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राख की ईंटों में नहीं लगती काई-घास
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 19 Aug 2015 12:22 AM IST
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रिलायंस रोजा पॉवर सप्लाई की ओर से ऐश यूटिलाइजेशन के संबंध में सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने ईंट भट्ठा मालिकों, ग्राम प्रधानों आदि को भट्ठों से निकलने वाली राख से ईंटें बनाने तथा अन्य उपयोग किए जाने के लिए प्रेरित किया।
रिलायंस टाउनशिप में हुए सेमिनार में मुख्य अतिथि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके पॉलीवाल ने राख का सही इस्तेमाल किए जाने के टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि फ्लाई ऐश (उड़ने वाली राख) का उपयोग ईंट बनाकर कर सकते हैं। इससे ईंटें बनाना बेहद आसान है और यह पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी लाभदायक है। इस ईंट की बनी दीवार में प्लास्टर भी बहुत कम मात्रा में लगता है और दीवार साफ-सुथरी दिखाई देती है। इस ईंट की दीवार में घास, काई आदि की आशंका खत्म हो जाती है। डॉ. पॉलीवाल ने बताया कि इस प्रकार की ईंटों का प्रयोग गुजरात, सोनभद्र, नई दिल्ली आदि अंचलों में किया भी जा रहा है।
सेमिनार में भट्ठा तथा अन्य उद्योगों से निकलने वाली राख से निर्मित ईंटों का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह, नेप्चून मार्केटिंग कंपनी के जीएम राकेश जैन, ईंट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कपूर, उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार गर्ग आदि ने भी विचार व्यक्त कर अपने अनुभव बांटे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि डॉ. पॉलीवाल ने रोजा पॉवर सप्लाई के स्टेशन डायरेक्टर एमके परमेश्वरन तथा अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर सेमिनार का शुभारंभ किया। तत्पश्चात श्री परमेश्वरन ने अतिथियों का स्वागत कर सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
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सुनील रंजन सिंह और सुनील सिन्हा के संचालन में हुए कार्यक्रम में अरविंद सिंह, के.चंद्रशेखर, अरविंद चौरसिया, मनीष सिंह, राजीव कश्यप, चंद्रशेखर, राजेश कुमार, गौरव घुपड़, मनोहर कुमार, सोनू वर्मा, राजीव सिंह, अनुराग दुबे, अंबुज शुक्ला, विजन मिश्रा, कैप्टन मुनव्वर लतीफ, हितेंद्र सिसोदिया आदि का योगदान रहा।
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रिलायंस टाउनशिप में हुए सेमिनार में मुख्य अतिथि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके पॉलीवाल ने राख का सही इस्तेमाल किए जाने के टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि फ्लाई ऐश (उड़ने वाली राख) का उपयोग ईंट बनाकर कर सकते हैं। इससे ईंटें बनाना बेहद आसान है और यह पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी लाभदायक है। इस ईंट की बनी दीवार में प्लास्टर भी बहुत कम मात्रा में लगता है और दीवार साफ-सुथरी दिखाई देती है। इस ईंट की दीवार में घास, काई आदि की आशंका खत्म हो जाती है। डॉ. पॉलीवाल ने बताया कि इस प्रकार की ईंटों का प्रयोग गुजरात, सोनभद्र, नई दिल्ली आदि अंचलों में किया भी जा रहा है।
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सेमिनार में भट्ठा तथा अन्य उद्योगों से निकलने वाली राख से निर्मित ईंटों का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह, नेप्चून मार्केटिंग कंपनी के जीएम राकेश जैन, ईंट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कपूर, उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार गर्ग आदि ने भी विचार व्यक्त कर अपने अनुभव बांटे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि डॉ. पॉलीवाल ने रोजा पॉवर सप्लाई के स्टेशन डायरेक्टर एमके परमेश्वरन तथा अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर सेमिनार का शुभारंभ किया। तत्पश्चात श्री परमेश्वरन ने अतिथियों का स्वागत कर सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
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सुनील रंजन सिंह और सुनील सिन्हा के संचालन में हुए कार्यक्रम में अरविंद सिंह, के.चंद्रशेखर, अरविंद चौरसिया, मनीष सिंह, राजीव कश्यप, चंद्रशेखर, राजेश कुमार, गौरव घुपड़, मनोहर कुमार, सोनू वर्मा, राजीव सिंह, अनुराग दुबे, अंबुज शुक्ला, विजन मिश्रा, कैप्टन मुनव्वर लतीफ, हितेंद्र सिसोदिया आदि का योगदान रहा।