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5.7 डिग्री उछला पारा, ठंड से राहत पर बारिश ने डराया
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शाहजहांपुर में गुरुवार को छाये बादल। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से वायुदाब सामान्य से आठ अंक कम होने के कारण बुधवार रात से बादल छाने लगे। इससे बुधवार रात में न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री बढ़कर 12.1 डिग्री सेल्सियस हो गया। बृहस्पतिवार को सुबह सूर्योदय से पहले और बाद में कुछ देर तक मामूली बूंदाबांदी भी हुई। बाद में धूप निकली, लेकिन तेज हवा के साथ बादलों की चादर ने सूरज को ढकना शुरू कर दिया। शाम को बारिश भी हुई।
मौसम वैज्ञानिक के अनुसार उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों पर हिमपात के साथ हो रही बारिश के कारण मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और अगले 24 घंटे तक बादल छाए रहने के साथ बारिश होने की दशा मेें दिन के तापमान में गिरावट आने के आसार हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता बरतने की जरूरत है।
इससे पहले, बीती दस जनवरी को भी रात में घने बादल छाने से बढ़ी उमस के कारण न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। बाद में वायुदाब बढ़ने से हवा चली और बादल छंटे तो कोहरा छाने के साथ रात में पारा फिर से गिरने लगा और वह चार से पांच डिग्री के बीच सीमित हो गया। हालांकि, बाद में 25 जनवरी को न्यूनतम तापमान बढ़कर 10.5 डिग्री हो गया, लेकिन पुरवाई चलनी शुरू हुई तो रात में सर्दी बढ़ने लगी। इधर, दो दिन से तीखी धूप निकलने के कारण दिन मेें पारा उछलना शुरू हुआ तो रात में भी उमस बढ़ने लगी। बृहस्पतिवार को सुबह बादल थोड़े कम हुए तो धूप निकली, लेकिन कुछ देर बाद मौसम ने फिर तेवर बदल लिए।
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पश्चिमी क्षितिज से उठे काले-भूरे बादलों ने आसमान की घेराबंदी की तो धूप गायब हो गई। सूरज के बादलों की ओट में छिपने पर धूप-छांव का खेल दोपहर एक बजे तक चला। बाद में अचानक उत्तर-पश्चिम दिशा की हवा के तेज थपेड़े चले तो बादल फिर से घने हो गए और इसी के साथ कुछ देर हल्की बूंदाबांदी हुई तो शाम को बारिश। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पहाड़ों पर हिमपात और बारिश का सीधा असर मैदानी क्षेत्र के मौसम पर पड़ रहा है क्योंकि हवा का बहाव उधर से ही हो रहा है। उन्होंने बताया कि दिन में धूप और बादलों के मिले-जुले असर से अधिकतम तापमान 0.5 डिग्री बढ़कर 24.5 डिग्री सेल्सियस हो गया। वायुदाब में 25 अंक की गिरावट देर रात से शुक्रवार को सुबह तक बारिश होने का संकेत दे रही है और ऐसी स्थिति में पारा फिर लुढ़कना तय है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम के बदलते रुख में सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि जरा सी असावधानी सेहत को खतरे में डाल सकती है।
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बारिश से फसलों को होगा लाभ
शाहजहांपुर। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मामूली बरसात रबी सीजन की सभी फसलों के लिए लाभकारी होगी, बशर्ते हवा की गति तेज होने के बजाय सामान्य बनी रहे।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार गेहूं समेत दलहनी फसलों को बारिश लाभ पहुंचाएगी क्योंकि मसूर और चना की फसल अभी फूलनी शुरू हुई है। जिन खेतों के गेहूं पौधों में बालियां निकल रही हैं, वह फसल तेज हवा में गिर सकती है। खेतों में काटकर रखी गई लाही की फसल को नुकसान हो सकता है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह का कहना है कि अभी इतनी बारिश नहीं हुई कि उसे मापा जा सके, लेकिन दस मिमी से अधिक बारिश होने पर तिलहनी फसल को नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता। संवाद
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मौसम वैज्ञानिक के अनुसार उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों पर हिमपात के साथ हो रही बारिश के कारण मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और अगले 24 घंटे तक बादल छाए रहने के साथ बारिश होने की दशा मेें दिन के तापमान में गिरावट आने के आसार हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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इससे पहले, बीती दस जनवरी को भी रात में घने बादल छाने से बढ़ी उमस के कारण न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। बाद में वायुदाब बढ़ने से हवा चली और बादल छंटे तो कोहरा छाने के साथ रात में पारा फिर से गिरने लगा और वह चार से पांच डिग्री के बीच सीमित हो गया। हालांकि, बाद में 25 जनवरी को न्यूनतम तापमान बढ़कर 10.5 डिग्री हो गया, लेकिन पुरवाई चलनी शुरू हुई तो रात में सर्दी बढ़ने लगी। इधर, दो दिन से तीखी धूप निकलने के कारण दिन मेें पारा उछलना शुरू हुआ तो रात में भी उमस बढ़ने लगी। बृहस्पतिवार को सुबह बादल थोड़े कम हुए तो धूप निकली, लेकिन कुछ देर बाद मौसम ने फिर तेवर बदल लिए।
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पश्चिमी क्षितिज से उठे काले-भूरे बादलों ने आसमान की घेराबंदी की तो धूप गायब हो गई। सूरज के बादलों की ओट में छिपने पर धूप-छांव का खेल दोपहर एक बजे तक चला। बाद में अचानक उत्तर-पश्चिम दिशा की हवा के तेज थपेड़े चले तो बादल फिर से घने हो गए और इसी के साथ कुछ देर हल्की बूंदाबांदी हुई तो शाम को बारिश। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पहाड़ों पर हिमपात और बारिश का सीधा असर मैदानी क्षेत्र के मौसम पर पड़ रहा है क्योंकि हवा का बहाव उधर से ही हो रहा है। उन्होंने बताया कि दिन में धूप और बादलों के मिले-जुले असर से अधिकतम तापमान 0.5 डिग्री बढ़कर 24.5 डिग्री सेल्सियस हो गया। वायुदाब में 25 अंक की गिरावट देर रात से शुक्रवार को सुबह तक बारिश होने का संकेत दे रही है और ऐसी स्थिति में पारा फिर लुढ़कना तय है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम के बदलते रुख में सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि जरा सी असावधानी सेहत को खतरे में डाल सकती है।
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बारिश से फसलों को होगा लाभ
शाहजहांपुर। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मामूली बरसात रबी सीजन की सभी फसलों के लिए लाभकारी होगी, बशर्ते हवा की गति तेज होने के बजाय सामान्य बनी रहे।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार गेहूं समेत दलहनी फसलों को बारिश लाभ पहुंचाएगी क्योंकि मसूर और चना की फसल अभी फूलनी शुरू हुई है। जिन खेतों के गेहूं पौधों में बालियां निकल रही हैं, वह फसल तेज हवा में गिर सकती है। खेतों में काटकर रखी गई लाही की फसल को नुकसान हो सकता है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह का कहना है कि अभी इतनी बारिश नहीं हुई कि उसे मापा जा सके, लेकिन दस मिमी से अधिक बारिश होने पर तिलहनी फसल को नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता। संवाद