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Shahjahanpur News: विदेश से फंडिंग की आशंका...15 वर्षों से धर्मांतरण का नेटवर्क चला रहे थे आरोपी
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शाहजहांपुर। सिंधौली में धर्मांतरण कराने के आरोप में पकड़े गए तीन आरोपियों को पुलिस रिमांड में लेकर पूछताछ करेगी। आरोपी करीब 15 वर्षों से प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों को वरगलाकर धर्मांतरण करा रहे थे। अब तक कितने लोगों का धर्मांतरण किया गया, यह पूछताछ में सामने आएगा। पुलिस फंडिंग करने वाली तमिलनाडु की संस्था के संबंध में जानकारी जुटा रही है कि उसने किन संस्थाओं को आर्थिक मदद भेजी है। पुलिस का मानना है कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में संस्था फंडिंग कर धर्मांतरण का खेल कराती थी।
किरन जोसुआ और उसका पति पद्मनाभन उर्फ पास्टर जोसुआ सन 2010 से सदर बाजार के चिनौर में रहकर अपने साथी असनीत मसीह के साथ प्रार्थना सभा का आयोजन कर रहे थे। जून 2024 से ये लोग सिंधौली में मकान बनाकर प्रार्थना सभा की आड़ में लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करा रहे थे।
इसके संबंध में चिनौर, सिंधौली आदि स्थानों पर रहे वाले स्थानीय लोगों ने पुलिस को साक्ष्य दिए हैं। जिन लोगों को प्रार्थना सभा में बुलाया जाता था, उनको इतनी सफाई से वरगलाया जाता था कि वे ईसाई धर्म अपनाने के बाद भी स्पष्ट तौर पर अन्य लोगों के सामने यह बात स्वीकार नहीं करते थे।
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पुलिस को विवेचना के दौरान ऐसे व्यक्तियों के पड़ोसियों से जानकारी मिली कि वे लोग अपनी पूजा पद्धति छोड़कर ईसाई धर्म मानने लगे थे। नियमित तौर पर रविवार या दिन विशेष को प्रार्थना सभा में शामिल होते थे। पुलिस का यह भी मानना है कि प्रार्थना सभा में जाने पर उनको कुछ रुपये नकद दिए जाते थे। अधिकतर लोग गरीब घरों से होने के कारण रुपये के लालच में भी प्रार्थना सभा में शामिल होते थे।
जब पुलिस ने सिंधौली स्थित मकान पर छापा मारा था तो वहां बाइबिल व अन्य साहित्य मिला था। इसके आधार पर प्रार्थना सभा की आड़ में सीधे-साधे, गरीब, अनपढ़ लोगों को भ्रमित किया जाता था। तीनों आरोपी प्रार्थना सभा में आने वाले व्यक्तियों को बीमारी, मानसिक चिंता व गृह क्लेश ठीक कराने, बांझ दंपतियों को औलाद प्राप्ति का झांसा देते थे।
साथ ही जरूरतमंद और गरीब लोगों को कपड़ा, राशन और कुछ नकद धनराशि का प्रलोभन देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित कराते थे। पुलिस को तीनों आरोपियों के फोन कॉल रिकॉर्ड से धर्म परिवर्तन करने और कराने वाले व्यक्तियों के आपस में बातचीत के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगाें के बारे में भी जानकारी कर रही है।
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पूरे जिले में फैला नेटवर्क, पुलिस करेगी जांच
ईसाई मिशनरियों का नेटवर्क पूरे जिले में फैला हुआ है। प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए वरगलाया जाता है। 20 जुलाई को ही सिंधौली के गांव कटिया बुजुर्ग में प्रार्थना सभा के दौरान धर्मांतरण कराने की सूचना पर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर हंगामा किया था।
पुलिस ने मकान मालिक दंपती अजय व पूजा समेत चार लोगों का शांतिभंग में चालान किया था। दंपती ने 2012 में दिल्ली में ईसाई धर्म अपनाया था। आरसी मिशन थाना क्षेत्र की आनंद विहार काॅलोनी में 19 जुलाई को धर्मांतरण के विरोध में ईंट-पत्थर चले थे। मामले में मोहल्ला अहमदपुरा निवासी शिवम ने अज्ञात महिला और पुरुष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जांच में आनंद बिहार काॅलोनी निवासी एंजल और उसके पति विवेक के नाम प्रकाश में आए थे। यहां पर तीन लाख रुपये देकर धर्मांतरण कराए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस इस मामले में भी आरोपियों की बैंक डिटेल पता कर रही है। पिछले वर्ष क्रिसमस पर जैतीपुर में गैर जनपद के व्यक्ति ने वृहद स्तर पर भोज का आयोजन कराया था।
इसमें कई जिलों के लोग शामिल होने आए थे। ग्रामीणों की आपत्ति पर पुलिस ने कार्यक्रम रुकवा दिया था। वर्तमान में सिकंदरपुर गांव में एक परिवार प्रार्थना सभा का आयोजन करा रहा है। इससे पहले शहर की आवास विकास कॉलोनी में प्रार्थना सभा कराए जाने पर हिंदू संगठनों ने हंगामा किया था।
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संस्था की बैंक डिटेल से सामने आएगी हकीकत
तमिलनाडु की संस्था जीसस रिडिमस मिशनरी के बैंक खाते की पूरी डिटेल मिलने का पुलिस इंतजार कर रही है। जिस तरह से खाते को चार करोड़ 60 लाख रुपये से खोला गया, उससे विदेश से फंडिंग होने की आशंका जताई जा रही है। संस्था के खाते में अब केवल 16 लाख रुपये रह गए हैं। ऐसे में चार करोड़ 44 लाख रुपये किन संस्थाओं को दिए गए, इसकी जांच की जाएगी। पुलिस का मानना है कि ये रुपये धर्मांतरण कराने वालीं संस्थाओं को दिए गए हैं। खाते की पूरी डिटेल सामने आने पर उन संस्थाओं के बारे में जानकारी हो सकेगी। इसके बाद उन संस्थाओं पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
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स्लीपर सेल की तरह नेटवर्क
मिशनरी की फंडिंग से धर्मांतरण का नेटवर्क चलाए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने पूरे जिले में संदिग्ध गतिविधियों वाली प्रार्थना सभाओं की निगरानी शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि धर्म परिवर्तन कराने वाले लोग स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं। धर्मांतरण का काम दिखाकर मिशनरियों से रुपये लेते हैं। इनमें से कुछ रुपये धर्मांतरण कराने पर खर्च करते हैं। जिले में एक हफ्ते में प्रार्थना सभा कराने के तीन मामले सामने आए हैं। ऐसे में पुलिस इस तथ्य पर भी जांच कर रही है कि इन तीनों या इनके जैसे अन्य लोग आपस में जुड़े हुए तो नहीं हैं। सभी की कॉल डिटेल चेक की जा रही है।
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गिरफ्तार तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। उन्हें रिमांड में लेकर पूछताछ की जाएगी। फंडिंग करने वाली संस्था की बैंक डिटेल आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश द्विवेदी, एसपी
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किरन जोसुआ और उसका पति पद्मनाभन उर्फ पास्टर जोसुआ सन 2010 से सदर बाजार के चिनौर में रहकर अपने साथी असनीत मसीह के साथ प्रार्थना सभा का आयोजन कर रहे थे। जून 2024 से ये लोग सिंधौली में मकान बनाकर प्रार्थना सभा की आड़ में लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करा रहे थे।
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इसके संबंध में चिनौर, सिंधौली आदि स्थानों पर रहे वाले स्थानीय लोगों ने पुलिस को साक्ष्य दिए हैं। जिन लोगों को प्रार्थना सभा में बुलाया जाता था, उनको इतनी सफाई से वरगलाया जाता था कि वे ईसाई धर्म अपनाने के बाद भी स्पष्ट तौर पर अन्य लोगों के सामने यह बात स्वीकार नहीं करते थे।
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पुलिस को विवेचना के दौरान ऐसे व्यक्तियों के पड़ोसियों से जानकारी मिली कि वे लोग अपनी पूजा पद्धति छोड़कर ईसाई धर्म मानने लगे थे। नियमित तौर पर रविवार या दिन विशेष को प्रार्थना सभा में शामिल होते थे। पुलिस का यह भी मानना है कि प्रार्थना सभा में जाने पर उनको कुछ रुपये नकद दिए जाते थे। अधिकतर लोग गरीब घरों से होने के कारण रुपये के लालच में भी प्रार्थना सभा में शामिल होते थे।
जब पुलिस ने सिंधौली स्थित मकान पर छापा मारा था तो वहां बाइबिल व अन्य साहित्य मिला था। इसके आधार पर प्रार्थना सभा की आड़ में सीधे-साधे, गरीब, अनपढ़ लोगों को भ्रमित किया जाता था। तीनों आरोपी प्रार्थना सभा में आने वाले व्यक्तियों को बीमारी, मानसिक चिंता व गृह क्लेश ठीक कराने, बांझ दंपतियों को औलाद प्राप्ति का झांसा देते थे।
साथ ही जरूरतमंद और गरीब लोगों को कपड़ा, राशन और कुछ नकद धनराशि का प्रलोभन देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित कराते थे। पुलिस को तीनों आरोपियों के फोन कॉल रिकॉर्ड से धर्म परिवर्तन करने और कराने वाले व्यक्तियों के आपस में बातचीत के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगाें के बारे में भी जानकारी कर रही है।
पूरे जिले में फैला नेटवर्क, पुलिस करेगी जांच
ईसाई मिशनरियों का नेटवर्क पूरे जिले में फैला हुआ है। प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए वरगलाया जाता है। 20 जुलाई को ही सिंधौली के गांव कटिया बुजुर्ग में प्रार्थना सभा के दौरान धर्मांतरण कराने की सूचना पर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर हंगामा किया था।
पुलिस ने मकान मालिक दंपती अजय व पूजा समेत चार लोगों का शांतिभंग में चालान किया था। दंपती ने 2012 में दिल्ली में ईसाई धर्म अपनाया था। आरसी मिशन थाना क्षेत्र की आनंद विहार काॅलोनी में 19 जुलाई को धर्मांतरण के विरोध में ईंट-पत्थर चले थे। मामले में मोहल्ला अहमदपुरा निवासी शिवम ने अज्ञात महिला और पुरुष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जांच में आनंद बिहार काॅलोनी निवासी एंजल और उसके पति विवेक के नाम प्रकाश में आए थे। यहां पर तीन लाख रुपये देकर धर्मांतरण कराए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस इस मामले में भी आरोपियों की बैंक डिटेल पता कर रही है। पिछले वर्ष क्रिसमस पर जैतीपुर में गैर जनपद के व्यक्ति ने वृहद स्तर पर भोज का आयोजन कराया था।
इसमें कई जिलों के लोग शामिल होने आए थे। ग्रामीणों की आपत्ति पर पुलिस ने कार्यक्रम रुकवा दिया था। वर्तमान में सिकंदरपुर गांव में एक परिवार प्रार्थना सभा का आयोजन करा रहा है। इससे पहले शहर की आवास विकास कॉलोनी में प्रार्थना सभा कराए जाने पर हिंदू संगठनों ने हंगामा किया था।
संस्था की बैंक डिटेल से सामने आएगी हकीकत
तमिलनाडु की संस्था जीसस रिडिमस मिशनरी के बैंक खाते की पूरी डिटेल मिलने का पुलिस इंतजार कर रही है। जिस तरह से खाते को चार करोड़ 60 लाख रुपये से खोला गया, उससे विदेश से फंडिंग होने की आशंका जताई जा रही है। संस्था के खाते में अब केवल 16 लाख रुपये रह गए हैं। ऐसे में चार करोड़ 44 लाख रुपये किन संस्थाओं को दिए गए, इसकी जांच की जाएगी। पुलिस का मानना है कि ये रुपये धर्मांतरण कराने वालीं संस्थाओं को दिए गए हैं। खाते की पूरी डिटेल सामने आने पर उन संस्थाओं के बारे में जानकारी हो सकेगी। इसके बाद उन संस्थाओं पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
स्लीपर सेल की तरह नेटवर्क
मिशनरी की फंडिंग से धर्मांतरण का नेटवर्क चलाए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने पूरे जिले में संदिग्ध गतिविधियों वाली प्रार्थना सभाओं की निगरानी शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि धर्म परिवर्तन कराने वाले लोग स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं। धर्मांतरण का काम दिखाकर मिशनरियों से रुपये लेते हैं। इनमें से कुछ रुपये धर्मांतरण कराने पर खर्च करते हैं। जिले में एक हफ्ते में प्रार्थना सभा कराने के तीन मामले सामने आए हैं। ऐसे में पुलिस इस तथ्य पर भी जांच कर रही है कि इन तीनों या इनके जैसे अन्य लोग आपस में जुड़े हुए तो नहीं हैं। सभी की कॉल डिटेल चेक की जा रही है।
गिरफ्तार तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। उन्हें रिमांड में लेकर पूछताछ की जाएगी। फंडिंग करने वाली संस्था की बैंक डिटेल आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश द्विवेदी, एसपी