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शहर के इलाकों में अब भी जलभराव, अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

Sun, 31 Oct 2021 01:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 31 Oct 2021 01:15 AM IST
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water  logging problem
शाहजहांपुर के सुभाषनगर इलाके में गर्रा की बाढ़ उतरने के बावजूद जलभराव से घिरे आसपास के मकान। संव? - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। जिले से होकर बहने वाली नदियों में बाढ़ का कहर थम चुका है, लेकिन इनके तटीय निचले इलाकों में रहने वालों की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं हैं। शहर में गर्रा और खन्नौत नदियों के किनारे आबादी क्षेत्रों में बाढ़ से हुए जलभराव का हाल-फिलहाल कोई समाधान नहीं दिख रहा है। सुभाषनगर, ककरा कलां, लोधीपुर, बिसरात आदि मोहल्लों में कई स्थानों पर बाढ़ का पानी दो से तीन फुट तक जमा हुआ है।
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उसके निकास का कोई रास्ता नहीं होने से उन लोगों को खासी दिक्कत हो रही है, जिनके मकान पानी से घिरे हुए हैं। स्थानीय बाशिंदे पंपिंग सेट से पानी निकालने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और नगर-निगम के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। लोधीपुर में गत एक दशक के दौरान तमाम लोगों ने खन्नौत नदी के आसपास अपने मकान बना लिए हैं।
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इसलिए वहां बसे लोगों को हर साल मानसून सीजन में नदी चढ़ने पर जलभराव का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार 19 अक्तूबर को हुई भारी वर्षा के बाद नदियों में उफान आया तो वह इलाके भी नदियों के डूब क्षेत्र में आ गए, जहां पहले कभी बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा। हनुमत धाम के पीछे नए पुल के समानांतर बने बिसरात-दलेलगंज बाईपास मार्ग के किनारे बसे तमाम परिवारों को बाढ़ का पानी अभी तक परेशान किए है, जबकि नदी काफी पीछे हटकर अपने पेटे में जा चुकी है। वहां का नाला पहले से गंदगी से चोक होने से पानी को नदी की ओर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा है।
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इसी तरह सुभाषनगर के पश्चिमी छोर वाले बाहरी इलाकों में बसे लोगों के लिए गर्रा की बाढ़ पहले भी कई बार मुसीबत का सबब बन चुकी है, लेकिन इस बार ड्यूनी डाम से भारी मात्रा में पानी की निकासी होने से इस क्षेत्र के बाढ़ से जलमग्न हुए अंदरूनी रिहाइशी क्षेत्र और उनके मार्ग तीन से चार फुट पानी में डूब गए। कई दिन तक प्रभावित परिवार नाव के सहारे आवागमन करते रहे, लेकिन अब वहां नाव चलना मुमकिन नहीं है। अलीजान की ठेकी के सामने वाले रास्ते का निर्माण जलभराव के चलते रुक गया। यही नहीं, इस मार्ग के दोनों ओर तमाम मकान अभी तक एक से दो फुट पानी से घिरे हैं और खाली पड़े आवासीय भूखंड भी जलमग्न हैं।
सुभाषनगर में मकान बनाकर रह रहे सिंधौली क्षेत्र के गांव आलमपुर निवासी रामगोपाल के अनुसार वह छह साल से यहां रह रहे हैं, लेकिन बाढ़ से घर के चारों ओर हुए जलभराव का मंजर पहली बार देखा है। सेंट्रल वेयरहाउस कारपोरेशन से सेवानिवृत्त हो चुके मुकेश चंद्रा के अनुसार सुभाषनगर कॉलोनी से डॉट वाले रेलवे पुल और मालगोदाम की ओर जाने वाले रास्तों से पानी उतरकर ढका ताल में समा चुका है, लेकिन आवासीय भूखंडों की चारों ओर नीवें भरी होने से उनमें भरा पानी नहीं निकल रहा है। ऐसे में आसपास के मकानों में भी सीलन पहुंच रही है, लेकिन अभी तक नगर निगम प्रशासन ने जलभराव से घिरे किसी भी इलाके में पंपिंग सेट से पानी निकलवाने की पहल नहीं की है।

बाढ़ उतरने के बाद नदियों में बहाव तेजी से सामान्य हो रहा है। शहर के जिन आवासीय क्षेत्रों में अभी तक पानी भरा है, वहां नगर निगम के स्तर से सर्वे कराकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सुभाषनगर के आबादी वाले इलाकों से पानी निकालने की समुचित व्यवस्था के लिए नगर आयुक्त से वार्ता कर वहां के लोगों की समस्या का समाधान जल्द कराया जाएगा।
-रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन
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