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गन्ना कीट नियंत्रण को अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने किया सर्वे

Wed, 25 May 2022 06:10 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2022 06:10 PM IST
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Survey done for sugarcane pest control
शाहजहांपुर के निगोही क्षेत्र के गांव कटिया बुजुर्ग में मंगलवार को गन्ना फसल में कीट-रोगों का सर्? - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। अधिकारियों व गन्ना शोध परिषद के पादप रोग वैज्ञानिकों की समिति ने मंगलवार को निगोही मिल के गन्ना ग्रामों में भ्रमण किया और फसल का सर्वे किया। टीम ने मौके पर मिले किसानों को कीट-रोग नियंत्रण के फौरी उपाय बताए। यह टीम अपर मुख्य सचिव (गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग) संजय आर भूसरेड्डी के निर्देश पर गठित की गई है।
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गन्ना का कैंसर कहे जाने वाले लाल सड़न रोग (रेड रॉट) और चोटीबेधक कीटों के नियंत्रण के लिए जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव की अध्यक्षता में समिति गठित की है। इसमें गन्ना शोध परिषद के पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. सुजीत प्रताप सिंह व डॉ. एसपी सिंह, निगोही चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक आशीष त्रिपाठी, निगोही गन्ना विकास परिषद के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक सर्वेश कुमार और गन्ना प्रबंधक संजय तिवारी शामिल हैं।
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इन सभी ने निगोही चीनी मिल क्षेत्र के गांव तेरा, कटिया बुजुर्ग, मूड़ा फत्तेपुर, सतवां, रोशननगर, दौलतपुर, काजीपुर, डेलखेड़ा, बिलंदपुर, परसरा परसरी, ढकिया तिवारी आदि गावों का भ्रमण किया गया। खास यह रहा कि सर्वे मेें कहीं-कहीं चोटीबेधक के शुरुआती लक्षण दिखे, लेकिन रेड रॉट से प्रभावित फसल नहीं दिखी। इस दौरान मौजूद किसान सत्यपाल, रजनीश सिंह, अवधेश सिंह, संजय, नरेश पाल सिंह आदि को चोटी बेधक कीट की पहचान बताते हुए उसके नियंत्रण को कई सुझाव दिए गए।
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कीट-रोग नियंत्रण को पादप रोग वैज्ञानिक के सुझाव
- रेड रॉट से ग्रसित पौधे जड़ से उखाड़कर नष्ट कर दें।
- उखाड़े गए पौधों के गड्डों में 10 से 20 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर भर दें।
- फसल चक्र अपनाएं और बदल-बदलकर फसलें बोएं।
- गन्ने की जगह धान लगाने से बीमारी कम लगती हैं, इसलिए बीज बदलाव करें।
- गन्ना बुआई को ऐसी प्रजाति का बीज चुनें जो रेड रॉट से प्रभावित न हो।
- प्रत्येक दो वर्ष के अंतराल में गन्ने की पेड़ी बदल दें।
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