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‘व्यवस्था में परिवर्तन युवाओं का दायित्व’
शाहजहांपुर।
Updated Sat, 28 Feb 2015 12:02 AM IST
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एसएस कॉलेज के स्वर्ण जयंती महोत्सव के अंतर्गत चल रहे अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के अंतिम दिन एमयूआईटी विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो. एचके सिंह ने कहा कि राम और कृष्ण के मैनेजमेंट का मुकाबला कोई नहीं कर सकता, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को पूरी इमानदारी और नैतिकता के साथ प्राप्त किया। इतना ही नहीं, उन्होंने कमजोर वर्ग को एकत्र कर उन्हें सशक्त बनाया।
प्रो. सिंह ने कहा कि समाज एवं व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करना युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उसे खुली आंखों से सपने देखने होंगे और उसे पूरा करने के लिये जी तोड़ मेहनत करनी होगी। वहीं दूसरी ओर सरकारों को लोक उद्यम सेवा की दृष्टि से स्थापित करने चाहिए, लाभ की दृष्टि से नहीं। विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. आरके सिंह ने कहा की भारत का दर्शन कल्याणकारी है। समाज में यदि केवल कुछ लोगों के पास ही शक्ति और सामर्थ्य होगी तो मानवीय विकास की बात सोची नहीं जा सकती। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि विकासशील देशों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न अपने मानवीय संसाधन का विकास करना है। जिन विकासशील देशों में जनसंख्या बहुत अधिक है, वहां यह चुनौती और बड़ी है। सामान्यतया जनसंख्या की अधिकता को विकास में बोझ माना जाता रहा है, लेकिन भारत जैसे देश में ऐसा नहीं है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि विकास के लिये किसी मॉडल की आवश्यकता नहीं होती, इसके लिये मिलकर कार्य करना ही उपयोगी साबित होगा। व्यक्ति के पुरूषार्थ के साथ ईश्वर की कृपा भी आवश्यक है और यह कृपा दूसरों के विकास के बारे में सोचने पर ही मिलती है।
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इससे पूर्व संयोजक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत कर उनका परिचय दिया और सेमिनार की रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्राचार्य डॉ. एके मिश्र और डॉ. पूनम ने अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सभी को सम्मानित किया। संगीत विभाग की छात्राओं ने स्वागत गीत और डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री द्वारा रचित कुलगीत गाया। सेमिनार के चार तकनीकी सत्रों में 470 शोधपत्र पढ़े गए।
डॉ. प्रभात शुक्ला के संयोजन में चले तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता कानपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष अग्रवाल ने की। सह-अध्यक्ष डॉ. रमेशधर द्विवेदी रहे, जबकि इस सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. एसके श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि डॉ. पंकज भार्गव रहे। रिसोर्स पर्सन की भूमिका पंजाब विश्वविद्यालय के डॉ. भारत ने तथा निर्णायकों की भूमिका प्रो. सोमेश शुक्ला, डॉ. वीसी शर्मा और डॉ. सुनील बत्रा ने निभाई। तकनीकी सत्र में डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. देवेंद्र कुमार, प्रो. मेहरूख मिर्जा, प्रो. नागेंद्र यादव, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. मुमताज हुसैन, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. आदर्श पांडेय आदि का योगदान रहा।
शिक्षक वर्ग में डॉ. रिजवाना, नेहा मिश्रा, डॉ. दीपक मिश्र और डॉ. अभिजीत मिश्र तथा शोधार्थी वर्ग में वीरसिंह, अभिषेक बाजपेई, व्याख्या सक्सेना तथा स्वाती शर्मा को उत्कृष्ट शोध पत्र पढ़ने के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन इंद्रप्रीत कौर ने तथा आभार प्रबंध समिति के सचिव रामचंद्र सिंघल ने व्यक्त किया।
दीक्षांत समारोह में साढ़े दस तक पहुंचे छात्र
एसएस कॉलेज में पहली मार्च को होने वाले दीक्षांत समारोह के लिए डिग्री प्राप्त करने वाले एसएस कॉलेज और एसएस विधि महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को सुबह 10.30 बजे तक कालेज पहुंचने को कहा गया है। प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र ने कहा कि साढे़ दस बजे के बाद छात्रों का प्रवेश बंद हो जाएगा। व्यवस्था बनाने रखने के लिए राज्यपाल के हाथों डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र समय से महाविद्यालय पहुंचना सुनिश्चित करें।
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प्रो. सिंह ने कहा कि समाज एवं व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करना युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उसे खुली आंखों से सपने देखने होंगे और उसे पूरा करने के लिये जी तोड़ मेहनत करनी होगी। वहीं दूसरी ओर सरकारों को लोक उद्यम सेवा की दृष्टि से स्थापित करने चाहिए, लाभ की दृष्टि से नहीं। विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. आरके सिंह ने कहा की भारत का दर्शन कल्याणकारी है। समाज में यदि केवल कुछ लोगों के पास ही शक्ति और सामर्थ्य होगी तो मानवीय विकास की बात सोची नहीं जा सकती। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि विकासशील देशों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न अपने मानवीय संसाधन का विकास करना है। जिन विकासशील देशों में जनसंख्या बहुत अधिक है, वहां यह चुनौती और बड़ी है। सामान्यतया जनसंख्या की अधिकता को विकास में बोझ माना जाता रहा है, लेकिन भारत जैसे देश में ऐसा नहीं है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि विकास के लिये किसी मॉडल की आवश्यकता नहीं होती, इसके लिये मिलकर कार्य करना ही उपयोगी साबित होगा। व्यक्ति के पुरूषार्थ के साथ ईश्वर की कृपा भी आवश्यक है और यह कृपा दूसरों के विकास के बारे में सोचने पर ही मिलती है।
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इससे पूर्व संयोजक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत कर उनका परिचय दिया और सेमिनार की रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्राचार्य डॉ. एके मिश्र और डॉ. पूनम ने अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सभी को सम्मानित किया। संगीत विभाग की छात्राओं ने स्वागत गीत और डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री द्वारा रचित कुलगीत गाया। सेमिनार के चार तकनीकी सत्रों में 470 शोधपत्र पढ़े गए।
डॉ. प्रभात शुक्ला के संयोजन में चले तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता कानपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष अग्रवाल ने की। सह-अध्यक्ष डॉ. रमेशधर द्विवेदी रहे, जबकि इस सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. एसके श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि डॉ. पंकज भार्गव रहे। रिसोर्स पर्सन की भूमिका पंजाब विश्वविद्यालय के डॉ. भारत ने तथा निर्णायकों की भूमिका प्रो. सोमेश शुक्ला, डॉ. वीसी शर्मा और डॉ. सुनील बत्रा ने निभाई। तकनीकी सत्र में डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. देवेंद्र कुमार, प्रो. मेहरूख मिर्जा, प्रो. नागेंद्र यादव, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. मुमताज हुसैन, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. आदर्श पांडेय आदि का योगदान रहा।
शिक्षक वर्ग में डॉ. रिजवाना, नेहा मिश्रा, डॉ. दीपक मिश्र और डॉ. अभिजीत मिश्र तथा शोधार्थी वर्ग में वीरसिंह, अभिषेक बाजपेई, व्याख्या सक्सेना तथा स्वाती शर्मा को उत्कृष्ट शोध पत्र पढ़ने के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन इंद्रप्रीत कौर ने तथा आभार प्रबंध समिति के सचिव रामचंद्र सिंघल ने व्यक्त किया।
दीक्षांत समारोह में साढ़े दस तक पहुंचे छात्र
एसएस कॉलेज में पहली मार्च को होने वाले दीक्षांत समारोह के लिए डिग्री प्राप्त करने वाले एसएस कॉलेज और एसएस विधि महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को सुबह 10.30 बजे तक कालेज पहुंचने को कहा गया है। प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र ने कहा कि साढे़ दस बजे के बाद छात्रों का प्रवेश बंद हो जाएगा। व्यवस्था बनाने रखने के लिए राज्यपाल के हाथों डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र समय से महाविद्यालय पहुंचना सुनिश्चित करें।