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फसलों पर आफत की बारिश, पारा लुढ़का, जलभराव

Sun, 09 Oct 2022 12:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 09 Oct 2022 12:22 AM IST
सार

बंगाल की खाड़ी में उठे नोरू चक्रवात का व्यापक असर शहर में दिखाई दे रहा है।बुधवार शाम से मौसम ने करवट बदली और तभी से धीमी गति से हवा चलने के साथ बारिश का दौर जारी रहने से सर्दी बढ़ रही है।

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The rain of calamity...the city is in disarray, crops submerged

विस्तार

शाहजहांपुर। बंगाल की खाड़ी में उठे नोरू चक्रवात का व्यापक असर शहर में दिखाई दे रहा है। बेमौसम और लगातार बारिश शहर से देेहात तक आफत बनकर टूटी है। इससे नगर निगम परिसर से लेकर शहर के कई प्रमुख हिस्से जलमग्न हो गए हैं। वहीं खेतों में बिछी फसल में पानी भरने से उसके सड़ने की आशंका बढ़ गई है। ।
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शुक्रवार रात से बूंदाबांदी जारी रहने और ठंडी हवा चलने से न्यूनतम तापमान 22 से करीब एक डिग्री घटकर 21.3 डिग्री सेल्सियस हो गया। शनिवार को दिन में बारिश के साथ माध्यम गति से ठंडी हवा चली तो अधिकतम तापमान भी एक डिग्री घटकर 24.6 डिग्री सेल्सियस हो हो गया। बुधवार शाम से मौसम ने करवट बदली और तभी से धीमी गति से हवा चलने के साथ बारिश का दौर जारी रहने से सर्दी बढ़ रही है। बीती शाम तक 25 मिमी पानी गिरने के बाद बारिश ने कुछ घंटे ठहराव लिया। रात 11 बजे के बाद फिर से रिमझिम फुहारें गिरने लगीं और आधी रात के बाद बारिश तेज हो गई। सुबह आठ बजे तक रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। तब तक तीन मिमी पानी गिर चुका था। सुबह दस बजे के बाद से फिर बारिश की झड़ी लग गई और दोपहर तक पांच मिमी पानी और बरस गया। इस महीने अब तक करीब 33 एमएम बारिश हो चुकी है।
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टाउनहाल में नगर निगम कार्यालय के नजदीक, रोडवेज बस स्टेशन, जीआईसी परिसर, उप निबंधक कार्यालय परिसर, कलेक्ट्रेट भवन के पीछे आपूर्ति कार्यालय परिसर आदि स्थानों पर जलभराव से तालाब बन गए। सीवर लाइन के चैंबर बनाने को शहर में मुख्य मार्गों पर बनाए गए गड्ढों के आसपास कीचड़ से लोगों का निकलना कठिन हो गया। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि रविवार को भी दिन भर बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम वर्षा की आशंका बनी रहेगी।
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किसानों के लिए आफत बनी बारिश की झड़ी
कांट। सूखे की मार झेलने के बाद अन्नदाता किसानों के लिए लगातार हो रही बारिश आफत बन गई है। इसकी वजह से उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। हटीपुर गांव के रहने वाले किसान विजय मिश्रा ने बताया कि दो दिन से हो रही बारिश की वजह से उनके गांव और आसपास के इलाकों में धान, मूंगफली, मक्का, बाजरा आदि फसलों को भारी नुकसान हुआ है। पिछले वर्ष भी इसी दौरान भारी बारिश ने फसलों को नुकसान पहुंचाया था।
खेतों में गिरे धान के जमने की आशंका
पुवायां। तीन दिन से हो रही बारिश के साथ चलती हवा ने धान, गन्ना और तिल्ली की फसल को खेत में गिरा दिया है। तिल की फलियां बारिश के कारण खेत में ही चटक रही हैं, जिससे भारी नुकसान हुआ है। वहीं धान गिर जाने से उसमें अंकुर फूट सकता है, इससे धान के वजन पर भारी असर पड़ेगा। गन्ने की फसल गिरने से उसके टेढ़ा होने, वजन कम होने और चूहों से गन्ने को भारी नुकसान होने की आशंका से किसान परेशान हो उठे हैं। किसानों का कहना है कि जरूरत के समय बारिश हुई नहीं और बमुश्किल फसल तैयार की तो बारिश से भारी नुकसान हो रहा है।
तेज हवा चलने से फसलों को होगा ज्यादा नुकसान
जिले में खरीफ सीजन में 4.50 लाख किसानों ने करीब 2.67 लाख हेक्टेयर में फसलें बोई हैं। इनमें सर्वाधिक 2.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की विभिन्न किस्में रोपी गई हैं। प्रशासन चार फीसदी फसलें पहले ही सूखा से प्रभावित मान चुका है और अब बारिश कहर ढा रही है। उप कृषि निदेशक धीरेंद्र सिंह भी मानते हैं कि अभी धान की सिर्फ 25 प्रतिशत फसल कट सकी है। पुवायां क्षेत्र में फसल कटने की शुरुआत के साथ बारिश की बाधा खड़ी हो गई। उनका यह भी कहना है कि केवल वही फसल काली पड़ने की आशंका है जो खेतों मेें गिर गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुुसार बारिश के पानी का किसान खेतों में जमाव न होने दें और उसे निकालते रहें तो मौसम सामान्य होते ही फसल में नमी कम होने लगेगी।

पानी में गिरकर रंग छोड़ता है धान
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि तेज हवा से धान के पौधे पानी से भरे खेत में गिरते हैं तो कुछ घंटे में ही विघटन (सड़न) की रासायनिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इससे पौधों में हल्की लालिमा आने के बाद वे काले पड़ने लगते हैं। फसल परिपक्व और पकने योग्य होने के बाद कोई कीटनाशक डाले जाने पर वह भी पानी में घुलकर लाल रंग छोड़ सकता है। अमूमन अधपका धान बारिश में गिरकर पहले पीला, फिर हल्का लाल और अंत में काला पड़ जाता है। रसायन के इस्तेमाल से रंग और भी गाढ़ा हो सकता है।
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