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ट्रॉली ट्रांसफार्मर: भीषण गर्मी में एक अनार-सौ बीमार जैसे हालात

Thu, 28 Apr 2022 12:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2022 12:21 AM IST
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Only seven trolley transformers at nine substations
शाहजहांपुर में बिजली आपूर्ति के लिए हाईटेंशन लाइन नेटवर्क से जोड़ा गया ट्रॉली ट्रांसफार्मर। सं? - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। गर्मी के सीजन में जैसे-जैसे पारा चढ़ने के साथ उमस बढ़ रही है। पावर नेटवर्क से जुड़े ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग के शिकंजे में आ रहे हैं। ऐसे मौके पर प्रभावित क्षेत्र की बिजली सप्लाई सामान्य बनाए रखने को नया ट्रांसफार्मर मिलने तक ट्रॉलियों पर रखे मोबाइल ट्रांसफार्मर बहुत काम आते हैं। 33 केवी क्षमता के प्रत्येक सब स्टेशन पर कम से कम एक ट्रॉली ट्रांसफार्मर होना चाहिए, लेकिन सिर्फ शहर के विद्युत वितरण खंड द्वितीय की बात करें तो नौ उपकेंद्रों के बीच केवल सात ट्रॉली ट्रांसफार्मर हैं। भीषण गर्मी में एक साथ कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर खराबी के शिकंजे में आने पर ट्रॉली ट्रांसफार्मर लगाने को लेकर एक अनार-सौ बीमार जैसे हालात बन सकते हैं।
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39 उपकेंद्रों के लिए सिर्फ 30 ट्रॉली ट्रांसफार्मर
जिले में 33 केवी क्षमता के 38 सब स्टेशनों से विभिन्न श्रेणियों के 4500 ट्रांसफार्मर जुड़े हैं। 132 केवी और 220 केवी क्षमता वाले पावर स्टेशनों पर लगे पांच एमवीए और अधिक क्षमता वाले बड़े ट्रांसफार्मरों में कोई फाल्ट होने पर वहां उन्हें तत्काल सुधारने का काम शुरू कर दिया जाता है, लेकिन वितरण प्रणाली से जुड़े 100, 250 और 400 केवी क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के जलने की दशा में उन्हें बदलने में 24 से 36 घंटे लग जाते हैं। इतनी देर तक क्षेत्र विशेष में बिजली आपूर्ति बाधित नहीं रहे, इसकेे लिए ट्रॉली ट्रांसफार्मर लगाए जाते हैं, लेकिन जिले में इनकी संख्या 30 तक सीमित है। ग्रामीण क्षेत्र में हालात उस वक्त विकट हो जाते हैं, जब किसी कस्बे मेें ट्रांसफार्मर खराब होने पर उसे दूसरे वितरण खंड से मंगाने पर दो दिन लग जाते हैं।
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33 केवी के हर सब स्टेशन पर ट्रॉली ट्रांसफार्मर होना अनिवार्य नहीं है। भीषण गर्मी में ओवरलोडिंग की समस्या से ट्रांसफार्मर खराब होते हैं, लेकिन यह स्थिति हर समय नहीं रहती है। फिलहाल, शहर में सभी ट्रांसफार्मर सामान्य रूप से क्रियाशील हैं। ट्रॉली ट्रांसफार्मर लगाने में भी कई समस्याएं आती है। इनसे रोड का हिस्सा घिर जाता और जन सुरक्षा के लिहाज से भी यह स्थिति खतरनाक होती है। ट्रांसफार्मर वर्कशॉप में 24 घंटे काम होता है और जरूरत पड़ने पर वहां से दूसरा ट्रांसफार्मर मंगा लिया जाता है। -प्रशांत गुप्ता, एक्सईएन (सिटी), पावर कारपारेशन
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