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बाहर से आये कामगारों को स्थानीय उद्योगों में नही मिल रहा काम
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शाहजहांपुर। प्रदेश सरकार बाहर से आए कामगारों को उनके जनपदों में रोजगार दिलाने का दावा कर रही हो, लेकिन शाहजहांपुर में हालात बिल्कुल विपरीत हैं। जिले में अभी तक बाहर से लगभग 17 हजार प्रवासी मजदूर लौट चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या अकुशल श्रमिकों की है, जिन्हें मनरेगा के तहत कार्यों में लगाने की कोशिश है। मगर कुशल श्रेणी के अन्य कामों से जुड़े कामगारों को जिले की औद्योगिक इकाइयां रोजगार दे पाने की स्थिति में नही हैं। बता दें कि जिले में छोटी, मंझोली और बड़ी लगभग 4000 औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें एमएसएमई सेक्टर की 40 से 45 फीसदी इकाइयां नकदी संकट के कारण बंद पड़ी हैं और जो उद्योग चालू हैं, उनमें महज 20 से 30 फीसदी श्रमिकों से काम लिया जा रहा है। उद्यमियों का कहना है कि कारखानों के सभी नियमित कर्मचारियों के काम पर वापस लौटने और उत्पादन सामान्य होने की स्थिति बनने के बाद ही बाहरी कामगारों को रोजगार दे पाना संभव होगा।
लॉकडाउन में तमाम फैक्टरी बंद होने पर बाहर से लौटे ऐसे 10825 प्रवासी मजदूर चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें काम की तलाश है। इनमें 7503 ऐसे अकुशल मजदूर हैं, जो केवल खेत मजदूरी और मनरेगा के कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा उनके लिए गांवों में रोजगार के अन्य कोई विकल्प नहीं हैं। बाहर रहकर मेहनत-मजदूरी के कामों से दिहाड़ी कमाते रहे 5838 श्रमिक पेशा लोगों के जॉब कार्ड बनाकर उनमें से 5783 को मनरेगा के विभिन्न कामों से जोड़ा जा चुका है। बेरोजगारी के दंश से 3318 ऐसे कामगार जूझ रहे हैं, जो अन्य पेशों से जुड़े होने के कारण केवल फैक्टिरियों में रोजगार हासिल कर सकते हैं या फिर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाए। कुशल श्रेणी के इन्हीं कामगारों को रोजगार दिलाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
जलालाबाद के सौंफ कारखानों में काम ठप
जलालाबाद। लॉक डाउन के बीच लघु उद्योग धंधे शुरू किए जाने की मुहिम विभिन्न दिक्कतों के चलते अभी परवान नही चढ़ पा रही है। नगर के प्रमुख उद्योग में शामिल सौंफ पॉलिशिंग के कारखाने बंद हैं जबकि कारोबार का यही सीजन है। सीजनल धंधे में शामिल आइसक्रीम फैक्ट्रियों का भी यही हाल है। सबसे बड़ी दिक्कत बाहर से माल आने की है। अप्रैल से जून तक सौंफ का कई करोड़ का कारोबार होता था। इसमें खरीद-फरोख्त और लोडिंग-अनलोडिंग में तमाम श्रमिकों को आसानी से रोजगार मिल जाता था। सौंफ बनाने वाले करीब दो दर्जन कारखाने बंद पड़े हैं और दोनों आइसक्रीम फैक्टरी में भी ताले लटके हैं।
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इन श्रेणियों के लोगों को रोजगार की तलाश
मनरेगा सेल के सर्वे में बाहर से आए तमाम कामगार ऐसे पाए गए जो मजदूरी से इतर अन्य पेशों से जुड़े पाए गए हैं। इनमें 2796 फैक्टरी वर्कर समेत 111 सिलाई कारीगर, 248 ठेला चालक, 72 वाहन चालक, 29 नाई, 26 कढ़ाई कारीगर, नौ पेंटर, सात बढ़ई और छह सिक्योरिटी गार्ड शामिल हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने इससे पहले कभी फावड़ा-कुदाल नहीं चलाए। इसलिए मनरेगा के काम करना इनके बूते की बात नहीं है और न ही यह लोग जॉबकार्ड बनवाना चाहते है। इन्हें कारखानों मेें काम मिलने का इंतजार है।
उद्यमियों को सरकार की नीयत पर कोई संदेह नहीं है। हम भी चाहते हैं कि बाहर से आए कुशल कामगारों को फैक्ट्रियों में रोजगार मिले, लेकिन विभिन्न विभागों से जुड़े अधिकारी इसके लिए अनुकूल माहौल बनाने का प्रयास नहीं कर रहे। बाजार में किसी चीज की मांग नहीं है। बैंक शाखाएं आरबीआई के दिशा निर्देशों का पालन करें तो एमएसएमई सेक्टर की बंद इकाइयों का आर्थिक संकट दूर होगा।
- अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
सौंफ के कारोबार का यह पीक सीजन है। छनाई, कुटाई व सफाई आदि के लिए जलालाबाद में 25 से ज्यादा कारखाने हैं। वहां राजस्थान, गुजरात व देवचरा (बरेली) आदि स्थानों से बड़ी मात्रा में सौंफ आती थी। लॉकडाउन के कारण बाहर से सौंफ नहीं आ रही है। इस वजह से सभी कारखाने बंद पड़े हैं।
- विजय मिश्रा, सौंफ कारखाना संचालक
शामली में एक गत्ता फैक्ट्री में मशीन ऑपरेटर था और मैकेनिक का काम भी करता था, लेकिन घर आने पर यहां पर कोई काम नहीं है। परिवार के गुजारे के लिए यहीं काम तलाश रहा हूं क्योंकि अब बाहर लौटने में डर लगता है।
- ओमवीर शर्मा, ग्राम बझेड़ा भगवानपुर (जैतीपुर)
गाजियाबाद में लकड़ी की फैक्ट्री में कारीगर था और अच्छा गुजारा हो रहा था। लॉकडाउन के बाद से घर पर बैठा हूं क्योंकि यहां तमाम फैक्ट्रियां बंद होने से कोई ऐसा काम नहीं है, जिससे परिवार का पालन पोषण हो सके।
- सुधीर कुमार, ग्राम मरुआ झाला (जैतीपुर)
जो प्रवासी कामगार अभी तक विभिन्न कंपनियों और कारखानों में काम करते रहे, उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए शासकीय नीति जल्द घोषित होने की उम्मीद है। ऐसे लोगों को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार से जोडने के साथ फैक्ट्रियों के लिए भी अनुकूल माहौल बनाया जाएगा। बहुत जल्द लोन मेला भी आयोजित किए जाएंगे ताकि लोग ऋण लेकर अपने पेशेगत कार्य शुरू कर सकें।
- महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य विकास अधिकारी
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लॉकडाउन में तमाम फैक्टरी बंद होने पर बाहर से लौटे ऐसे 10825 प्रवासी मजदूर चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें काम की तलाश है। इनमें 7503 ऐसे अकुशल मजदूर हैं, जो केवल खेत मजदूरी और मनरेगा के कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा उनके लिए गांवों में रोजगार के अन्य कोई विकल्प नहीं हैं। बाहर रहकर मेहनत-मजदूरी के कामों से दिहाड़ी कमाते रहे 5838 श्रमिक पेशा लोगों के जॉब कार्ड बनाकर उनमें से 5783 को मनरेगा के विभिन्न कामों से जोड़ा जा चुका है। बेरोजगारी के दंश से 3318 ऐसे कामगार जूझ रहे हैं, जो अन्य पेशों से जुड़े होने के कारण केवल फैक्टिरियों में रोजगार हासिल कर सकते हैं या फिर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाए। कुशल श्रेणी के इन्हीं कामगारों को रोजगार दिलाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
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जलालाबाद के सौंफ कारखानों में काम ठप
जलालाबाद। लॉक डाउन के बीच लघु उद्योग धंधे शुरू किए जाने की मुहिम विभिन्न दिक्कतों के चलते अभी परवान नही चढ़ पा रही है। नगर के प्रमुख उद्योग में शामिल सौंफ पॉलिशिंग के कारखाने बंद हैं जबकि कारोबार का यही सीजन है। सीजनल धंधे में शामिल आइसक्रीम फैक्ट्रियों का भी यही हाल है। सबसे बड़ी दिक्कत बाहर से माल आने की है। अप्रैल से जून तक सौंफ का कई करोड़ का कारोबार होता था। इसमें खरीद-फरोख्त और लोडिंग-अनलोडिंग में तमाम श्रमिकों को आसानी से रोजगार मिल जाता था। सौंफ बनाने वाले करीब दो दर्जन कारखाने बंद पड़े हैं और दोनों आइसक्रीम फैक्टरी में भी ताले लटके हैं।
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इन श्रेणियों के लोगों को रोजगार की तलाश
मनरेगा सेल के सर्वे में बाहर से आए तमाम कामगार ऐसे पाए गए जो मजदूरी से इतर अन्य पेशों से जुड़े पाए गए हैं। इनमें 2796 फैक्टरी वर्कर समेत 111 सिलाई कारीगर, 248 ठेला चालक, 72 वाहन चालक, 29 नाई, 26 कढ़ाई कारीगर, नौ पेंटर, सात बढ़ई और छह सिक्योरिटी गार्ड शामिल हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने इससे पहले कभी फावड़ा-कुदाल नहीं चलाए। इसलिए मनरेगा के काम करना इनके बूते की बात नहीं है और न ही यह लोग जॉबकार्ड बनवाना चाहते है। इन्हें कारखानों मेें काम मिलने का इंतजार है।
उद्यमियों को सरकार की नीयत पर कोई संदेह नहीं है। हम भी चाहते हैं कि बाहर से आए कुशल कामगारों को फैक्ट्रियों में रोजगार मिले, लेकिन विभिन्न विभागों से जुड़े अधिकारी इसके लिए अनुकूल माहौल बनाने का प्रयास नहीं कर रहे। बाजार में किसी चीज की मांग नहीं है। बैंक शाखाएं आरबीआई के दिशा निर्देशों का पालन करें तो एमएसएमई सेक्टर की बंद इकाइयों का आर्थिक संकट दूर होगा।
- अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
सौंफ के कारोबार का यह पीक सीजन है। छनाई, कुटाई व सफाई आदि के लिए जलालाबाद में 25 से ज्यादा कारखाने हैं। वहां राजस्थान, गुजरात व देवचरा (बरेली) आदि स्थानों से बड़ी मात्रा में सौंफ आती थी। लॉकडाउन के कारण बाहर से सौंफ नहीं आ रही है। इस वजह से सभी कारखाने बंद पड़े हैं।
- विजय मिश्रा, सौंफ कारखाना संचालक
शामली में एक गत्ता फैक्ट्री में मशीन ऑपरेटर था और मैकेनिक का काम भी करता था, लेकिन घर आने पर यहां पर कोई काम नहीं है। परिवार के गुजारे के लिए यहीं काम तलाश रहा हूं क्योंकि अब बाहर लौटने में डर लगता है।
- ओमवीर शर्मा, ग्राम बझेड़ा भगवानपुर (जैतीपुर)
गाजियाबाद में लकड़ी की फैक्ट्री में कारीगर था और अच्छा गुजारा हो रहा था। लॉकडाउन के बाद से घर पर बैठा हूं क्योंकि यहां तमाम फैक्ट्रियां बंद होने से कोई ऐसा काम नहीं है, जिससे परिवार का पालन पोषण हो सके।
- सुधीर कुमार, ग्राम मरुआ झाला (जैतीपुर)
जो प्रवासी कामगार अभी तक विभिन्न कंपनियों और कारखानों में काम करते रहे, उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए शासकीय नीति जल्द घोषित होने की उम्मीद है। ऐसे लोगों को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार से जोडने के साथ फैक्ट्रियों के लिए भी अनुकूल माहौल बनाया जाएगा। बहुत जल्द लोन मेला भी आयोजित किए जाएंगे ताकि लोग ऋण लेकर अपने पेशेगत कार्य शुरू कर सकें।
- महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य विकास अधिकारी