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हार के बाद विपक्षी दल करेंगे समीक्षा, संगठन में फेरबदल की आशंका
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शाहजहांपुर। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस और बसपा में संगठन की ओवरहॉलिंग करने की तैयारी शुरू हो गई। लंबे समय से पदों पर जमे और चुनाव में बेहतर कार्य नहीं करने वाले मुख्य कमेटी और फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारियों पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी भी बैठक करने के बाद हार की समीक्षा करेगी। इसी क्रम में लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अंकुर कटियार ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया।
कांग्रेस जिला कमेटी में बदलाव और निष्क्रिय नेता होंगे पदमुक्त
जनपद में करारी हार से आहत कांग्रेस ने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का प्लान बनाया है। जल्द ही मीटिंग बुलाकर कांग्रेस के प्रत्याशियों और वरिष्ठ नेताओं से राय लेने के बाद जिला कमेटी के निष्क्रिय पदाधिकारियों को पदों से हटाया जाएगा। दूसरी तरफ फ्रंटल संगठन में लंबे समय से जमे पदाधिकारियों पर भी गाज गिरेगी। इन्हें पद से हटाकर नए और तेज तर्रार लोगों को मौका दिया जाएगा।
इससे लोकसभा चुनाव को लेकर नए सिरे से तैयारी की जा सकें। कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष पवन सिंह ने बताया कि पार्टी की जल्द ही समीक्षा बैठक होगी। उसमें मंथन करने के बाद वर्षों से पदों पर जमे निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाया जाएगा। बेहतर परिणाम नहीं दे पाने वालों को पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
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हर स्तर पर कमी तलाशेगी बसपा, फिर बदलाव
10 वर्ष पहले जनपद में बेहतर प्रदर्शन करने वाली बसपा का जनाधार भी खिसकने लगा है। 2007 में बसपा की तीन सीटें थीं। इस बार तो कई प्रत्याशियों की जमानत तक नहीं बच पाई। बसपा की जनपद में बदतर होती हालत और प्रत्याशियों की हार की कमी तलाशने के लिए अगले सप्ताह मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। उसमें हार पर मंथन किया जाएगा।
पदाधिकारियों, सेक्टर प्रभारी या कोऑर्डिनेटर स्तर से रहीं कमियों को तलाश करने के बाद उसकी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजी जाएगी। इसके बाद बदलाव होने के संकेत दिए गए हैं। बसपा के महानगर अध्यक्ष राशिद कुरैशी बताते हैं कि बसपा के पक्ष में दुष्प्रचार किया गया कि वह भाजपा की बी टीम है। हार का यह भी बड़ा कारण बना है। जनपद स्तर पर बसपा की स्थिति में सुधार के लिए बदलाव होगा। जिससे आने वाले चुनाव में पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
जनपद में हार की समीक्षा करेगी सपा
हर विधानसभा सीट में जीत के लिए आश्वस्त सपा का सूपड़ा साफ हो गया। लेकिन, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सपा के वोट प्रतिशत में इजाफा हो गया। सपा के पक्ष में बेहतर माहौल होने के बाद भी प्रत्याशियों के दूसरे नंबर पर रहने के कारण इस्तीफों का दौर शुरू हो गया। सपा लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अंकुर कटियार ने इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेजकर बताया कि यह हार जनता से नहीं हुई, बल्कि सपा के आत्मविश्वास के कारण हुई है। वहीं दूसरी तरफ सपा भी हार की समीक्षा करेगी। जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने बताया कि पूरे जनपद में सपा के प्रत्याशियों को खूब वोट मिला है। कुछ गांवों में उम्मीद से ज्यादा मत मिले हैं। हारने के बाद मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। हाईकमान के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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कांग्रेस जिला कमेटी में बदलाव और निष्क्रिय नेता होंगे पदमुक्त
जनपद में करारी हार से आहत कांग्रेस ने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का प्लान बनाया है। जल्द ही मीटिंग बुलाकर कांग्रेस के प्रत्याशियों और वरिष्ठ नेताओं से राय लेने के बाद जिला कमेटी के निष्क्रिय पदाधिकारियों को पदों से हटाया जाएगा। दूसरी तरफ फ्रंटल संगठन में लंबे समय से जमे पदाधिकारियों पर भी गाज गिरेगी। इन्हें पद से हटाकर नए और तेज तर्रार लोगों को मौका दिया जाएगा।
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इससे लोकसभा चुनाव को लेकर नए सिरे से तैयारी की जा सकें। कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष पवन सिंह ने बताया कि पार्टी की जल्द ही समीक्षा बैठक होगी। उसमें मंथन करने के बाद वर्षों से पदों पर जमे निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाया जाएगा। बेहतर परिणाम नहीं दे पाने वालों को पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
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हर स्तर पर कमी तलाशेगी बसपा, फिर बदलाव
10 वर्ष पहले जनपद में बेहतर प्रदर्शन करने वाली बसपा का जनाधार भी खिसकने लगा है। 2007 में बसपा की तीन सीटें थीं। इस बार तो कई प्रत्याशियों की जमानत तक नहीं बच पाई। बसपा की जनपद में बदतर होती हालत और प्रत्याशियों की हार की कमी तलाशने के लिए अगले सप्ताह मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। उसमें हार पर मंथन किया जाएगा।
पदाधिकारियों, सेक्टर प्रभारी या कोऑर्डिनेटर स्तर से रहीं कमियों को तलाश करने के बाद उसकी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजी जाएगी। इसके बाद बदलाव होने के संकेत दिए गए हैं। बसपा के महानगर अध्यक्ष राशिद कुरैशी बताते हैं कि बसपा के पक्ष में दुष्प्रचार किया गया कि वह भाजपा की बी टीम है। हार का यह भी बड़ा कारण बना है। जनपद स्तर पर बसपा की स्थिति में सुधार के लिए बदलाव होगा। जिससे आने वाले चुनाव में पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
जनपद में हार की समीक्षा करेगी सपा
हर विधानसभा सीट में जीत के लिए आश्वस्त सपा का सूपड़ा साफ हो गया। लेकिन, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सपा के वोट प्रतिशत में इजाफा हो गया। सपा के पक्ष में बेहतर माहौल होने के बाद भी प्रत्याशियों के दूसरे नंबर पर रहने के कारण इस्तीफों का दौर शुरू हो गया। सपा लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अंकुर कटियार ने इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेजकर बताया कि यह हार जनता से नहीं हुई, बल्कि सपा के आत्मविश्वास के कारण हुई है। वहीं दूसरी तरफ सपा भी हार की समीक्षा करेगी। जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने बताया कि पूरे जनपद में सपा के प्रत्याशियों को खूब वोट मिला है। कुछ गांवों में उम्मीद से ज्यादा मत मिले हैं। हारने के बाद मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। हाईकमान के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।