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Shahjahanpur News: भारी वाहनों का बोझ ढोने लायक नहीं रहा रामगंगा का जर्जर पुल

Thu, 20 Nov 2025 12:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 20 Nov 2025 12:55 AM IST
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The dilapidated Ramganga bridge is no longer capable of carrying heavy vehicles.
अल्हागंज में रामगंगा नदी पर बने पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा। संवाद
अल्हागंज (शाहजहांपुर)। बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर रामगंगा नदी पर करीब पांच दशक पुराना पुल अब भारी वाहनों का बोझ उठाने लायक नहीं रहा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से बार-बार मरम्मत कराने के बावजूद यातायात के दबाव से पुल क्षतिग्रस्त हो जाता है। अगस्त में भी पुल के गर्डरों के बीच जोड़ वाले हिस्सों में दरारें आने पर उनमें कंक्रीट का भराव कराया गया, लेकिन अब गर्डरों के जोड़ फिर से खुलने लगे हैं। पुल समेत उसके आसपास बजरी-कोलतार उखड़ने से गड्ढे हो गए हैं।
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रामगंगा नदी पर करीब 680 मीटर लंबा पुल जब बनाया गया था, उस वक्त हाईवे पर वाहन कम निकलते थे। इसीलिए अगले दो-तीन दशक के यातायात का अनुमान लगाकर पुल डबल लेन का बनाया गया। 50 वर्ष पहले की तुलना में हाईवे पर यातायात का दबाव लगभग चार गुना बढ़ चुका है। इसे देखते हुए हाईवे को फोरलेन बना दिया गया, लेकिन रामगंगा पर दूसरा पुल बनाने की जरूरत नहीं समझी गई। हाईवे की तुलना में पुल संकरा होने से वहां बरेली और फर्रुखाबाद से पहुंचने वाले दोनों दिशाओं के वाहनों की रफ्तार कम हो जाती है।
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पुल संकरा होने से गंगा में पर्व स्नान के मौकों पर पुल पर एक साथ इतने वाहन आ जाते हैं कि उस पर दोनों ओर कई किमी लंबा जाम लग जाता है। पुल से बड़ी संख्या में वाहन निकलने से वहां हर समय टूट-फूट होती रहती है। मरम्मत का काम शुरू होने पर एक लेन बंद होते ही पुल पर जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है। वर्तमान में पुल की एक रेलिंग नदी की ओर झुक गई है और गर्डर के जोड़ खुल जाने से वह बाहर निकल आए हैं। यही नहीं, पुल की एक लेन पर गड्ढा बन जाने से उससे नदी बहती दिख रही है। गत एक माह से पुल पर गड्ढा बना हुआ, लेकिन एनएचएआई के ठेकेदार ने उसकी मरम्मत कराने के बजाय गड्ढे वाली लेन यातायात के लिए बंद करा दी है।
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इस वजह से पुल की केवल एक लेन से दोनों दिशाओं के वाहन निकल रहे हैं और इससे दूसरी लेन भी क्षतिग्रस्त हो जाने की आशंका है। फिलहाल यह पुल आवाजाही की सुविधा के लिए बनाया गया, लेकिन अब राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार पुल की केवल सतही मरम्मत की जाती है। पुल का डामर उखड़ जाने से कई जगह उसके लोहे के हिस्से बाहर निकल आए हैं। फर्रुखाबाद के लिए अन्य कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं होने की वजह से रामगंगा पुल दिन-ब-दिन कमजोर हो रहा है और वहां कभी भी कोई गंभीर हादसा हो सकता है।


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रामगंगा पुल की मौजूदा स्थिति से एनएचएआई के अधिकारियाें को अवगत करा दिया गया है। बुधवार रात को सुरक्षा से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करके पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर रिफ्लेक्टर के संकेतक लगाने का काम कराया जाएगा। पुल की रेलिंग और अन्य हिस्सों की मरम्मत के लिए यातायात रोकने की परिवहन विभाग से अनुमति ली जाएगी। पुल पर काम जल्द शुरू हो जाएगा।
-नसीम खान, साइट इंजीनियर, एनएचएआई
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