{"_id":"612e84bf8ebc3ec5ed0ab0ff","slug":"protest-for-house-shahjahanpur-news-bly458123376","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेघर ग्रामीण ने परिवार सहित धरना देकर मांगा आवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेघर ग्रामीण ने परिवार सहित धरना देकर मांगा आवास
विज्ञापन
शाहजहांपुर के कलक्ट्रेट में आवास की मांग को लेकर परिवार सहित धरना पर बैठा मदनापुर क्षेत्र के रक्?
- फोटो : SHAHJAHANPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। सबके लिए आवास थीम को लेकर बीते दिन प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर जिला मुख्यालयों तक प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लाभार्थियों को आवास के प्रमाण पत्र देने के साथ उनके खातों में पहली किश्त भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के तमाम बेघर लोग आवास पाने को तरस रहे हैं। ऐसे लोगों में शामिल मदनापुर क्षेत्र के गांव पहुरा हार मरौरा निवासी रक्षपाल मौर्य ने मंगलवार को कलक्ट्रेट में परिवार सहित धरना देकर अधिकारियों से आवास दिलाने की गुहार लगाई।
धरना में रक्षपाल की पत्नी रीना देवी और उनके दो अबोध बच्चे भी शामिल रहे। रक्षपाल ने सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार को डीएम के नाम संबोधित ज्ञापन देकर बताया कि उनकी पत्नी के नाम वर्ष 2010 में आवास स्वीकृत किया था। उस वक्त पत्नी का नाम आवास लाभार्थी सूची में 10वें क्रमांक पर था। पंचायत सचिव ने आवास दिलाने के लिए उनकी जमीन के फोटो लिए और आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा कराई। इसके बावजूद आवास बनाने को धनराशि नहीं मिली जबकि अन्य कई लोगों को आवास दिए गए।
रक्षपाल के अनुसार ग्राम विकास अधिकारी शिव सिंह से संपर्क करने पर बताया कि उनका नाम लाभार्थी सूची में सातवें क्रमांक पर आ गया है। सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदन करने पर प्राप्त कराई गई वर्ष 2021 की लाभार्थी सूची में भी नाम शामिल है, लेकिन तीन बार जांच होने पर भी आवास स्वीकृत नहीं हो सका। उन्होंने लाभार्थी सूची में बार-बार क्रमांक बदलने की जांच कराकर आवास स्वीकृत कराने का अनुरोध किया। सिटी मजिस्ट्रेट ने संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर आवश्यक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
धरना में रक्षपाल की पत्नी रीना देवी और उनके दो अबोध बच्चे भी शामिल रहे। रक्षपाल ने सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार को डीएम के नाम संबोधित ज्ञापन देकर बताया कि उनकी पत्नी के नाम वर्ष 2010 में आवास स्वीकृत किया था। उस वक्त पत्नी का नाम आवास लाभार्थी सूची में 10वें क्रमांक पर था। पंचायत सचिव ने आवास दिलाने के लिए उनकी जमीन के फोटो लिए और आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा कराई। इसके बावजूद आवास बनाने को धनराशि नहीं मिली जबकि अन्य कई लोगों को आवास दिए गए।
विज्ञापन
रक्षपाल के अनुसार ग्राम विकास अधिकारी शिव सिंह से संपर्क करने पर बताया कि उनका नाम लाभार्थी सूची में सातवें क्रमांक पर आ गया है। सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदन करने पर प्राप्त कराई गई वर्ष 2021 की लाभार्थी सूची में भी नाम शामिल है, लेकिन तीन बार जांच होने पर भी आवास स्वीकृत नहीं हो सका। उन्होंने लाभार्थी सूची में बार-बार क्रमांक बदलने की जांच कराकर आवास स्वीकृत कराने का अनुरोध किया। सिटी मजिस्ट्रेट ने संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर आवश्यक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन