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नहीं रहे कहानीकार हृदयेश
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Mon, 31 Oct 2016 11:28 PM IST
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कहानीकार
- फोटो : अमर उजाला
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प्रख्यात कहानीकार हृदयेश का निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्होंने सोमवार को दोपहर 12 बजे मोहल्ला बक्सरियां स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को सुबह नौ बजे गर्रा मोक्षधाम पर होगा।
साहित्य भूषण हृदयेश का पूरा नाम हृदय नारायण मेहरोत्रा था। वह हृदयेश के नाम से लिखते थे। उनके अब तक 20 कहानी संग्रह और 13 उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। उनके उपन्यास ‘सांड़’ और ‘सफेद घोड़ा काला सवार’ उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से पुरस्कृत हो चुके हैं। हृदयेश अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके भाई डॉ. एनसी मेहरोत्रा प्रख्यात इतिहासकार हैं। उनके बेटों में सबसे बड़े डॉ. प्रेम मेहरोत्रा अमेरिका में साइंटिस्ट हैं। मझले डॉ. राकेश मेहरोत्रा शहर के प्रख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ हैं और छोटे बेटे सुनील मेहरोत्रा मुंबई में एक समाचार पत्र में कार्यरत हैं। पुत्री रेखा टंडन बरेली में ब्याही हैं।
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साहित्य भूषण हृदयेश का पूरा नाम हृदय नारायण मेहरोत्रा था। वह हृदयेश के नाम से लिखते थे। उनके अब तक 20 कहानी संग्रह और 13 उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। उनके उपन्यास ‘सांड़’ और ‘सफेद घोड़ा काला सवार’ उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से पुरस्कृत हो चुके हैं। हृदयेश अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके भाई डॉ. एनसी मेहरोत्रा प्रख्यात इतिहासकार हैं। उनके बेटों में सबसे बड़े डॉ. प्रेम मेहरोत्रा अमेरिका में साइंटिस्ट हैं। मझले डॉ. राकेश मेहरोत्रा शहर के प्रख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ हैं और छोटे बेटे सुनील मेहरोत्रा मुंबई में एक समाचार पत्र में कार्यरत हैं। पुत्री रेखा टंडन बरेली में ब्याही हैं।
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