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Shahjahanpur News: बाढ़ से जनजीवन हुआ बेहाल, पानी तटवर्ती गांवों की आबादी में पहुंचा

Thu, 27 Aug 2026 01:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 01:41 AM IST
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Floods have disrupted normal life, with water reaching the settlements of riverside villages.
शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद
शाहजहांपुर/मिर्जापुर। गंगा और रामगंगा का जलस्तर बीते 24 घंटे से जलस्तर स्थिर है, लेकिन गांवों में पानी घट नहीं रहा है। कई संपर्क मार्ग डूबने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित है। जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे पर चौरा और गुटेटी उत्तरी के पास करीब 200 मीटर हिस्से में डेढ़ से दो फुट पानी बह रहा है। प्रभावित ग्रामीणों को बीमारों को उपचार के लिए बाहर ले जाने में भी परेशानी हो रही है।
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सिंचाई विभाग शारदा नहर खंड के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार कलान के भैंसार बांध पर गंगा 143.50 मीटरगेज और अल्हागंज क्षेत्र के डबरी घाट पर रामगंगा 136.81 मीटरगेज पर बह रही है। गंगा खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर और रामगंगा 49 सेंटीमीटर नीचे है।
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गंगा के तटीय पैलानी उत्तरी, इस्लामनगर, आजादनगर और मस्जिदनगला के संपर्क मार्ग जलमग्न हैं। कई घरों के दरवाजों तक पानी पहुंच गया है। एसडीएम कलान आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों से लगातार निगरानी कराई जा रही है। आवश्यकता होने पर तटीय गांवों में खाद्य रसद और भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए जाएंगे।
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पांच किमी दूर से लाना पड़ रहा चारा
खेतों में पानी भरा होने से किसान फसलों को लेकर चिंतित हैं। पशुपालकों के अनुसार बरसीम और चरी की फसल खराब होने से उन्हें करीब पांच किलोमीटर दूर से घास काटकर लानी पड़ रही है। डनलप बुग्गी और बैलगाड़ी का किराया भी सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना हो गया है।
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कसारी में 12 एकड़ से अधिक खेत कटे
जलालाबाद। रामगंगा और बहगुल की बाढ़ ने कसारी गांव में फिर खतरा बढ़ा दिया है। मिर्जापुर क्षेत्र में दोनों नदियों के एक साथ बहने के बाद पानी फसलों समेत खेतों का कटान करता हुआ गांव की आबादी की ओर बढ़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार नदी की मुख्य धारा गांव से केवल 200-250 मीटर दूर रह गई है। खेतों तक जाने वाले चक रोड और रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं। दयाराम के अनुसार नदी के कटान के कारण करीब दो दशक पहले लोग नए स्थान पर आकर बसे थे। कोलाघाट पुल बनने के दौरान बहगुल और रामगंगा के एक साथ बहने के बाद से कसारी क्षेत्र में कटान की समस्या फिर बढ़ गई। एसडीएम जलालाबाद मधुसूदन गुप्ता ने बताया कि नदी भूमि का कटान कर रही है। जल्द कटान रोकने के उपाय शुरू कराए जाएंगे। संवाद

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खेत कटा, मकानों पर भी खतरा
बीते एक सप्ताह में पातीराम, दोदराम, विनोद, रामभरोसे, लक्ष्मण और श्रीकृष्ण समेत कई ग्रामीणों की कसारी गांव में 12 एकड़ से अधिक जमीन और फसल नदी में समा चुकी है। दोदराम ने बताया कि आठ बीघा खेत में से करीब आधा खेत कटकर नदी में समा चुका है। राजेश के अनुसार हर साल बाढ़ में फसल का नुकसान होता था, लेकिन इस बार कटान की रफ्तार से मकानों पर भी खतरा मंडराने लगा है।

शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद

शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद

शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद

शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद

शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद

शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद

शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद

शमशाबाद-जलालाबाद स्टेट हाइवे पर बाढ़ का पानी। संवाद

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