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नवजात की मौत पर अस्पताल में हंगामा
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:34 PM IST
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पुवायां। सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत पर घरवालों ने स्टाफ नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाकर मामला शांत कराने की कोशिश की लेकिन घरवाले स्टाफ नर्स के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की जिद पर अड़ गए। बाद में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। गांव मुड़िया वैश्य निवासी रंजीत कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी देवकी को शनिवार रात लगभग दो बजे प्रसव पीड़ा होने पर पुवायां के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में स्टाफ नर्स साधना ने प्रसव कराने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे का जन्म नहीं हो सका। इस पर रंजीत ने स्टाफ नर्स से पत्नी को रेफर करने की बात कही, लेकिन नर्स ने कोई ध्यान नहीं दिया। रविवार सुबह दस बजे प्रसव हुआ, लेकिन लापरवाही के कारण नवजात शिशु की मौत हो गई। नवजात की मौत होने की जानकारी मिलने पर परिवार के और लोग भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने स्टाफ नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। परिवार के लोगों ने मामले की शिकायत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाकर मामला शांत कराने की कोशिश की, लेकिन परिवार के लोग रिपोर्ट दर्ज करने के बाद ही बच्चे का शव उठाने की बात पर अड़ गए। इसके बाद पुलिस ने रंजीत की ओर से तहरीर लेकर स्टाफ नर्स साधना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके शव को कब्जे में लेने के बाद पोस्टमार्टम को भेज दिया। कोतवाली प्रभारी अशोक पाल ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की विवेचना की जाएगी।
मरा ही पैदा हुआ था बच्चा
सरकारी अस्पताल में नवजात की मौत पर प्रभारी डॉ. रेणु मीणा ने बताया कि किसी महिला को सरकारी अस्पताल में प्रसव पीड़िता को रखने की समय सीमा 24 से 72 घंटे होती है। स्टाफ नर्स ने किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की है। बच्चा जन्म से पहले ही मर चुका था।
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मरा ही पैदा हुआ था बच्चा
सरकारी अस्पताल में नवजात की मौत पर प्रभारी डॉ. रेणु मीणा ने बताया कि किसी महिला को सरकारी अस्पताल में प्रसव पीड़िता को रखने की समय सीमा 24 से 72 घंटे होती है। स्टाफ नर्स ने किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की है। बच्चा जन्म से पहले ही मर चुका था।
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