदि लगा रखे हैं। कॉलेज के समय के बाद इनकी बागवानी भी खुद ही करते हैं।

फलों-सब्जी को उगाने के लिए अलग इंतजाम
डॉ.साजिद के बगीचे के अलावा मकान के सामने एक प्लॉट पड़ा है। यहां पर फलों व सब्जी को उगाने का इंतजाम है। संतरा, नीबू, अमरूद, लीची, चेरी, आम, शरीफा, जामुन के अलावा लौकी, तुरई समेत कई तरह की सब्जी भी उगाते हैं। डॉ.साजिद बताते हैं कि किसी भी पौधे को लगाने के बाद मोबाइल एप पर अध्ययन करते हैं। उसकी जानकारी के बाद ही निराई-गुड़ाई की जाती है।

पशु प्रेमी भी हैं डॉ.साजिद
प्रोफेसर साजिद सिर्फ पर्यावरण प्रेमी ही नहीं है, बल्कि वह पशु प्रेमी भी हैं। कुछ दिन पहले उन्हें गिलहरी का बच्चा सड़क किनारे पड़ा मिल गया था। वह उसे उठा लाएं और देखभाल की। नाम रखा गिल्लू। उसे निप्पल से दूध को पिलाते हैं। उसके लिए एक छोटा सा पिंजरा बनाने के साथ ही लेटने के लिए कपड़े का बिस्तर भी बना है। गिल्लू साजिद के परिवार का हिस्सा है।

तीन हजार पौधे रोपकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सामाजिक संस्था मानवता वेलफेयर सोसाइटी पिछले चार साल से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रही हैं। संस्था की ओर से करीब तीन हजार पौधे लगाकर आम लोगों को संरक्षण के प्रति जागरूक किया है। 

संस्था के संस्थापक अमित श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान चलाकर विभिन्न स्कूलों, कॉलोनियों, पार्कों, सरकारी दफ्तरों और स्लम इलाकों में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। सिर्फ पौधे नहीं लगाए बल्कि उन्हें संरक्षित भी किया, ताकि वे पेड़ बने और आने वाले वर्षों में समाज को उसका लाभ मिल सकें। संस्था ने ‘एक व्यक्ति-एक पौधा’ का संदेश देकर युवाओं और बच्चों को अभियान से जोड़ा।

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