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31 मई 1857 : रक्तपात से पहले लोगों ने देखे थे डरावने ख्वाब
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जिला मजिस्ट्रेट एम. रिक्रेट की कब्र।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। 1857 की महान क्रांति की चिंगारी 31 मई को रविवार को शाहजहांपुर में शोला बनकर भड़की थी। जिला मजिस्ट्रेट समेत तमाम अंग्रेजों की हत्या कर दी गई थी। हाल में ही अंग्रेज लेखक आरवी स्मिथ की पुस्तक ‘रिवोल्ट ऑफ 1857: मिथ्स एंड सुपरस्टिशन गैलोर’ में ऐसे कई बुरे सपनों का जिक्र हुआ है जो रक्तपात से पहले लोगों ने देखे थे। इनमें से दो सपने शाहजहांपुर से जुड़े हुए हैं।
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि पुस्तक में भारत भर के यूरोपियों को आए बुरे स्वप्नों को संकलित किया गया है। एक सपना लेमेस्टेयर परिवार की बेटी को आया था, जिसमें उसे बार-बार एक बिना सिर का घुड़सवार दिखता है। वह उसके घर के अंदर तक आकर सीढ़ियों के पास गायब हो जाता था। उसने यह बात अपनी मां मरियम को भी बताई थी। मरियम के पिता मूलत: फ्रांसीसी थे तथा फ्रांस में हुई क्रांति के बाद भारत आ गए। उन्होंने अपनी बेटी की शादी मि. लेमेस्टियर से की थी, जिनसे उन्हें एक बेटी हुई थी। इस बेटी का नाम नॉवलिस्ट रस्किन बांड ने अपने नावेल ‘फ्लाइट आफ पिजन’ में रूथ लिखा है।
इस परिवार में घर के काम करने आने वाली महिला चंपा ने अनहोनी का अंदेशा परिवार को पूर्व में ही दे दिया था। लिहाजा 31 मई को जब मरियम के पति चर्च जाने के लिए निकले तो बेटी और मां ने प्रतिरोध किया थ। चर्च में जिला मजिस्ट्रेट की हत्या कर जब सैनिक लाइन में आने के लिए निकले तब थोड़ी ही दूर उनका सामना लेमेस्टियर से हो गया। उनकी हत्या कर दी गई। सूचना घर तक पहुंची और पड़ोसियों की मदद से मरियम तथा उनकी बेटी ने शहर के एक वैश्य परिवार में शरण ली।
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जहां से उन्हें मंगल खान जबरदस्ती अपने घर ले गया। किताब में संकलित किया गया दूसरा सपना एक पठान सैनिक का है। उसे विद्रोह से कुछ दिन पूर्व पुवायां से दिल्ली तक खून की एक नदी बहती दिखती थी। उसने यह बात कंपनी के अन्य सैनिकों को भी बताई थी। विद्रोह के बाद स्वप्न तत्कालीन कंपनी के अधिकारी टायलर को पता चला जिसके बाद इसे दस्तावेजों में सम्मिलित किया गया।
यह हुआ था घटनाक्रम
डॉ. विकास खुराना ने बताया कि 1857 की क्रांति में शाहजहांपुर में हुए घटनाक्रम से इसकी गूंज यूरोप तक पहुंच गई। 31 मई 1857 को कंपनी के सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया था। 20-22 सैनिकों ने कैट स्थित सेंट मेरी चर्च में प्रार्थना के लिए एकत्र अंग्रेजों पर हमला कर दिया। जिला मजिस्ट्रेट रिक्रेट, कैप्टन जेम्स, असिस्टेंट मजिस्ट्रेट एसी स्मिथ, सर्जन एचएच बाउलिंग, एमजे मेक्यूलर आदि मारे गए। कई यूरोपीय लोग भागने में सफल रहे। शाम को क्रांतिकारी शहर आए और अंग्रेजी राज की समाप्ति की घोषणा की। नई रुहेला सरकार का गठन कर दिया गया।
मैम साहब के भूत की किविदंती
31 मई की घटना से जुड़ी किवदंतियों में मेमसाहब के भूत की चर्चा भी होती है। सबसे पहले जेन एडम्स की पुस्तक ‘अल्बानिया के एंजल्स’ में मेमसाहब के भूत की चर्चा है। आज भी शहर के लोग उसे देखे जाने के दावे करते हैं।
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एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि पुस्तक में भारत भर के यूरोपियों को आए बुरे स्वप्नों को संकलित किया गया है। एक सपना लेमेस्टेयर परिवार की बेटी को आया था, जिसमें उसे बार-बार एक बिना सिर का घुड़सवार दिखता है। वह उसके घर के अंदर तक आकर सीढ़ियों के पास गायब हो जाता था। उसने यह बात अपनी मां मरियम को भी बताई थी। मरियम के पिता मूलत: फ्रांसीसी थे तथा फ्रांस में हुई क्रांति के बाद भारत आ गए। उन्होंने अपनी बेटी की शादी मि. लेमेस्टियर से की थी, जिनसे उन्हें एक बेटी हुई थी। इस बेटी का नाम नॉवलिस्ट रस्किन बांड ने अपने नावेल ‘फ्लाइट आफ पिजन’ में रूथ लिखा है।
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इस परिवार में घर के काम करने आने वाली महिला चंपा ने अनहोनी का अंदेशा परिवार को पूर्व में ही दे दिया था। लिहाजा 31 मई को जब मरियम के पति चर्च जाने के लिए निकले तो बेटी और मां ने प्रतिरोध किया थ। चर्च में जिला मजिस्ट्रेट की हत्या कर जब सैनिक लाइन में आने के लिए निकले तब थोड़ी ही दूर उनका सामना लेमेस्टियर से हो गया। उनकी हत्या कर दी गई। सूचना घर तक पहुंची और पड़ोसियों की मदद से मरियम तथा उनकी बेटी ने शहर के एक वैश्य परिवार में शरण ली।
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जहां से उन्हें मंगल खान जबरदस्ती अपने घर ले गया। किताब में संकलित किया गया दूसरा सपना एक पठान सैनिक का है। उसे विद्रोह से कुछ दिन पूर्व पुवायां से दिल्ली तक खून की एक नदी बहती दिखती थी। उसने यह बात कंपनी के अन्य सैनिकों को भी बताई थी। विद्रोह के बाद स्वप्न तत्कालीन कंपनी के अधिकारी टायलर को पता चला जिसके बाद इसे दस्तावेजों में सम्मिलित किया गया।
यह हुआ था घटनाक्रम
डॉ. विकास खुराना ने बताया कि 1857 की क्रांति में शाहजहांपुर में हुए घटनाक्रम से इसकी गूंज यूरोप तक पहुंच गई। 31 मई 1857 को कंपनी के सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया था। 20-22 सैनिकों ने कैट स्थित सेंट मेरी चर्च में प्रार्थना के लिए एकत्र अंग्रेजों पर हमला कर दिया। जिला मजिस्ट्रेट रिक्रेट, कैप्टन जेम्स, असिस्टेंट मजिस्ट्रेट एसी स्मिथ, सर्जन एचएच बाउलिंग, एमजे मेक्यूलर आदि मारे गए। कई यूरोपीय लोग भागने में सफल रहे। शाम को क्रांतिकारी शहर आए और अंग्रेजी राज की समाप्ति की घोषणा की। नई रुहेला सरकार का गठन कर दिया गया।
मैम साहब के भूत की किविदंती
31 मई की घटना से जुड़ी किवदंतियों में मेमसाहब के भूत की चर्चा भी होती है। सबसे पहले जेन एडम्स की पुस्तक ‘अल्बानिया के एंजल्स’ में मेमसाहब के भूत की चर्चा है। आज भी शहर के लोग उसे देखे जाने के दावे करते हैं।

कैंट में बना सेट मेरी चर्च- फोटो : SHAHJAHANPUR