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परेशान किसानों को सहूलियतें दे सरकार
शाहजहांपुर
Updated Fri, 17 Apr 2015 11:41 PM IST
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किसान हित की मांगों को लेकर गत माह कलक्ट्रेट में की गई भूख हड़ताल को डीएम केस्तर से कोई तवज्जो नहीं दिए जाने से भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) का प्रशासन से भरोसा उठ चुका है। इसलिए संगठन केपदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर फसली नुकसान से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता केसाथ अन्य सहूलियतें तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है।
फसली नुकसान के सर्वे में हुई धांधली की जांच कर प्रभावितों को पर्याप्त आर्थिक सहायता दिए जाने और किसान हित की अन्य कई मांगों को लेकर भाकियू कार्यकर्ताओं ने 11 से 27 मार्च तक कलक्ट्रेट में भूख हड़ताल जारी रखी। इस दौरान पुलिस ने रात के वक्त कई बार बल प्रयोग करके हड़ताली कार्यकर्ताओं को वहां से हटाने की योजना बनाई, लेकिन डीएम ने उनका कोई पुरसाहाल नहीं लिया। भाकियू के मंडल महासचिव रमेश चद्र गुप्ता और जिलाध्यक्ष महेंद्र पाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में इस तथ्य का प्रमुखता से उल्लेख किया है।
पत्र के अनुसार 17 दिन तक आंदोलन चलने के बावजूद एक बार भी डीएम ने आंदोलनरत किसान प्रतिनिधियों से बात नहीं की। यही नहीं, 25 मार्च को शासन के दूत बनकर आए प्रमुख सचिव (स्टांप एवं निबंधन) अनिल कुमार को भी हड़ताली किसानों से दूर रखा। ऐसी स्थिति में फसली नुकसान से परेशान किसानों के हित की प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं बची है। जिले के किसान बड़ी आशा से सरकार पर आंखें टिकाए हैं।
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मुख्यमंत्री से भाकियू की प्रमुख मांगें
0 किसानों को क्षति के अनुपात में मिले फसली मुआवजा।
0 मौत का शिकार हुए किसानों को पर्याप्त राहत दी जाए।
0 गन्ना किसानों को मिलों पर बकाया ब्याज सहित चुकाएं।
0 गेहूं खरीद के मानकों में किसानों को पर्याप्त छूट दी जाए।
0 गेहूं समर्थन मूल्य पर 300 रुपये प्रति क्विंटल मिले बोनस।
0 सार्वजनिक वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगे रोक।
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फसली नुकसान के सर्वे में हुई धांधली की जांच कर प्रभावितों को पर्याप्त आर्थिक सहायता दिए जाने और किसान हित की अन्य कई मांगों को लेकर भाकियू कार्यकर्ताओं ने 11 से 27 मार्च तक कलक्ट्रेट में भूख हड़ताल जारी रखी। इस दौरान पुलिस ने रात के वक्त कई बार बल प्रयोग करके हड़ताली कार्यकर्ताओं को वहां से हटाने की योजना बनाई, लेकिन डीएम ने उनका कोई पुरसाहाल नहीं लिया। भाकियू के मंडल महासचिव रमेश चद्र गुप्ता और जिलाध्यक्ष महेंद्र पाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में इस तथ्य का प्रमुखता से उल्लेख किया है।
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पत्र के अनुसार 17 दिन तक आंदोलन चलने के बावजूद एक बार भी डीएम ने आंदोलनरत किसान प्रतिनिधियों से बात नहीं की। यही नहीं, 25 मार्च को शासन के दूत बनकर आए प्रमुख सचिव (स्टांप एवं निबंधन) अनिल कुमार को भी हड़ताली किसानों से दूर रखा। ऐसी स्थिति में फसली नुकसान से परेशान किसानों के हित की प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं बची है। जिले के किसान बड़ी आशा से सरकार पर आंखें टिकाए हैं।
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मुख्यमंत्री से भाकियू की प्रमुख मांगें
0 किसानों को क्षति के अनुपात में मिले फसली मुआवजा।
0 मौत का शिकार हुए किसानों को पर्याप्त राहत दी जाए।
0 गन्ना किसानों को मिलों पर बकाया ब्याज सहित चुकाएं।
0 गेहूं खरीद के मानकों में किसानों को पर्याप्त छूट दी जाए।
0 गेहूं समर्थन मूल्य पर 300 रुपये प्रति क्विंटल मिले बोनस।
0 सार्वजनिक वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगे रोक।