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बंद नोट बैंकोें में जमा करने को उमड़ी भीड़
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Tue, 20 Dec 2016 11:35 PM IST
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नोटबंदी के बाद प्रचलन से बाहर हुए पांच सौ के पुराने नोट बैंकों में जमा करने की होड़ मंगलवार से फिर शुरू हो गई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पांच हजार रुपये से ज्यादा पांच सौ के पुराने नोट एकमुश्त जमा करने के निर्देश के बाद से बैंकों के काउंटरों पर भीड़ बढ़ गई है। अब तक पुराने नोट जमा न करने के सवाल का बैंक अधिकारियों को संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाने वालों से पुरानी करेंसी स्वीकार नहीं की गई। हालांकि, इस बीच दो हजार और पांच सौ के नए नोटों समेत सौ रुपये और इससे कम मूल्य वाले पुराने नोट भी मुद्रा प्रवाह की मुख्य धारा मेें शामिल होने लगे हैं। इस बीच, बॉब समेत अन्य बैंकों के तमाम एटीएम ठप रहने से लोगों को भुगतान के लिए बैंकों में कतारें लगानी पड़ीं। प्रचलन से बाहर हो चुके पांच सौ के पुराने नोट रेलवे, रोडवेज बसों के किराए समेत पेट्रालियम की खरीद और बिजली-टेलीफोन बिलों के भुगतान में स्वीकार करने पर 15 दिसंबर से रोक प्रभावी हो चुकी है। हालांकि, आरबीआई ने बंद हो चुके पांच सौ के नोट बैंक खातों में 30 दिसंबर तक जमा करने की छूट दे रखी है, लेकिन नवीनतम आदेश में पांच हजार रुपये से अधिक के पांच सौ के पुराने नोट एक बार ही जमा करने को कहा गया है। आरबीआई के इस आदेश की हलचल बैंक शाखाओं में साफ दिखी। मंगलवार को सुबह बैंक शाखाएं खुलने से पहले वहां पुराने नोट जमा करने वाले पहुंचने लगे। सुबह दस बजे तक जमा काउंटरों पर लंबी लाइनें लग गईं। एसबीआई की टाउनहाल और बैंक ऑफ बड़ौदा की गोविंदगंज मेन ब्रांच समेत कचहरी स्थित कारपोरेशन बैंक, बॉब की मंडी चौक, विकास भवन की ग्रामीण बैंक, एसबीआई की चौक घंटाघर आदि शाखाओं पर पुराने नोट जमा करने वालों की इतनी भीड़ उमड़ी कि उनकी दोहरी कतारें लग गईं। खास यह रहा कि पूछताछ के झमेले से बचने के लिए तमाम लोग साढ़े चार हजार रुपये के पांच सौ वाले पुराने नोट लेकर बैंकों में पहुंचे। पांच हजार रुपये से अधिक के नोट लेकर पहुंचे लोगों से शाखा प्रबंधकों ने प्रार्थना पत्र लेने के साथ यह स्पष्टीकरण भी देने को कहा कि यह रकम अभी तक बैंक खातों मे जमा क्यों नहीं कराई गई। हालांकि, उन लोगों को पुराने नोट जमा करने में ज्यादा दिक्कत नहीं आई, जिन्हाेंने आठ नवंबर के बाद से अपने खातों में बंद हो चुके नोट जमा नहीं कराए। पुराने नोट जमा करने वालों की आपाधापी के कारण भुगतान लेने वालों समेत बैंकों में अन्य कामों से पहुंचे लोगों को खासी असुविधा हुई। संकुचित बैंक परिसरों में भीड़ कतारबद्ध होने से खातेदारों को अपने कामों के निर्धारित काउंटरोें तक पहुंचना कठिन हो गया। उधर, नए नोटों समेत सौ रुपये और इससे कम मूल्य वाले छोटे नोटों की बैंकों में आवक बढ़ने के साथ भुगतान व्यवस्था पटरी पर आने लगी है।
अधिकांश राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाओं समेत एचडीएफसी बैंक ने मंगलवार को भी अपने खातेदारों को भुगतान में रहमदिली दिखाई और उन्हें आरबीआई से तयशुदा अधिकतम भुगतान सीमा के अनुरूप पेमेंट किया। हालांकि, कैश की कमी से विकास भवन की ग्रामीण बैंक शाखा, गोविंदगंज की इलाहाबाद बैंक आदि ने अधिकतम दस हजार रुपये के विड्रॉल स्वीकृत किए।
कैशलेस वर्कशॉप में दिए जाएंगे टिप्स
नोटबंदी के कारण कैश के संकट से लोगों को उबारने के लिए बैंक शाखाएं ब्लॉक स्तर पर कैशलेस व्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए कार्यशालाएं लगाएंगी। अग्रणी बैंक प्रबंधक वीएम गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री की योजना को गति देने के लिए जिले में डिजिटल ग्राम बनाने की योजना पहले ही शुरू की जा चुकी है। इसी कड़ी में पहले ब्लॉक मुख्यालयों और बाद में उनसे संबंधित ग्राम पंचायतों में कैशलेस वर्कशॉप के आयोजन की शृंखला चलाई जाएगी।
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अधिकांश राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाओं समेत एचडीएफसी बैंक ने मंगलवार को भी अपने खातेदारों को भुगतान में रहमदिली दिखाई और उन्हें आरबीआई से तयशुदा अधिकतम भुगतान सीमा के अनुरूप पेमेंट किया। हालांकि, कैश की कमी से विकास भवन की ग्रामीण बैंक शाखा, गोविंदगंज की इलाहाबाद बैंक आदि ने अधिकतम दस हजार रुपये के विड्रॉल स्वीकृत किए।
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कैशलेस वर्कशॉप में दिए जाएंगे टिप्स
नोटबंदी के कारण कैश के संकट से लोगों को उबारने के लिए बैंक शाखाएं ब्लॉक स्तर पर कैशलेस व्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए कार्यशालाएं लगाएंगी। अग्रणी बैंक प्रबंधक वीएम गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री की योजना को गति देने के लिए जिले में डिजिटल ग्राम बनाने की योजना पहले ही शुरू की जा चुकी है। इसी कड़ी में पहले ब्लॉक मुख्यालयों और बाद में उनसे संबंधित ग्राम पंचायतों में कैशलेस वर्कशॉप के आयोजन की शृंखला चलाई जाएगी।
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