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Shahjahanpur News: सराफ से रंगदारी वसूलने के आरोपी चार सिपाही बर्खास्त
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आरोपी सिपाही वीरेंद्र।
शाहजहांपुर। जलालाबाद के चर्चित रंगदारी प्रकरण में एसपी सौरभ दीक्षित ने सख्त कार्रवाई करते हुए सराफ से दो लाख रुपये की रंगदारी वसूलने के आरोपी चारों सिपाहियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। तिलहर थाने में तैनात रहे इन सिपाहियों पर व्यापारी को स्मैक तस्करी के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर रकम वसूलने का आरोप है। चारों सिपाही मेरठ के रहने वाले हैं।
मामले में आरोपी सिपाही पंकज और वीरेंद्र को एंटी करप्शन टीम पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं, सिपाही अरुण चित्तौड़िया और तुषार वर्मा को पुलिस तलाश रही है। विभागीय जांच सीओ जलालाबाद दीपक कुमार सिंह को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया कि सिपाही वीरेंद्र कुमार बिना लिखित तहरीर और सक्षम अधिकारी के आदेश के जलालाबाद से सराफा व्यापारी सुंदरम क्षत्रिय को पकड़कर बिरियागंज चौकी ले गया था। आरोप है कि वहां उसे प्रताड़ित किया गया और परिवार से दो लाख रुपये लेने के बाद छोड़ा गया।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान, सीसी कैमरे की फुटेज, ऑडियो-वीडियो साक्ष्य और वायरल वीडियो की जांच की गई। इसमें चारों सिपाहियों की भूमिका सामने आई। पंकज की फोन कॉल की वॉयस रिकॉर्डिंग और व्यापारी से मोबाइल व रुपयों के लेनदेन से संबंधित साक्ष्य मिले। अरुण की पहचान एक मिनट आठ सेकंड के वायरल वीडियो और वॉयस रिकॉर्डिंग में हुई। तुषार की भूमिका भी वीडियो फुटेज और कॉल रिकॉर्डिंग की जांच में सामने आई।
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यह था मामला
चार सितंबर की रात तिलहर थाने में तैनात सिपाही अरुण चित्तौड़िया, पंकज, तुषार और वीरेंद्र ने जलालाबाद थाने के कानूनगोयान मोहल्ला निवासी सराफा व्यापारी सुंदरम की बाइक में मादक पदार्थ रखकर उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी। आरोप है कि इसके बाद उसे बिरियागंज चौकी ले जाकर प्रताड़ित किया गया और परिवार से दो लाख रुपये लेने के बाद छोड़ा गया। छह सितंबर को आईजीआरएस पर शिकायत के बाद मामला सामने आया था। विभागीय जांच के बाद एसपी ने चारों सिपाहियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें निलंबित किया था। बाद में एंटी करप्शन टीम ने पंकज और वीरेंद्र को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को बरेली जेल भेज दिया गया था।
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तीन महीनों में बर्खास्त किए गए पांच सिपाही
तीन महीनों में पांच सिपाही बर्खास्त किए जा चुके हैं। बुलंदशहर के थाना शिकारपुर के गांव शिवनगर धूंसरी का रहने वाला 33 वर्षीय विवेक कुमार जून 2025 को पुलिस में भर्ती हुआ था। ट्रेनिंग के बाद 24 अप्रैल 2026 को जैतीपुर थाने में पहली नियुक्ति मिली थी। परिवीक्षा काल में चल रहे विवेक को 12 जून को एंटी करप्शन की टीम ने थाना परिसर में 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। एसपी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सिपाही विवेक कुमार को 24 जून को बर्खास्त कर दिया था।
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सभी चारों आरोपियों को उनका पक्ष रखने का बराबर मौका दिया गया था। घरों में नोटिस भेजे गए थे। सीओ स्तर से कराई गई जांच में रंगदारी वसूलने के आरोप पुष्ट होने पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आरोपियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
-सौरभ दीक्षित, एसपी
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मामले में आरोपी सिपाही पंकज और वीरेंद्र को एंटी करप्शन टीम पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं, सिपाही अरुण चित्तौड़िया और तुषार वर्मा को पुलिस तलाश रही है। विभागीय जांच सीओ जलालाबाद दीपक कुमार सिंह को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया कि सिपाही वीरेंद्र कुमार बिना लिखित तहरीर और सक्षम अधिकारी के आदेश के जलालाबाद से सराफा व्यापारी सुंदरम क्षत्रिय को पकड़कर बिरियागंज चौकी ले गया था। आरोप है कि वहां उसे प्रताड़ित किया गया और परिवार से दो लाख रुपये लेने के बाद छोड़ा गया।
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जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान, सीसी कैमरे की फुटेज, ऑडियो-वीडियो साक्ष्य और वायरल वीडियो की जांच की गई। इसमें चारों सिपाहियों की भूमिका सामने आई। पंकज की फोन कॉल की वॉयस रिकॉर्डिंग और व्यापारी से मोबाइल व रुपयों के लेनदेन से संबंधित साक्ष्य मिले। अरुण की पहचान एक मिनट आठ सेकंड के वायरल वीडियो और वॉयस रिकॉर्डिंग में हुई। तुषार की भूमिका भी वीडियो फुटेज और कॉल रिकॉर्डिंग की जांच में सामने आई।
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यह था मामला
चार सितंबर की रात तिलहर थाने में तैनात सिपाही अरुण चित्तौड़िया, पंकज, तुषार और वीरेंद्र ने जलालाबाद थाने के कानूनगोयान मोहल्ला निवासी सराफा व्यापारी सुंदरम की बाइक में मादक पदार्थ रखकर उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी। आरोप है कि इसके बाद उसे बिरियागंज चौकी ले जाकर प्रताड़ित किया गया और परिवार से दो लाख रुपये लेने के बाद छोड़ा गया। छह सितंबर को आईजीआरएस पर शिकायत के बाद मामला सामने आया था। विभागीय जांच के बाद एसपी ने चारों सिपाहियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें निलंबित किया था। बाद में एंटी करप्शन टीम ने पंकज और वीरेंद्र को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को बरेली जेल भेज दिया गया था।
तीन महीनों में बर्खास्त किए गए पांच सिपाही
तीन महीनों में पांच सिपाही बर्खास्त किए जा चुके हैं। बुलंदशहर के थाना शिकारपुर के गांव शिवनगर धूंसरी का रहने वाला 33 वर्षीय विवेक कुमार जून 2025 को पुलिस में भर्ती हुआ था। ट्रेनिंग के बाद 24 अप्रैल 2026 को जैतीपुर थाने में पहली नियुक्ति मिली थी। परिवीक्षा काल में चल रहे विवेक को 12 जून को एंटी करप्शन की टीम ने थाना परिसर में 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। एसपी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सिपाही विवेक कुमार को 24 जून को बर्खास्त कर दिया था।
सभी चारों आरोपियों को उनका पक्ष रखने का बराबर मौका दिया गया था। घरों में नोटिस भेजे गए थे। सीओ स्तर से कराई गई जांच में रंगदारी वसूलने के आरोप पुष्ट होने पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आरोपियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
-सौरभ दीक्षित, एसपी

आरोपी सिपाही वीरेंद्र।

आरोपी सिपाही वीरेंद्र।

आरोपी सिपाही वीरेंद्र।