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कटराः मामूली अंतर से चूके राजेश यादव, दोबारा विधायक बने वीरविक्रम
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मीरानपुर कटरा के विजेता भाजपा प्रत्याशी वीर विक्रम सिंह।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। सबसे ज्यादा रोमांचक लड़ाई कटरा विधानसभा में देखने को मिली। अंतिम राउंड तक चले मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी वीर विक्रम सिंह ने सपा प्रत्याशी राजेश यादव को महज 357 वोटों से मात दे दी। कटरा में 14 फरवरी को हुए मतदान में 57.46 प्रतिशत लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। इस क्षेत्र में 109929 पुरुषों, 84604 महिलाओं और तीन अन्य ट्रांसजेंडर ने मतदान किया। इस तरह मतदान करने वालों में 59.25 प्रतिशत पुरुष और 55.31 प्रतिशत महिलाएं शामिल रहीं। कटरा विधानसभा में अब तक तीन चुनाव हुए हैं।
2012 के चुनाव में सपा प्रत्याशी राजेश यादव ने महज 875 वोटों से बसपा प्रत्याशी राजीव कश्यप को हराया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी वीरविक्रम सिंह ने सपा प्रत्याशी राजेश यादव को 16, 730 वोटों से हरा दिया। इस बार राजेश यादव काफी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में थे। भाजपा ने एक बार फिर से वीर विक्रम पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा था।
दोनों के बीच सभी को कड़े मुकाबले की उम्मीद थी। ऐसा हुआ भी। अंतिम राउंड की मतगणना तक यह साफ नहीं हो सका था कि ऊंट किस करवट बैठेगा। हालांकि भाजपा प्रत्याशी वीर विक्रम सिंह शुरुआती राउंड में तकरीबन पांच हजार वोटों की बढ़त बनाकर चल रहे थे। मगर 20वें राउंड के बाद अंतर कम होता चला गया। जब रिजल्ट आया तो सपा प्रत्याशी राजेश यादव महज 357 वोटों से चुनाव हार गए थे।
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भाजपा की लहर में चढ़कर जीते वीरविक्रम
सर्वाधिक युवा विधायक वीरविक्रम सिंह जब पिछली बार चुनावी मैदान में थे तो नए थे। मगर पांच सालों में सत्ताधारी विधायक रहकर अनुभवी हो चुके हैं। शुरुआत में माना जा रहा था कि सत्ताविरोधी लहर का उन्हें नुकसान होगा। मगर परौर और खुदागंज में उनके पक्ष में भारी मतदान हुआ था। पिता वीरेंद्रपाल सिंह उर्फ मुन्ना ने अनुभवी सारथी की भूमिका निभाई थी। ठाकुर बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने भी ठाकुर बिरादरी के मुन्ना सिंह को उतारा था। मुन्ना सिंह 17504 वोट पाए। इसके बावजूद वीरविक्रम सिंह ने जीत हासिल की।
तमाम तैयारियां धरी रह गईं
राजेश यादव इससे पहले दो बार विधायक रह चुके हैं। 2017 में हार के बावजूद वह पूरी तरह से क्षेत्र में सक्रिय थे। सपा भी कटरा विधानसभा को अपनी सबसे मजबूत सीट मानकर चल रही थी। राजेश यादव को सपा के वोट बैंक के साथ ही सभी समाज के लोगों का समर्थन मिल रहा था। ऐसे में माना जा रहा था कि वह कड़ी टक्कर देंगे। मुकाबला कड़ा हुआ लेकिन अंतिम परिणाम राजेश यादव के विपक्ष में चला गया।
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2012 के चुनाव में सपा प्रत्याशी राजेश यादव ने महज 875 वोटों से बसपा प्रत्याशी राजीव कश्यप को हराया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी वीरविक्रम सिंह ने सपा प्रत्याशी राजेश यादव को 16, 730 वोटों से हरा दिया। इस बार राजेश यादव काफी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में थे। भाजपा ने एक बार फिर से वीर विक्रम पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा था।
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दोनों के बीच सभी को कड़े मुकाबले की उम्मीद थी। ऐसा हुआ भी। अंतिम राउंड की मतगणना तक यह साफ नहीं हो सका था कि ऊंट किस करवट बैठेगा। हालांकि भाजपा प्रत्याशी वीर विक्रम सिंह शुरुआती राउंड में तकरीबन पांच हजार वोटों की बढ़त बनाकर चल रहे थे। मगर 20वें राउंड के बाद अंतर कम होता चला गया। जब रिजल्ट आया तो सपा प्रत्याशी राजेश यादव महज 357 वोटों से चुनाव हार गए थे।
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भाजपा की लहर में चढ़कर जीते वीरविक्रम
सर्वाधिक युवा विधायक वीरविक्रम सिंह जब पिछली बार चुनावी मैदान में थे तो नए थे। मगर पांच सालों में सत्ताधारी विधायक रहकर अनुभवी हो चुके हैं। शुरुआत में माना जा रहा था कि सत्ताविरोधी लहर का उन्हें नुकसान होगा। मगर परौर और खुदागंज में उनके पक्ष में भारी मतदान हुआ था। पिता वीरेंद्रपाल सिंह उर्फ मुन्ना ने अनुभवी सारथी की भूमिका निभाई थी। ठाकुर बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने भी ठाकुर बिरादरी के मुन्ना सिंह को उतारा था। मुन्ना सिंह 17504 वोट पाए। इसके बावजूद वीरविक्रम सिंह ने जीत हासिल की।
तमाम तैयारियां धरी रह गईं
राजेश यादव इससे पहले दो बार विधायक रह चुके हैं। 2017 में हार के बावजूद वह पूरी तरह से क्षेत्र में सक्रिय थे। सपा भी कटरा विधानसभा को अपनी सबसे मजबूत सीट मानकर चल रही थी। राजेश यादव को सपा के वोट बैंक के साथ ही सभी समाज के लोगों का समर्थन मिल रहा था। ऐसे में माना जा रहा था कि वह कड़ी टक्कर देंगे। मुकाबला कड़ा हुआ लेकिन अंतिम परिणाम राजेश यादव के विपक्ष में चला गया।