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उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालने वाले बेखौफ

Sat, 14 Mar 2015 11:07 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Sat, 14 Mar 2015 11:07 PM IST
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Pockets of consumers having a brazen robbery
बाजारों में उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालने के लिए घटतोली, ओवररेटिंग और मिलते-जुलते ब्रांड नेम वाले नकली माल की खपत धड़ल्ले से हो रही है। इस प्रवृत्ति पर रोकथाम के लिए विधिक माप विज्ञान विभाग उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता अभियान चलाने में भी कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा।
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बांट के बजाय ईंट-पत्थरों से तोली जा रहीं सब्जियां
नियमानुसार किसी भी वस्तु की तौल आईएसआई मार्क कांटे वाले तराजू और बांटों से होनी चाहिए, लेकिन शहर की सब्जी मंडियों में देहात से आने वाले विक्रेता डंडी वाले तराजू और ईंट-पत्थरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे लेकर खरीददारों और विक्रेताओं के बीच आए दिन नोकझोंक भी होती है।
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महंगी मिठाइयों के भाव बिक रहे गत्ते के डिब्बे
त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने पर दुकानदार पैकिंग वाले भारी डिब्बों का वजन भी उसी में शामिल कर लेते हैं। विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा तय मानकों के अनुसार डिब्बे का वजन 35 से 40 ग्राम तक होना चाहिए। इसके बजाय 100 ग्रराम वजन तक के डिब्बों का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। नियम यह भी है कि दुकानदार रेट लिस्ट के साथ डिब्बे का वजन भी अंकित कर उसका वास्तविक मूल्य अलग से लें, लेकिन ग्राहकों के ऐतराज करने पर दुकानदार उन्हें सौदा दिए बगैर लौटा देते हैं।
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इलेक्ट्रानिक वेइंग मशीनों से भी हो रही घटतोली
शहर के सदर बाजार और चौक के सर्राफा मार्केट में इलेक्ट्रॉनिक वेइंग मशीनों से घटतोली का खेल हो रहा है। अधिकारी भी मानते हैं कि सर्राफा व्यवसायी अपने प्रतिष्ठानों पर कई इलेट्रॉनिक मशीनों का इस्तेमाल करते हैं और चेकिंग के दौरान वही मशीन दिखते हैं जिसका विभाग से मेजरमेंट कराया जाता है। जिले में केवल 1800 वेइंग मशीनों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है, लेकिन बाजारों में करीब चार हजार मशीनें इस्तेमाल हो रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक मशीनों में घटतोली पकड़ने के लिए उनकी क्षमता के दस फीसदी पारंपरिक मोहर लगे बांट रखने अनिवार्य हैं, लेकिन इस व्यवस्था का पालन भी नहीं हो रहा है।


टाटा के बजाय टटवा ब्रांड का पकड़ा गया नमक
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा सैंपलिंग अभियान चलाए जाने के दौरान जिले में कई बार मिलते जुलते ब्रांड नेम वाली उपभोक्ता वस्तुएं पकड़ी जा चुकी हैं। पिछले साल शहर में एक नामी गुटखा निर्माता कंपनी से मेल खाते नाम वाले पान मसाला का जखीरा पकड़ा जा चुका है। इसी तरह जलालाबाद में नकली कोल्ड ड्रिंक बरामद हो चुका है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीपी सिंह के अनुसार दो माह पहले शहर में टाटा ब्रांड नमक की पैकिंग जैसे टटवा ब्रांड के नमक का नमूना जांच करने पर फेल हो गया।

सर्राफा मार्केट में नहीं हो रही घटतोली!
सदर बाजार के प्रमुख सर्राफा व्यवसायी विनोद सर्राफ नहीं मानते कि स्वर्णकार घटतोली में लिप्त हैं। हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि एक सर्राफा प्रतिष्ठान पर रखी सभी मशीनें बांट-माप विभाग से स्वीकृत नहीं होती, लेकिन सफाई देते हैं कि ऐसा ग्राहकों की सुविधा के लिए किया जाता है। उनके मुताबिक काउंटर पर कोई आभूषण पसंद आने पर गैर पंजीकृत मशीन से रफ कैलिब्रेशन करके ग्राहक को उसकी कीमत बताई जाती है और सौदा पटने पर खरीदे गए आभूषण का प्रतिष्ठान स्वामी रजिस्टर्ड मशीन से वजन करके वास्तविक मूल्य तय करते हैं।


सब्जियों के मनमाने रेट पर लगे रोक
‘ब्रांडेड उपभोक्ता वस्तुओं की तरह सब्जियों के रेट भी प्रशासन को समय-समय पर तय करने चाहिए। इससे सब्जी बेचने वालों की मनमानी थमेगी।’
- अजय खन्ना, चौक

ग्राहकों से लूट पर हो कड़ी कार्रवाई
‘ग्राहकों से तरह-तरह से लूट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होने से घटतौली पर रोक लग जाएगी। इसी तरह बाजार में किसी वस्तु की कमी होने पर ओवररेटिंग भी नहीं होगी।’
- सिमरन, कांशीराम कॉलोनी

भारी मुनाफाखोरी से उपभोक्ता परेशान
‘जब जिस चीज की ज्यादा जरूरत होती है, उसी के रेट बढ़ा दिए जाते हैं। मुनाफाखोरी पर रोक लगाकर आम लोगों की जेब ढीली होने से बाई जा सकती है।’
- हरजिंदर सिंह, चिनौर

प्रतिबंधित चीजों पर हावी ओवररेटिंग
‘चाहे राशन की दुकानें हों या फिर शराब के ठेके, अधिक कीमत चुकाकर वहां से कोई भी मनचाही चीज हासिल कर सकता है। रात दस बजे के बाद कीमत बढ़ाकर शराब की बिक्री आम बत हो गई है।’
- रोहित रावत, कटिया टोला

उपभोक्ता फोरम जाने से बच रहे दुकानदार
ग्राहकों के हितों की रक्षा को बनाए गए उपभोक्ता फोरम में तमाम मामले लंबे समय तक इस वजह से अटके रहते हैं क्योंकि विपक्षी दुकानदार जवाब दाखिल करने से कतराते हैं। फोरम के अध्यक्ष एके श्रीवास्तव के अनुसार गत वर्ष एक जनवरी से अब तक 345 मामले निर्णीत हो चुके हैं, लेकिन बीमा, बिजली, मोबाइल फोन में खराबी आदि के कई मामलों में प्रतिवादी अपना पक्ष प्रस्तुत करने में आनाकानी करते हैं।



जागरूकता अभियान को नहीं मिलता बजट
‘उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए विभाग को अलग से कोई फंड नहीं मिलता। इसके बावजूद बाजारों में सर्वे करके दुकानदारों को वेइंग मशीनों और बांटों का मेजरमेंट नहीं कराने पर उनसे जुर्माना वसूला जाता है। घटतौली पर दो हजार से लेकर दस हजार रुपये जुर्माना तक का प्रावधान है। चालू वित्त वर्ष के दौरान ऐसे मामलों में 14.50 लाख रुपये जुर्माना वसूल किया जा चुका है।’
- विजय मिश्र, जिला विधिक माप विज्ञान अधिकारी
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