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Shahjahanpur: पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश, दुष्कर्म का है मामला

Thu, 01 Dec 2022 09:01 PM IST
अनुराग सक्सेना संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: अनुराग सक्सेना Updated Thu, 01 Dec 2022 09:01 PM IST
सार

चिन्मयानंद की ओर से अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र देकर उनकी वृद्धावस्था और बीमारी के मद्देनजर अदालत में हाजिर होने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी जिसे कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर खारिज कर दिया। अदालत ने मुकदमे की अगली तारीख नौ दिसंबर दी है।

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Shahjahanpur court Orders to produce former Union Minister Chinmayanand accused of sexual assault
स्वामी चिन्मयानंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय/एमपीएमएलए कोर्ट असमा सुल्ताना ने 11 साल पुराने शिष्या से दुष्कर्म के मुकदमे में पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश पुलिस को दिए हैं।

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चिन्मयानंद की ओर से अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र देकर उनकी वृद्धावस्था और बीमारी के मद्देनजर अदालत में हाजिर होने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी जिसे कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर खारिज कर दिया। अदालत ने मुकदमे की अगली तारीख नौ दिसंबर दी है।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय/एमपी-एमएलए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अभियुक्त (चिन्मयानंद) को 30 नवंबर तक न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के लिए आदेशित किया गया था। अभियुक्त द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आत्मसमर्पण नहीं किया गया है। अभियुक्त द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर समय प्रदान करने की याचना की गई है। यह न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय के अधीनस्थ है। इस न्यायालय को यह अधिकार नहीं है कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई समय सीमा को बढ़ाए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रति थानाध्यक्ष, कोतवाली को प्राप्त हुई है।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय/एमपीएमएलए कोर्ट ने चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश किया। साथ ही थानाध्यक्ष को आदेशित किया कि वह अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। आदेश की एक प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजने का आदेश न्यायालय ने दिया है।

चिन्मयानंद की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र पेश किया गया कि प्रार्थी एक कमजोर व वृद्ध व्यक्ति है। वह अपनी गंभीर बीमारियों आदि के कारण न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पा रहा है। प्रार्थी जानबूझकर कोई गलती नहीं कर रहा है। उन्हें न्यायालय में पेश होने के लिए समय दिया जाए।

चिन्मयानंद के प्रार्थना पत्र पर अभियोजन पक्ष ने आपत्ति की। अधिवक्ता फिरोज हसन खां ने बताया कि समय प्रदान करने के लिए 28 नवंबर को एक प्रार्थना पत्र सर्वोच्च न्यायालय में दिया जा चुका है। इस पर सुनवाई होनी है।

यह है मामला
पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री एवं मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता चिन्मयानंद के खिलाफ उनकी शिष्या ने 2011 में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। पीड़िता के आपत्ति जताने पर अदालत ने केस वापसी का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था। साथ ही जमानती वारंट भी जारी कर दिया था।


बाद में एमपी-एमएलए कोर्ट/एसीजेएम तृतीय ने अदालत में हाजिर न होने पर चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। स्वामी चिन्मयानंद ने मुकदमा वापसी के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अपील की थी। यहां से उनकी अपील खारिज कर दी गई थी। बाद में चिन्मयानंद ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए स्थानीय अदालत में 30 नवंबर तक हाजिर होने का आदेश दिया था।

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