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डेढ़ साल में भी नहीं बनी गर्रा पुल की एप्रोच रोड

Fri, 13 Mar 2015 12:39 AM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Fri, 13 Mar 2015 12:39 AM IST
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overbridge aproch road does not made
 गर्रा पुल की एप्रोच रोड बनाने का काम डेढ़ वर्ष से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी नहीं हो पाया है। इससे जिले के यात्रियों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। पहले तो शहर में आने के लिए करीब तीन रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। दूसरा यह कि शहर में आने में करीब 15 मिनट का समय भी अधिक लगता है।
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एप्रोच न बन पाने की वजह से शहर सहित जिले एवं अन्य जनपदों के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए है कि शहर में आने के लिए बसों को करीब तीन किलोमीटर घूमकर आना पड़ता है। इस से रोडवेज ने अपना किराया बढ़ाकर एवरेज पूरा कर लिया है, लेकिन यात्रियों की सुविधा से किसी को कई सरोकार नहीं है। पुल से आवागमन न शुरू होने का सबसे ज्यादा प्रभाव यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। जिले में आने-जाने वाले करीब पांच हजार यात्रियों पर 15 हजार रुपये को रोजाना अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
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गर्रा पुल का निर्माण देरी से हो पाया। अब करीब डेढ़ साल से गर्रा पुल की एप्रोच रोड का निर्माण कार्य अटका पड़ा है। इसमें सबसे पहले वन विभाग से अनुमति मिलने का पेंच फंस गया। इससे निजात पाने में करीब आठ माह का समय लग गया। इसके बाद लागत अधिक हो जाने की वजह से पुनरीक्षित बजट शासन को भेजा गया, जो करीब नौ माह गुजर जाने के बाद भी स्वीकृत नहीं हो सका।
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सेतु निगम ने पुल पर शुरू किया सड़क का काम
पुल के ऊपर कोटेड करके सड़क बनाने का काम सेतु निगम ने शुरू करवा दिया है। बृहस्पतिवार को सेतु निगम के ठेकेदार की ओर से सड़क निर्माण का काम जारी रहा। विभागीय सूत्रों की माने तो सेतु निगम अपना कार्य जल्द पूरा कर देगा। इसके बाद केवल पीडब्ल्यूडी का निर्माण कार्य बाकी रह जाएगा।


डग्गामारी पर लगेगी लगाम
गर्रा पुल से आवागमन शुरू होने की वजह से डग्गामार वाहनों पर भी आसानी से रोक लगाई जा सकेगी। इससे शहर के अंदर आने वाले यात्रियों को डग्गामार जीपों और टेंपों पर यात्री बैठना बंद कर देंगे। इससे डग्गामारी पर रोक लगाई जा सकेगी।

ऐसे डाला जा रहा यात्रियों की जेब पर ‘डाका’
बरेली मोड़ से एसएस कालेज, गर्रा पुल होते हुए रोडवेज बस अड्डे की दूरी नौ किलोमीटर है। वहीं बरेली मोड़ से हरदोई चौराहा, हथौड़ा चौराहा होते हुए 12 किलोमीटर दूरी पड़ती है। इससे यात्रियों को 15 मिनट अधिक यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता है। इसके अतिरिक्त तीन रुपये प्रति यात्री के हिसाब से अधिक रुपये भी चुकाना पड़ता है। करीब पांच हजार यात्री रोजाना आने-जाने का एवरेज है। इस हिसाब से 15 हजार रुपये प्रतिदिन खर्च होता है, जो करीब साढ़े चार लाख रुपये प्रतिमाह होता है। डेढ़ साल में करीब 80 लाख रुपये यात्रियों से वसूले जा चुके हैं।



‘करीब 210 करोड़ का पुनरीक्षित बजट अभी तक पास नहीं हुआ है। उम्मीद है कि आगामी कुछ महीनों में बजट पास हो जाएगा। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।’
- आरके सिंह, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड

‘पुनरीक्षित बजट पास होने के बाद एक से डेढ़ माह का समय लगेगा। बजट न मिलने की वजह से ही एप्रोच रोड बनाने का काम रोका गया है।’
- एसएम पांडेय, प्रभारी जेई, गर्रा पुल निर्माण


‘रोडवेज का किराया प्रति किलोमीटर निर्धारित होता है। उसी दर से ही किराया बढ़ाया गया है। इसके लिए कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया है। ’
- आरबी यादव, एआरएम 
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