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--कोई पार्टी नहीं करती गन्ना किसानों के हित की बात--

Tue, 01 Feb 2022 02:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 02:33 AM IST
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party not worried for cane farmer
पुवायां। विधानसभा चुनावों में पुवायां के लोग 14 फरवरी को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। पुवायां के किसानों में चुनाव के प्रति कोई खास उत्साह नहीं है। किसानों का कहना है कि सभी राजनैतिक दल केवल अपने लाभ के लिए ही किसानों का इस्तेमाल करते हैं, किसानों की समस्याओं के निस्तारण के नाम पर सभी चुप्पी साध जाते हैं।
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प्रदेश भर में खेती के मामले में पुवायां तहसील की अलग ही पहचान है, लेकिन किसानों को सुविधाओं के नाम पर क्षेत्र में कुछ नहीं किया गया है। पुवायां क्षेत्र में दो चीनी मिले हैं। एक पुवायां के गांव करनापुर में किसान सहकारी चीनी मिल और दूसरी बंडा के मकसूदापुर में बजाज ग्रुप की चीनी मिल है। सहकारी चीनी मिल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम होने के कारण क्षेत्र के बेरोजगारों को ज्यादा लाभ नहीं मिल सका है। किसानों का कहना है कि गन्ने के रेट में केवल 25 रुपये बढ़ाए गए हैं। रेट नहीं बढ़ने के लिए सभी राजनैतिक दल जिम्मेदार हैं।
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खेती किसानी में गन्ने को सब फसलों का ताऊ अर्थात प्रमुख नकदी फसल माना जाता था, लेकिन कई वर्षों से भुगतान की समस्या रेट नहीं बढ़ना आदि के चलते पुवायां में गन्ने का क्षेत्रफल काफी कम हो गया है।
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फैक्ट फाइल
) कुल कृषि योग्य भूमि 97 हजार हेक्टेयर
) गन्ने का क्षेत्रफल 20754 हेक्टेयर
) संभावित गन्ना उत्पादन 139.31 लाख क्विंटल
) किसानों का सट्टा 90.55 लाख क्विंटल
) पुवायां गन्ना समिति के सदस्य 80 हजार
) सट्टाधारक किसान 60 हजार लगभग
) सट्टाधारकों में पूरनपुर आंशिक क्षेत्र के किसान शामिल हैं।
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किसान नेता बीएम सिंह के कारण गन्ना किसान को उसका गन्ना भुगतान आदि मिल जाता है, नहीं तो चीनी मिल मालिक और नेताओं का गठजोड़ किसानों को पूरी तरह से बरवाद कर रख देता। राजनैतिक दल विपक्ष में होने पर बड़ी बातें करते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही मिल मालिकों की गोद में खेलने लगते हैं। कोर्ट जाने पर ही किसान को न्याय मिल पाता है, इसमें भी तमाम अड़ंगे लगाए जाते हैं।

रामशंकर मिश्रा, सिल्हुआ खुटार
तमाम राजनैतिक दलों की हालत हमाम में सभी नंगे जैसी है। किसानों के भले की बात भी नेता अपने भले के लिए ही करते हैं। कोई भी नेता मन से किसानों की बेहतरी के लिए काम नहीं करता है। वैसे भी अब राजनीति मतलबी होकर रह गई है। किसान बेहद परेशान है। इसे अन्नदाता का तमगा देकर बहलाया जाता है।
अनिल सिंह यादव, तहसील अध्यक्ष भाकियू पुवायां
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