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दसवीं में अच्छे अंकों से पास हुए तो चहक उठे बच्चे
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शाहजहांपुर। सीबीएसई की दसवीं कक्षा का परिणाम गत परीक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर मंगलवार को घोषित कर दिया गया। घोषित परिणाम के अनुसार सभी छात्र-छात्राएं परीक्षा दिए बगैर पास हो गए। यही नहीं, तमाम मेधावी विद्यार्थियों ने 99 फीसदी से ज्यादा प्राप्तांक हासिल किए। वेबसाइट पर परीक्षा परिणाम देखते ही छात्र-छात्राएं खुशी से चहकते हुए अपने स्कूल पहुंचे और अपने शिक्षकों का आशीर्वाद लेकर सामूहिक तौर से खुशी मनाई। बातचीत में उन्होंने भविष्य के इरादे जाहिर करते हुए डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा जताई।
सीबीएसई से संचालित जिले की 30 शिक्षण संस्थाओं में इस वर्ष दसवीं की परीक्षा के लिए 3042 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। कोरोना के प्रकोप को देखते हुए शासन की कोविड गाइडलाइन के तहत पूरे शैक्षिक सत्र में नाम-मात्र को कक्षाएं लगीं और बाद में स्कूल-कॉलेज अनिश्चितकाल को बंद कर दिए गए। इसके बावजूद छात्र-छात्राओं ने ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखी। इस बीच, शासन ने पिछली परीक्षा के आधार पर दसवीं के विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का निर्णय किया। पहले आईसीएसई बोर्ड के परीक्षा परिणाम इसी पद्धति से घोषित हुए। बीते शुक्रवार को सीबीएसई बोर्ड की 12वीं कक्षा के परिणाम भी गत परीक्षा के प्राप्तांक के आधार पर घोषित हुए। अब दसवीं क्लास की परीक्षा में अंक निर्धारण भी पिछली परीक्षा के प्राप्तांक औसत के आधार पर किया गया।
मंगलवार को परिणाम घोषित होने की जानकारी होने के कारण तमाम छात्र-छात्राएं सुबह से अपने स्कूल पहुंचने लगे। इनमें ज्यादातर वे मेधावी छात्र-छात्राएं थे, जिन्हें अपने स्कूल में सर्वोच्च स्थान मिलने की उम्मीद थी। ऐसे ज्यादातर विद्यार्थियों ने 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए, लेकिन उनका कहना है कि अगर परीक्षा देने का मौका मिलता तो उन्हें ज्यादा प्राप्तांक मिलते क्योंकि पिछली परीक्षा की तुलना में इस बार उन्होंने ज्यादा तैयारी की थी। स्कूलों में शिक्षकों ने विद्यार्थियों को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
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मेधावियों की बात : उन्हीं की जुबानी
मैंने इस वर्ष परीक्षा की बहुत मन से तैयारी की थी, लेकिन बीच में कई कारणों से पढ़ाई में व्यवधान पड़ा। इसलिए अच्छा रहा कि परीक्षा नहीं हुई। परीक्षा दिए बगैर मुझे 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त हो गए। परीक्षा होती तो इतने नंबर लाना मेरे लिए मुश्किल होता। मैं भी अपने पापा-मम्मी की तरह भविष्य में डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहा हूं।
-आरुष गुप्ता, तक्षशिला पब्लिक स्कूल
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मेरे 99.4 प्रतिशत अंक आए हैं, लेकिन इस बार परीक्षा नहीं होने का मुझे बहुत अफसोस है। परीक्षा देने का मौका मिलता तो शायद इससे ज्यादा नंबर मिल जाते। जो कमी रह गई, उसकी भरपाई 12वीं की परीक्षा में पूरी करूंगी। मैं अपने परिवार की इच्छा के अनुसार भविष्य में इंजीनियर बनना चाहती हूं।
-वानी कौशल, तक्षशिला पब्लिक स्कूल
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इस वर्ष शुरू से ऑनलाइन पढ़ाई इस तैयारी के साथ की थी कि स्कूल में टॉप पोजीशन मिले। मेरे 99 प्रतिशत अंक आए हैं, लेकिन अगर परीक्षा देने का मौका मिलता तो प्राप्तांक 99.5 प्रतिशत मिलने की पूरी उम्मीद थी। कोरोना के हालात से समझौता तो करना ही पड़ेगा। 12वीं पास करके जेईई की परीक्षा पास करने का लक्ष्य तय किया है।
-कार्तिकेय रस्तोगी, तक्षशिला पब्लिक स्कूल
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मुझे खुशी है कि स्कूल में सबसे ज्यादा 94 फीसदी नंबर मुझे मिले हैं, लेकिन परीक्षा नहीं दे सकने का अफसोस है। परीक्षा देने का मौका मिलता तो लगता है कि मुझे ज्यादा प्राप्तांक मिलते। मेरे पापा व्यवसायी हैं, लेकिन मैं एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर देश की सुरक्षा में अपना भविष्य बनाना चाहता हूं और उसी के अनुरूप तैयारी कर रहा हूं।
-सृजन मिश्रा, जीएल कनौजिया इंटर कॉलेज
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मेरा छोटा भाई कक्षा सात में है, लेकिन पढ़ाई के मामले मेें उससे प्रतिस्पर्धा करने का प्रयास करता हूं क्योंकि वह भी पढ़ने में बहुत तेज है। मुझे 93.4 प्रतिशत अंक मिले जो मेरी उम्मीद से कम हैं। मेरे पापा शिक्षा मित्र होने के कारण मेरी पढ़ाई पर बहुत ध्यान देते हैं। मैं एनडीए की तैयारी कर रहा हूं। कोशिश है कि पहले ही प्रयास में प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर सकूं।
-उज्जवल मिश्रा, जीएल कनौजिया इंटर कॉलेज
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मैं ग्रामीण पृष्ठभूमि से हूं और पापा खेती की देखभाल करने के साथ व्यवसाय संभालते हैं। परीक्षा देने का मौका मिलता तो नंबर ज्यादा अच्छे मिलते। मुझे 92.8 प्रतिशत प्राप्तांक मिले हैं और इतने नंबरों से संतोष करना मजबूरी है। मैं अपनी पढ़ाई इस हिसाब से कर रहा हूं कि खुद को इंजीनियर या फिर प्रशासनिक अधिकारी बना सकूं।
-अभय सिंह चौहान, जीएल कनौजिया इंटर कॉलेज
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पढ़ाई में कड़ा परिश्रम करने की प्रेरणा मुझे अपने शिक्षक पिता से मिलती है। उनके उत्साहवर्धन और शिक्षकों के मार्गदर्शन से मुझे दसवीं क्लास में 99.2 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। अब आगे की पढ़ाई और अधिक मेहनत से करनी है क्योंकि आगे चलकर मैं प्रोफेसर बनना चाहती हूं।
-सिद्धिका अग्रवाल, श्री शंकर मुमुक्ष विद्यापीठ
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मैने शुरू से अच्छे नंबर लाने के लिए पढ़ाई पर बहुत मेहनत की, लेकिन परीक्षा देने का मौका ही नहीं मिला। बगैर परीक्षा दिए 98.8 प्रतिशत नंबर मिले हैं, लेकिन परीक्षा देने का मौका मिलता तो मेरे नंबर बढ़ सकते थे। अब अपने पापा-मम्मी की इच्छा पूरी करने के लिए 12वीं में अच्छे नंबर लाने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगी क्योंकि मुझे चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना है।
-शीतल अग्रवाल, श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ
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परीक्षा देने के हिसाब से मैंने इस बार खूब पढ़ाई की थी, लेकिन पेपर देने का मौका ही नहीं मिला। मुझे 97.8 प्रतिशत अंक मिले हैं जबकि परीक्षा होने पर मुझे 98 से 99 प्रतिशत तक प्राप्तांक मिलने की उम्मीद थी। भविष्य को लेकर पापा-मम्मी का मुझ पर कोई दबाव नहीं है, लेकिन मैं प्रशासनिक सेवा में अपना कॅरियर बनाना चाहती हूं।
-अदिति मिश्रा, श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ
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सीबीएसई की दसवीं कक्षा का परिणाम मंगलवार को घोषित हो गया। खुशी की बात है कि जनपद के किसी भी स्कूल का कोई विद्यार्थी परीक्षा में अनुत्तीर्ण नहीं हुआ। पिछली परीक्षा की मेरिट के आधार प्राप्तांकों का निर्धारण किए जाने से किसी भी बच्चे का वर्ष खराब नहीं हुआ और इससे उन्हें आगे मेहनत से पढ़ाई करने की प्रेरणा मिलेगी।
-राजीव कुमार पांडेय, जिला को-आर्डिनेटर, सीबीएसई
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सीबीएसई से संचालित जिले की 30 शिक्षण संस्थाओं में इस वर्ष दसवीं की परीक्षा के लिए 3042 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। कोरोना के प्रकोप को देखते हुए शासन की कोविड गाइडलाइन के तहत पूरे शैक्षिक सत्र में नाम-मात्र को कक्षाएं लगीं और बाद में स्कूल-कॉलेज अनिश्चितकाल को बंद कर दिए गए। इसके बावजूद छात्र-छात्राओं ने ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखी। इस बीच, शासन ने पिछली परीक्षा के आधार पर दसवीं के विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का निर्णय किया। पहले आईसीएसई बोर्ड के परीक्षा परिणाम इसी पद्धति से घोषित हुए। बीते शुक्रवार को सीबीएसई बोर्ड की 12वीं कक्षा के परिणाम भी गत परीक्षा के प्राप्तांक के आधार पर घोषित हुए। अब दसवीं क्लास की परीक्षा में अंक निर्धारण भी पिछली परीक्षा के प्राप्तांक औसत के आधार पर किया गया।
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मंगलवार को परिणाम घोषित होने की जानकारी होने के कारण तमाम छात्र-छात्राएं सुबह से अपने स्कूल पहुंचने लगे। इनमें ज्यादातर वे मेधावी छात्र-छात्राएं थे, जिन्हें अपने स्कूल में सर्वोच्च स्थान मिलने की उम्मीद थी। ऐसे ज्यादातर विद्यार्थियों ने 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए, लेकिन उनका कहना है कि अगर परीक्षा देने का मौका मिलता तो उन्हें ज्यादा प्राप्तांक मिलते क्योंकि पिछली परीक्षा की तुलना में इस बार उन्होंने ज्यादा तैयारी की थी। स्कूलों में शिक्षकों ने विद्यार्थियों को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
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मेधावियों की बात : उन्हीं की जुबानी
मैंने इस वर्ष परीक्षा की बहुत मन से तैयारी की थी, लेकिन बीच में कई कारणों से पढ़ाई में व्यवधान पड़ा। इसलिए अच्छा रहा कि परीक्षा नहीं हुई। परीक्षा दिए बगैर मुझे 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त हो गए। परीक्षा होती तो इतने नंबर लाना मेरे लिए मुश्किल होता। मैं भी अपने पापा-मम्मी की तरह भविष्य में डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहा हूं।
-आरुष गुप्ता, तक्षशिला पब्लिक स्कूल
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मेरे 99.4 प्रतिशत अंक आए हैं, लेकिन इस बार परीक्षा नहीं होने का मुझे बहुत अफसोस है। परीक्षा देने का मौका मिलता तो शायद इससे ज्यादा नंबर मिल जाते। जो कमी रह गई, उसकी भरपाई 12वीं की परीक्षा में पूरी करूंगी। मैं अपने परिवार की इच्छा के अनुसार भविष्य में इंजीनियर बनना चाहती हूं।
-वानी कौशल, तक्षशिला पब्लिक स्कूल
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इस वर्ष शुरू से ऑनलाइन पढ़ाई इस तैयारी के साथ की थी कि स्कूल में टॉप पोजीशन मिले। मेरे 99 प्रतिशत अंक आए हैं, लेकिन अगर परीक्षा देने का मौका मिलता तो प्राप्तांक 99.5 प्रतिशत मिलने की पूरी उम्मीद थी। कोरोना के हालात से समझौता तो करना ही पड़ेगा। 12वीं पास करके जेईई की परीक्षा पास करने का लक्ष्य तय किया है।
-कार्तिकेय रस्तोगी, तक्षशिला पब्लिक स्कूल
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मुझे खुशी है कि स्कूल में सबसे ज्यादा 94 फीसदी नंबर मुझे मिले हैं, लेकिन परीक्षा नहीं दे सकने का अफसोस है। परीक्षा देने का मौका मिलता तो लगता है कि मुझे ज्यादा प्राप्तांक मिलते। मेरे पापा व्यवसायी हैं, लेकिन मैं एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर देश की सुरक्षा में अपना भविष्य बनाना चाहता हूं और उसी के अनुरूप तैयारी कर रहा हूं।
-सृजन मिश्रा, जीएल कनौजिया इंटर कॉलेज
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मेरा छोटा भाई कक्षा सात में है, लेकिन पढ़ाई के मामले मेें उससे प्रतिस्पर्धा करने का प्रयास करता हूं क्योंकि वह भी पढ़ने में बहुत तेज है। मुझे 93.4 प्रतिशत अंक मिले जो मेरी उम्मीद से कम हैं। मेरे पापा शिक्षा मित्र होने के कारण मेरी पढ़ाई पर बहुत ध्यान देते हैं। मैं एनडीए की तैयारी कर रहा हूं। कोशिश है कि पहले ही प्रयास में प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर सकूं।
-उज्जवल मिश्रा, जीएल कनौजिया इंटर कॉलेज
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मैं ग्रामीण पृष्ठभूमि से हूं और पापा खेती की देखभाल करने के साथ व्यवसाय संभालते हैं। परीक्षा देने का मौका मिलता तो नंबर ज्यादा अच्छे मिलते। मुझे 92.8 प्रतिशत प्राप्तांक मिले हैं और इतने नंबरों से संतोष करना मजबूरी है। मैं अपनी पढ़ाई इस हिसाब से कर रहा हूं कि खुद को इंजीनियर या फिर प्रशासनिक अधिकारी बना सकूं।
-अभय सिंह चौहान, जीएल कनौजिया इंटर कॉलेज
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पढ़ाई में कड़ा परिश्रम करने की प्रेरणा मुझे अपने शिक्षक पिता से मिलती है। उनके उत्साहवर्धन और शिक्षकों के मार्गदर्शन से मुझे दसवीं क्लास में 99.2 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। अब आगे की पढ़ाई और अधिक मेहनत से करनी है क्योंकि आगे चलकर मैं प्रोफेसर बनना चाहती हूं।
-सिद्धिका अग्रवाल, श्री शंकर मुमुक्ष विद्यापीठ
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मैने शुरू से अच्छे नंबर लाने के लिए पढ़ाई पर बहुत मेहनत की, लेकिन परीक्षा देने का मौका ही नहीं मिला। बगैर परीक्षा दिए 98.8 प्रतिशत नंबर मिले हैं, लेकिन परीक्षा देने का मौका मिलता तो मेरे नंबर बढ़ सकते थे। अब अपने पापा-मम्मी की इच्छा पूरी करने के लिए 12वीं में अच्छे नंबर लाने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगी क्योंकि मुझे चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना है।
-शीतल अग्रवाल, श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ
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परीक्षा देने के हिसाब से मैंने इस बार खूब पढ़ाई की थी, लेकिन पेपर देने का मौका ही नहीं मिला। मुझे 97.8 प्रतिशत अंक मिले हैं जबकि परीक्षा होने पर मुझे 98 से 99 प्रतिशत तक प्राप्तांक मिलने की उम्मीद थी। भविष्य को लेकर पापा-मम्मी का मुझ पर कोई दबाव नहीं है, लेकिन मैं प्रशासनिक सेवा में अपना कॅरियर बनाना चाहती हूं।
-अदिति मिश्रा, श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ
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सीबीएसई की दसवीं कक्षा का परिणाम मंगलवार को घोषित हो गया। खुशी की बात है कि जनपद के किसी भी स्कूल का कोई विद्यार्थी परीक्षा में अनुत्तीर्ण नहीं हुआ। पिछली परीक्षा की मेरिट के आधार प्राप्तांकों का निर्धारण किए जाने से किसी भी बच्चे का वर्ष खराब नहीं हुआ और इससे उन्हें आगे मेहनत से पढ़ाई करने की प्रेरणा मिलेगी।
-राजीव कुमार पांडेय, जिला को-आर्डिनेटर, सीबीएसई