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Shahjahanpur News: जानलेवा हमले में दो सगे भाइयों को दस साल की सजा
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शाहजहांपुर। द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्र नाथ पांडेय ने जानलेवा हमले के मुकदमे में दो सगे भाइयों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसी मामले के क्रॉस केस में दोषी पाए जाने पर पिता और उसके तीन पुत्रों को चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गढि़यारंगीन थाना क्षेत्र के गांव घसा कल्याणपुर निवासी तोताराम ने 23 मई 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अपने दामाद बनवारी के खेत की फसल की वह रखवाली कर रहा था। खेत में घुसकर तेजराम की भैंस गन्ना खाने लगी। विरोध पर तेजराम के बेटे राजीव ने उसे गालियां दीं। थोड़ी देर बाद तेजराम और उसके बेटे राजीव और भूरा उर्फ संजीव आए और उसे और उसके बेटे पप्पू को लाठियों से पीटने लगे। हमलावरों ने तमंचे से फायर किया जो उसके बेटे पप्पू को लगा। वहीं दूसरा बेटा परिमल लाठियों की मार से चोटिल हो गया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में भेजा। सरकारी वकील उमेश चंद्र अग्निहोत्री के तर्क सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने राजीव और संजीव उर्फ भूरा को दोषी माना। उन्हें दस-दस वर्ष कारावास की सजा सुनाई। 11500-11500 रुपये जुर्माना भी लगाया। संजीव को आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल के कारावास और पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई। आरोपी तेजराम की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
वहीं तेजराम ने 23 मई 2011 को गढि़यारंगीन थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि जानवरों को चराने के विवाद में गांव के तोताराम और उसके पुत्र परिमल, पप्पू, विजेंद्र ने उसको लाठी से पीटा। मारपीट में उसका हाथ टूट गया। इन्हीं लोगों ने फायरिंग का मुकदमा दर्ज कराकर उसके बेटे संजीव उर्फ भूरे और राजीव को जेल भिजवा दिया। द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्र नाथ पांडेय ने तोताराम, उसके बेटों परिमल, पप्पू और विजेंद्र को चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार गढि़यारंगीन थाना क्षेत्र के गांव घसा कल्याणपुर निवासी तोताराम ने 23 मई 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अपने दामाद बनवारी के खेत की फसल की वह रखवाली कर रहा था। खेत में घुसकर तेजराम की भैंस गन्ना खाने लगी। विरोध पर तेजराम के बेटे राजीव ने उसे गालियां दीं। थोड़ी देर बाद तेजराम और उसके बेटे राजीव और भूरा उर्फ संजीव आए और उसे और उसके बेटे पप्पू को लाठियों से पीटने लगे। हमलावरों ने तमंचे से फायर किया जो उसके बेटे पप्पू को लगा। वहीं दूसरा बेटा परिमल लाठियों की मार से चोटिल हो गया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में भेजा। सरकारी वकील उमेश चंद्र अग्निहोत्री के तर्क सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने राजीव और संजीव उर्फ भूरा को दोषी माना। उन्हें दस-दस वर्ष कारावास की सजा सुनाई। 11500-11500 रुपये जुर्माना भी लगाया। संजीव को आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल के कारावास और पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई। आरोपी तेजराम की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
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वहीं तेजराम ने 23 मई 2011 को गढि़यारंगीन थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि जानवरों को चराने के विवाद में गांव के तोताराम और उसके पुत्र परिमल, पप्पू, विजेंद्र ने उसको लाठी से पीटा। मारपीट में उसका हाथ टूट गया। इन्हीं लोगों ने फायरिंग का मुकदमा दर्ज कराकर उसके बेटे संजीव उर्फ भूरे और राजीव को जेल भिजवा दिया। द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्र नाथ पांडेय ने तोताराम, उसके बेटों परिमल, पप्पू और विजेंद्र को चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
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