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किसानों की कमाई से अफसरों की आवभगत
तिलहर।
Updated Wed, 22 Apr 2015 08:53 PM IST
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फसल बर्बाद होने से परेशान किसान जहां मौत को गले लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर सारे कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर चीनी मिल गेस्ट हाउस में स्थानीय स्तर पर आने वाले प्रशासनिक अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रभावशाली लोेगों की आवभगत पर दिल खोलकर खर्च किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार तहसील दिवस में पहुंचने वाले अधिकांश अधिकारी गेस्ट हाउस की मेहमान नवाजी का पूरा लुत्फ उठाते हैं। यह बात अलग है कि लगभग तीन अरब के घाटे के चलते अंतिम सांसें गिन रही चीनी मिल किसानों के बकाये का भुगतान भले न कर पाये, लेकिन प्रशासन की मेहमाननवाजी का पूरा ख्याल रखती है।
किसानों की जुबानी-
-मिल पर लगभग 90,000 रूपये भुगतान बकाया है, कोई भरोसा नहीं कब मिलेगा। पैसा मिले तो बच्चों की पढ़ाई लिखाई का बंदोबस्त हो।
-राजेश शर्मा, गांव टाई
- खेती में जी जान लड़ाने के बाद फैक्ट्री में गन्ना डालना किसी जंग से कम नहीं है और पैसा मिलना तो उससे भी बड़ी जंग है। मेरा व मेरे चाचा का लगभग साठ हजार रुपये बकाया है।
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- संजीव यादव, गांव शिवदासपुर
- अधिकारी तो अपना काम चला ही लेते हैं। मरण तो हम किसानों का है। मिल पर 25 हजार रुपये बकाया है। मिले तो लड़की के हाथ पीले करूं।
- मुनीम सिंह, गांव फत्तेहपुर गैसरा
- लगभग एक लाख रुपये मिल पर बकाया है। अधिकारी तो गेस्ट हाउस में मौज उड़ाते हैं। हम किसानों को कुछ नहीं मिलता है।
- दुष्यंत गंगवार, गांव वीरमपुर
- पांच सौ क्विंटल गन्ना डालने के बाद भी खाली हाथ घूम रहे हैं। भगवान ही जाने मिल अधिकारी कब तक पेमेंट करेंगे।
- मोर पाल सिंह, गांव खिरिया माल
- अधिकारियों के जलपान, भोजन आदि की व्यवस्था डीएम के बिहाफ पर की जाती है। वैसे भी अतिथि का सत्कार करना हमारी परंपरा है। रही भुगतान की बात वह तो मैं भी अपनी जेब से कर सकता हूं। - पदम सिंह, एसडीएम, तिलहर
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सूत्रों के अनुसार तहसील दिवस में पहुंचने वाले अधिकांश अधिकारी गेस्ट हाउस की मेहमान नवाजी का पूरा लुत्फ उठाते हैं। यह बात अलग है कि लगभग तीन अरब के घाटे के चलते अंतिम सांसें गिन रही चीनी मिल किसानों के बकाये का भुगतान भले न कर पाये, लेकिन प्रशासन की मेहमाननवाजी का पूरा ख्याल रखती है।
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किसानों की जुबानी-
-मिल पर लगभग 90,000 रूपये भुगतान बकाया है, कोई भरोसा नहीं कब मिलेगा। पैसा मिले तो बच्चों की पढ़ाई लिखाई का बंदोबस्त हो।
-राजेश शर्मा, गांव टाई
- खेती में जी जान लड़ाने के बाद फैक्ट्री में गन्ना डालना किसी जंग से कम नहीं है और पैसा मिलना तो उससे भी बड़ी जंग है। मेरा व मेरे चाचा का लगभग साठ हजार रुपये बकाया है।
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- संजीव यादव, गांव शिवदासपुर
- अधिकारी तो अपना काम चला ही लेते हैं। मरण तो हम किसानों का है। मिल पर 25 हजार रुपये बकाया है। मिले तो लड़की के हाथ पीले करूं।
- मुनीम सिंह, गांव फत्तेहपुर गैसरा
- लगभग एक लाख रुपये मिल पर बकाया है। अधिकारी तो गेस्ट हाउस में मौज उड़ाते हैं। हम किसानों को कुछ नहीं मिलता है।
- दुष्यंत गंगवार, गांव वीरमपुर
- पांच सौ क्विंटल गन्ना डालने के बाद भी खाली हाथ घूम रहे हैं। भगवान ही जाने मिल अधिकारी कब तक पेमेंट करेंगे।
- मोर पाल सिंह, गांव खिरिया माल
- अधिकारियों के जलपान, भोजन आदि की व्यवस्था डीएम के बिहाफ पर की जाती है। वैसे भी अतिथि का सत्कार करना हमारी परंपरा है। रही भुगतान की बात वह तो मैं भी अपनी जेब से कर सकता हूं। - पदम सिंह, एसडीएम, तिलहर