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Shahjahanpur News: शहर की गोशालाएं फुल... सड़कों पर घूम रहे गोवंश
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शाहजहांपुर हरदोई हाइवे पर गोवंशीय पशु। संवाद
शाहजहांपुर। गोवंशीय पशुओं को गोशालाओं में संरक्षित करने की व्यवस्था क्षमता के बोझ तले दब गई है। नगर निगम क्षेत्र की तीन प्रमुख गोशालाओं में निर्धारित क्षमता से दो से तीन गुना तक अधिक पशु रखे गए हैं। गोशालाओं में जगह नहीं बचने से अब नए छुट्टा पशुओं को पकड़कर रखने की समस्या खड़ी हो गई है। नतीजतन शहर की सड़कों से लेकर हाईवे तक झुंड में घूमते गोवंशीय पशु वाहन चालकों और राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं।
21 अगस्त को रोजा आईटीआई के पास स्कूटी सवार होमगार्ड की सांड़ से टक्कर हो गई थी, जिसमें उनकी मौत हो गई। इससे पहले 19 जुलाई को रोजा क्षेत्र में बाइक के सामने गोवंशीय पशु आने से होमगार्ड शकील की जान चली गई थी। यही नहीं जिले में पिछले वर्षों में भी सांड़ और छुट्टा पशुओं के हमलों तथा उनसे बचने के दौरान कई लोग जान गंवा चुके हैं या जख्मी हो चुके हैं
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गोशालाओं में क्षमता से अधिक हैं पशु
ककराकलां नंदीशाला में 250 की क्षमता के मुकाबले 725 पशु हैं। मघईटोला की पुरानी कान्हा गोशाला में 230 के मुकाबले 413 और नई कान्हा गोशाला में 140 के मुकाबले 366 पशु रखे गए हैं। क्षमता से अधिक पशु होने के कारण गोशालाओं में जगह का संकट बना हुआ है। साथ ही यहां की व्यवस्थाएं भी अस्त-व्यस्त हैं। ऐसे में सड़कों पर घूम रहे पशु संरक्षित करना मुश्किल हो रहा है।
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रोज 50-60 पशु पकड़ने का दावा
पशु चिकित्सा विभाग का दावा है कि प्रतिदिन औसतन 50 से 60 गोवंशीय पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा रहा है। इसके बावजूद शहर के प्रमुख मार्गों और हाईवे पर पशुओं के झुंड दिखाई दे रहे हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान भारी भीड़ और वाहनों की आवाजाही के बीच सड़कों पर छुट्टा गोवंश की मौजूदगी हादसे का खतरा और बढ़ा रही है।
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जिले में 143 गोशालाएं, 23,500 पशु हैं संरक्षित
जिले में 143 गोशालाओं में करीब 23,500 गोवंशीय पशु संरक्षित हैं। सहभागिता योजना के तहत 7,536 पशु दिए गए हैं। 11 वृहद गोशालाओं का निर्माण चल रहा है, जबकि छह नई वृहद गोशालाओं के निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है। इनके तैयार होने के बाद ही सड़कों पर घूम रहे पशुओं को स्थायी ठौर मिलने की उम्मीद है।
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छुट्टा गोवंश के कारण कुछ प्रमुख घटनाएं
19 अगस्त 2024 : जलालाबाद क्षेत्र के शाहपुर निवासी 50 वर्षीय चरन सिंह की सांड़ के हमले में मौत।
24 दिसंबर 2023 : रैपुरा निवासी साधुराम को छुट्टा पशुओं ने दौड़ाया। तालाब में गिरने से डूबकर हो गई मौत।
23 जनवरी 2023 : कुंडरा में खेत से पशुओं को भगाने के दौरान रीना देवी की मौत।
16 जून 2022 : फर्रुखाबाद-बरेली हाईवे पर खाईखेड़ा के पास सांड़ के हमले में 50 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति की मौत।
16 जनवरी 2020 : फरीदापुर में खेत की रखवाली कर रहे 52 वर्षीय चंद्रपाल को सांड़ ने पटककर मार डाला।
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गोवंशीय पशुओं को पकड़ने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रतिदिन औसतन 50 से 60 पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा रहा है। गोशालाओं में पशुओं की संख्या बढ़ गई है। नई वृहद गोशालाओं का निर्माण तेजी से चल रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में काफी हद तक समस्या का निस्तारण हो जाएगा।
- डॉ. राजेंद्र प्रताप, सीवीओ
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समस्या से निजात पाने के लिए गोवंशीय पशुओं के लिए शहर में जगह चिह्नित करके वृहद गोशाला का निर्माण कराया जाएगा। शहर में पकड़े जाने वाले पशुओं को आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की गोशालाओं में भी भेजा जाएगा।
- सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त
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21 अगस्त को रोजा आईटीआई के पास स्कूटी सवार होमगार्ड की सांड़ से टक्कर हो गई थी, जिसमें उनकी मौत हो गई। इससे पहले 19 जुलाई को रोजा क्षेत्र में बाइक के सामने गोवंशीय पशु आने से होमगार्ड शकील की जान चली गई थी। यही नहीं जिले में पिछले वर्षों में भी सांड़ और छुट्टा पशुओं के हमलों तथा उनसे बचने के दौरान कई लोग जान गंवा चुके हैं या जख्मी हो चुके हैं
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गोशालाओं में क्षमता से अधिक हैं पशु
ककराकलां नंदीशाला में 250 की क्षमता के मुकाबले 725 पशु हैं। मघईटोला की पुरानी कान्हा गोशाला में 230 के मुकाबले 413 और नई कान्हा गोशाला में 140 के मुकाबले 366 पशु रखे गए हैं। क्षमता से अधिक पशु होने के कारण गोशालाओं में जगह का संकट बना हुआ है। साथ ही यहां की व्यवस्थाएं भी अस्त-व्यस्त हैं। ऐसे में सड़कों पर घूम रहे पशु संरक्षित करना मुश्किल हो रहा है।
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रोज 50-60 पशु पकड़ने का दावा
पशु चिकित्सा विभाग का दावा है कि प्रतिदिन औसतन 50 से 60 गोवंशीय पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा रहा है। इसके बावजूद शहर के प्रमुख मार्गों और हाईवे पर पशुओं के झुंड दिखाई दे रहे हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान भारी भीड़ और वाहनों की आवाजाही के बीच सड़कों पर छुट्टा गोवंश की मौजूदगी हादसे का खतरा और बढ़ा रही है।
जिले में 143 गोशालाएं, 23,500 पशु हैं संरक्षित
जिले में 143 गोशालाओं में करीब 23,500 गोवंशीय पशु संरक्षित हैं। सहभागिता योजना के तहत 7,536 पशु दिए गए हैं। 11 वृहद गोशालाओं का निर्माण चल रहा है, जबकि छह नई वृहद गोशालाओं के निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है। इनके तैयार होने के बाद ही सड़कों पर घूम रहे पशुओं को स्थायी ठौर मिलने की उम्मीद है।
छुट्टा गोवंश के कारण कुछ प्रमुख घटनाएं
19 अगस्त 2024 : जलालाबाद क्षेत्र के शाहपुर निवासी 50 वर्षीय चरन सिंह की सांड़ के हमले में मौत।
24 दिसंबर 2023 : रैपुरा निवासी साधुराम को छुट्टा पशुओं ने दौड़ाया। तालाब में गिरने से डूबकर हो गई मौत।
23 जनवरी 2023 : कुंडरा में खेत से पशुओं को भगाने के दौरान रीना देवी की मौत।
16 जून 2022 : फर्रुखाबाद-बरेली हाईवे पर खाईखेड़ा के पास सांड़ के हमले में 50 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति की मौत।
16 जनवरी 2020 : फरीदापुर में खेत की रखवाली कर रहे 52 वर्षीय चंद्रपाल को सांड़ ने पटककर मार डाला।
गोवंशीय पशुओं को पकड़ने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रतिदिन औसतन 50 से 60 पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा रहा है। गोशालाओं में पशुओं की संख्या बढ़ गई है। नई वृहद गोशालाओं का निर्माण तेजी से चल रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में काफी हद तक समस्या का निस्तारण हो जाएगा।
- डॉ. राजेंद्र प्रताप, सीवीओ
समस्या से निजात पाने के लिए गोवंशीय पशुओं के लिए शहर में जगह चिह्नित करके वृहद गोशाला का निर्माण कराया जाएगा। शहर में पकड़े जाने वाले पशुओं को आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की गोशालाओं में भी भेजा जाएगा।
- सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त

शाहजहांपुर हरदोई हाइवे पर गोवंशीय पशु। संवाद

शाहजहांपुर हरदोई हाइवे पर गोवंशीय पशु। संवाद