{"_id":"58f505ef4f1c1b1974471bf0","slug":"pm-conducts-school-operations-on-parents-performance","type":"story","status":"publish","title_hn":"अभिभावकों के प्रदर्शन पर डीएम ने स्कूल संचालक किए तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अभिभावकों के प्रदर्शन पर डीएम ने स्कूल संचालक किए तलब
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
Updated Mon, 17 Apr 2017 11:44 PM IST
विज्ञापन
हंगामा
- फोटो : शाहजहांपुर ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्कूल में पहले से पंजीकृत छात्र-छात्राओं से अगली कक्षा में प्रवेश के बदले एडमीशन, एनुअल आदि विभिन्न मदों में हजारों रुपये की फीस मांगे जाने को मुद्दा बनाकर डॉ. सुदामा प्रसाद विद्या स्थली में हंगामेदार प्रदर्शन कर चुके अभिभावकों की जब सुनवाई नहीं हुइ तो वे सोमवार को कलक्ट्रेट पर जा धमके और प्रदर्शन के जरिये अपनी आवाज बुलंद की। डीएम ने तत्काल स्कूल प्रबंधक तलब कर लिए और उन्हें सरकारी नियम-कायदे के अनुरूप फीस लेने के निर्देश देते हुए चेताया कि द्विपक्षीय बैठक कर इस समस्या का शीघ्र समाधान करें और भविष्य में शासनादेश के विपरीत फीस वसूली की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
अभिभावक नारेबाजी करते हुए जिस वक्त कलक्ट्रेट कैंपस में दाखिल हुए, डीएम कर्ण सिंह चौहान एक बैठक में व्यस्त थे। सिटी मजिस्ट्रेट विजय शंकर दुबे अपने कक्ष में मौजूद मिले तो उन सभी ने उन्हीं को डीएम के नाम ज्ञापन देकर अपनी बात कहनी शुरू की। बताया कि स्कूल प्रबंधन ने तीन माह की फीस के साथ वार्षिक शुल्क, रख रखाव आदि मदों में चार हजार रुपये 30 अप्रैल तक जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अन्यथा की स्थिति में नाम काट देने की चेतावनी दी है।
अभिभावकों के शोर-शराबे के बीच डीएम मीटिंग हाल से उठकर अपने कक्ष में पहुंचे और अभिभावक उनके पास जा पहुंचे। उनका गुस्सा देख सिटी मजिस्ट्रेट ने डीएम के निर्देश पर स्कूल संचालक बुला लिए। उनसे मामले की भनक पाकर अन्य प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं के संचालक, प्रबंधक, प्रधानाचार्य भी वहां पहुंच गए। डीएम ने दोनों पक्षों से वार्ता कर समस्या का समाधान करने का सुझाव दिया।
विज्ञापन
इस पर अभिभावकों ने पुराने विद्यार्थियों से अगली कक्षा में एडमीशन के लिए भारी धनराशि मांगे जाने पर ऐतराज किया। स्कूल प्रबंधकों ने अपनी बात कहनी चाही, लेकिन अभिभावकों ने डीएम के सामने उनकी शिकायतोें की झड़ी लगा दी। डीएम ने अभिभावकों की कई आपत्तियों को जायज पाते हुए स्कूल प्रबंधकों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शासनादेश के विपरीत किसी भी मद में फीस की वसूली किए जाने शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। डीएम ने डीआईओएस और बीएसए को स्कूलों में शासनादेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए। अंत मेें तय हुआ कि 29 अप्रैल को विद्यास्थली में अभिभावकों के साथ बैठक कर स्कूल संचालक समस्या का समाधान खोजेंगे। इस मौके पर इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
000
ज्ञापन में दर्ज शिकायतें
0 पुराने विद्यार्थियों से अतिरिक्त शुल्क की वसूली।
0 बगैर मान्यता चलाई जा रहीं कक्षा 11, 12 की कक्षाएं।
0 कक्षा 11, 12 के विद्यार्थियों को नहीं मिल रही फीस की रसीद।
0 निश्चित दुकानों पर बिक रहीं स्कूल की महंगी ड्रेस और कोर्स।
0 फीस लेने के बावजूद जेनरेटर नहीं चलाया जाता।
0 सीबीएसई मानक के अनुरूप शिक्षक नियुक्त नहीं।
000
डीएम ने फिर दोहराया शासनादेश का मजमून
प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस वसूली को लेकर सामाजिक संगठन जनता की आवाज के कार्यकर्ता गत एक पखवाड़े से प्रदर्शनों की झड़ी लगाए हैं। इसे देखते डीएम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को गत सप्ताह शासनादेश की प्रति जारी कर उसका अनुपालन कराने के निर्देश दिए थे। उसी राजाज्ञा का संदर्भ लेते हुए डीएम ने स्कूल संचालकों को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि छात्रों से केवल उतना ही शिक्षण और महंगाई मद में मासिक शुल्क लिया जाएगा जो अध्यापकों और कर्मचारी कल्याणकारी योजना का अंशदान वहन करने को पर्याप्त होे। सभी व्यय करने के बाद शिक्षण शुल्क आय की कुल बचत 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो। शिक्षण शुल्क में तीन वर्ष बाद अधिकतम दस प्रतिशत वृद्धि होगी। राजाज्ञा में वर्णित अन्य कई मदाेें में शुल्क लिया जा सकता है।
विज्ञापन
अभिभावक नारेबाजी करते हुए जिस वक्त कलक्ट्रेट कैंपस में दाखिल हुए, डीएम कर्ण सिंह चौहान एक बैठक में व्यस्त थे। सिटी मजिस्ट्रेट विजय शंकर दुबे अपने कक्ष में मौजूद मिले तो उन सभी ने उन्हीं को डीएम के नाम ज्ञापन देकर अपनी बात कहनी शुरू की। बताया कि स्कूल प्रबंधन ने तीन माह की फीस के साथ वार्षिक शुल्क, रख रखाव आदि मदों में चार हजार रुपये 30 अप्रैल तक जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अन्यथा की स्थिति में नाम काट देने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन
अभिभावकों के शोर-शराबे के बीच डीएम मीटिंग हाल से उठकर अपने कक्ष में पहुंचे और अभिभावक उनके पास जा पहुंचे। उनका गुस्सा देख सिटी मजिस्ट्रेट ने डीएम के निर्देश पर स्कूल संचालक बुला लिए। उनसे मामले की भनक पाकर अन्य प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं के संचालक, प्रबंधक, प्रधानाचार्य भी वहां पहुंच गए। डीएम ने दोनों पक्षों से वार्ता कर समस्या का समाधान करने का सुझाव दिया।
विज्ञापन
इस पर अभिभावकों ने पुराने विद्यार्थियों से अगली कक्षा में एडमीशन के लिए भारी धनराशि मांगे जाने पर ऐतराज किया। स्कूल प्रबंधकों ने अपनी बात कहनी चाही, लेकिन अभिभावकों ने डीएम के सामने उनकी शिकायतोें की झड़ी लगा दी। डीएम ने अभिभावकों की कई आपत्तियों को जायज पाते हुए स्कूल प्रबंधकों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शासनादेश के विपरीत किसी भी मद में फीस की वसूली किए जाने शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। डीएम ने डीआईओएस और बीएसए को स्कूलों में शासनादेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए। अंत मेें तय हुआ कि 29 अप्रैल को विद्यास्थली में अभिभावकों के साथ बैठक कर स्कूल संचालक समस्या का समाधान खोजेंगे। इस मौके पर इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
000
ज्ञापन में दर्ज शिकायतें
0 पुराने विद्यार्थियों से अतिरिक्त शुल्क की वसूली।
0 बगैर मान्यता चलाई जा रहीं कक्षा 11, 12 की कक्षाएं।
0 कक्षा 11, 12 के विद्यार्थियों को नहीं मिल रही फीस की रसीद।
0 निश्चित दुकानों पर बिक रहीं स्कूल की महंगी ड्रेस और कोर्स।
0 फीस लेने के बावजूद जेनरेटर नहीं चलाया जाता।
0 सीबीएसई मानक के अनुरूप शिक्षक नियुक्त नहीं।
000
डीएम ने फिर दोहराया शासनादेश का मजमून
प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस वसूली को लेकर सामाजिक संगठन जनता की आवाज के कार्यकर्ता गत एक पखवाड़े से प्रदर्शनों की झड़ी लगाए हैं। इसे देखते डीएम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को गत सप्ताह शासनादेश की प्रति जारी कर उसका अनुपालन कराने के निर्देश दिए थे। उसी राजाज्ञा का संदर्भ लेते हुए डीएम ने स्कूल संचालकों को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि छात्रों से केवल उतना ही शिक्षण और महंगाई मद में मासिक शुल्क लिया जाएगा जो अध्यापकों और कर्मचारी कल्याणकारी योजना का अंशदान वहन करने को पर्याप्त होे। सभी व्यय करने के बाद शिक्षण शुल्क आय की कुल बचत 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो। शिक्षण शुल्क में तीन वर्ष बाद अधिकतम दस प्रतिशत वृद्धि होगी। राजाज्ञा में वर्णित अन्य कई मदाेें में शुल्क लिया जा सकता है।