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कब होगी पीलीभीत गए 94 गांवों की वापसी
पुवायां।
Updated Sat, 04 Jul 2015 11:23 PM IST
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शाहजहांपुर के पीलीभीत में शामिल 94 गांवों की वापसी के संदर्भ में मुख्यमंत्री कार्यालय के रिपोर्ट तलब करने के एक वर्ष बाद भी मामला जस का तस है। इससे गांवों की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे लोग निराश हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश में भाजपा सरकार के शासनकाल में पांच जनवरी 2001 को शाहजहांपुर की खुटार ब्लाक के 72 और बंडा ब्लाक के 22 गांव पीलीभीत की पूरनपुर तहसील में शामिल किए गए थे। शामिल किए गए गांवों के लोग आज भी पूरनपुर और पीलीभीत में उपेक्षापूर्ण व्यवहार की शिकायत करते हुए शाहजहांपुर में वापसी की मांग कर रहे हैं।
तहसील और सिविल बार संघ गांवों की वापसी को लेकर काफी समय से आंदोलनरत है। सिविल बार संघ के वकील इस मुद्दे को लेकर प्रत्येक शनिवार को हड़ताल पर रहते हैं। इसके अलावा तमाम बार वकीलों की ओर से तमाम बार मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक सहित अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए जा चुके हैं, लेकिन वर्षों पुरानी यह मांग अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। विधानसभा चुनाव के समय वर्तमान विधायक शकुंतला देवी ने वायदा किया था कि जीत के बाद वह इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाकर गांवों की वापसी कराएंगी।
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मुख्यमंत्री कार्यालय से जुलाई 14 में तहसीलदार पुवायां को एक पत्र भेजकर 94 गांवों की स्थित उनकी वापसी आदि से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है। पत्र में विधायक शकुंतला देवी और बार संघ की ओर से गांवों की वापसी की मांग का जिक्र किया गया था। तहसीलदार ने रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। स्त्रत्त्रिपोर्ट में गांवों की वापसी से संबंधित कोई स्पष्ट बात नहीं लिखकर गेंद सरकार के पाले में डाल दी गई थी।
बतातें चलें कि आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद अनुभाग -नौ की ओर से इस संबंध में चार वर्ष पूर्व भी रिपोर्ट मांगी गई थी। 19 जुलाई 11 को तहसील से रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
पीलीभीत में शामिल होने से हो रही दिक्कत
पुवायां। पीलभीत में शामिल किए जाने के बाद तमाम गांवों के लोगों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। शाहजहांपुर का थाना सेहरामऊ उत्तरी गांवों के पीलीभीत में जाने के साथ ही पीलीभीत में चला गया है। पीलीभीत के अधिकारी इस थाने को गढ़वाखेड़ा ले जाने की योजना बना रहे हैं। ऐसा होने से 94 गांवों की स्थित कटरी जैसी हो जाएगी। इसके अलावा पूरनपुर में सिविल न्यायालय नहीं होने के कारण लोगों को पीलीभीत की दौड़ लगानी पड़ती है। 94 गांवों के पुराने दीवानी वाद पुवायां और शाहजहांपुर में चल रहे हैं। इससे लोग परेशान हैं। वापसी होने से पुवायां में सिविल न्यायालय का लाभ मिलेगा। पूरनपुर जाने के लिए साधन नहीं होने से भी लोगों को भारी कठिनाई होती है। 17 गांव पंचायतों और लगभग 55 गांवों के लोगों ने शाहजहांपुर में वापसी का पत्र दिया है। लोगों का कहना है कि तहसील पूरनपुर में मात्र एक विकास खंड पूरनपुर है, जबकि वापसी होने पर खुटार और बंडा दो विकासखंड होंगे, जिससे विकास कार्य तेज होंगे। बिजली, वन विभाग, डाक और दूरसंचार का काम अभी भी शाहजहांपुर से ही होता है। किसानों को बैंकों से कर्ज लेने पर नोड्यूज पुवायां और पूरनपुर दो तहसीलों से लेने पड़ते हैं, जिससे भारी परेशानी होती है।
हड़ताल पर रहे वकील
पुवायां। पीलीभीत में शामिल किए गए 94 गांवों की वापसी की मांग को लेकर सिविल बार एसोसिएशन से जुड़े तमाम वकील हड़ताल पर रहे। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुशील कुमार लल्ला ने कहा कि गांवों की वापसी की मांग को लेकर वकील कई वर्षों से प्रत्येक शनिवार को हड़ताल पर रहते हैं, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ओमपाल यादव ने कहा कि चुनाव के समय नेता गांवों की वापसी की बात करते हें, लेकिन चुनाव के बाद इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। दिनेश मिश्रा, बलवीर सिंह, कृष्णानंद सिंह राठौर, अनूप कंचन, केसी राजपूत, अनूप सिंह, सुनील सिंह, श्रीकृष्ण बाजपेयी आदि वकीलों ने भी गांवों की शाहजहांपुर में वापसी कराने की मांग की है।
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गौरतलब है कि प्रदेश में भाजपा सरकार के शासनकाल में पांच जनवरी 2001 को शाहजहांपुर की खुटार ब्लाक के 72 और बंडा ब्लाक के 22 गांव पीलीभीत की पूरनपुर तहसील में शामिल किए गए थे। शामिल किए गए गांवों के लोग आज भी पूरनपुर और पीलीभीत में उपेक्षापूर्ण व्यवहार की शिकायत करते हुए शाहजहांपुर में वापसी की मांग कर रहे हैं।
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तहसील और सिविल बार संघ गांवों की वापसी को लेकर काफी समय से आंदोलनरत है। सिविल बार संघ के वकील इस मुद्दे को लेकर प्रत्येक शनिवार को हड़ताल पर रहते हैं। इसके अलावा तमाम बार वकीलों की ओर से तमाम बार मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक सहित अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए जा चुके हैं, लेकिन वर्षों पुरानी यह मांग अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। विधानसभा चुनाव के समय वर्तमान विधायक शकुंतला देवी ने वायदा किया था कि जीत के बाद वह इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाकर गांवों की वापसी कराएंगी।
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मुख्यमंत्री कार्यालय से जुलाई 14 में तहसीलदार पुवायां को एक पत्र भेजकर 94 गांवों की स्थित उनकी वापसी आदि से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है। पत्र में विधायक शकुंतला देवी और बार संघ की ओर से गांवों की वापसी की मांग का जिक्र किया गया था। तहसीलदार ने रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। स्त्रत्त्रिपोर्ट में गांवों की वापसी से संबंधित कोई स्पष्ट बात नहीं लिखकर गेंद सरकार के पाले में डाल दी गई थी।
बतातें चलें कि आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद अनुभाग -नौ की ओर से इस संबंध में चार वर्ष पूर्व भी रिपोर्ट मांगी गई थी। 19 जुलाई 11 को तहसील से रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
पीलीभीत में शामिल होने से हो रही दिक्कत
पुवायां। पीलभीत में शामिल किए जाने के बाद तमाम गांवों के लोगों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। शाहजहांपुर का थाना सेहरामऊ उत्तरी गांवों के पीलीभीत में जाने के साथ ही पीलीभीत में चला गया है। पीलीभीत के अधिकारी इस थाने को गढ़वाखेड़ा ले जाने की योजना बना रहे हैं। ऐसा होने से 94 गांवों की स्थित कटरी जैसी हो जाएगी। इसके अलावा पूरनपुर में सिविल न्यायालय नहीं होने के कारण लोगों को पीलीभीत की दौड़ लगानी पड़ती है। 94 गांवों के पुराने दीवानी वाद पुवायां और शाहजहांपुर में चल रहे हैं। इससे लोग परेशान हैं। वापसी होने से पुवायां में सिविल न्यायालय का लाभ मिलेगा। पूरनपुर जाने के लिए साधन नहीं होने से भी लोगों को भारी कठिनाई होती है। 17 गांव पंचायतों और लगभग 55 गांवों के लोगों ने शाहजहांपुर में वापसी का पत्र दिया है। लोगों का कहना है कि तहसील पूरनपुर में मात्र एक विकास खंड पूरनपुर है, जबकि वापसी होने पर खुटार और बंडा दो विकासखंड होंगे, जिससे विकास कार्य तेज होंगे। बिजली, वन विभाग, डाक और दूरसंचार का काम अभी भी शाहजहांपुर से ही होता है। किसानों को बैंकों से कर्ज लेने पर नोड्यूज पुवायां और पूरनपुर दो तहसीलों से लेने पड़ते हैं, जिससे भारी परेशानी होती है।
हड़ताल पर रहे वकील
पुवायां। पीलीभीत में शामिल किए गए 94 गांवों की वापसी की मांग को लेकर सिविल बार एसोसिएशन से जुड़े तमाम वकील हड़ताल पर रहे। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुशील कुमार लल्ला ने कहा कि गांवों की वापसी की मांग को लेकर वकील कई वर्षों से प्रत्येक शनिवार को हड़ताल पर रहते हैं, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ओमपाल यादव ने कहा कि चुनाव के समय नेता गांवों की वापसी की बात करते हें, लेकिन चुनाव के बाद इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। दिनेश मिश्रा, बलवीर सिंह, कृष्णानंद सिंह राठौर, अनूप कंचन, केसी राजपूत, अनूप सिंह, सुनील सिंह, श्रीकृष्ण बाजपेयी आदि वकीलों ने भी गांवों की शाहजहांपुर में वापसी कराने की मांग की है।